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लुभावने ऑफर की आड़ में ऐसे होता है फ्रॉड
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 23 Jun 2014 07:56 AM IST
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अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोई ट्रैवेल एजेंसी आपको महंगे क्लबों और विदेशों में छुट्टी मनाने के साथ मुफ्त प्लॉट जैसा ऑफर देती है तो सचेत हो जाइए।
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ऐसे ऑफर ग्राहकों को फंसाने और उनसे उगाही करने का जरिया हो सकते हैं। हॉलीडे कंपनियों के ऐसे लुभावने ऑफर को जिला उपभोक्ता फोरम ने भी फ्रॉड माना है।
कंट्रीक्लब वेकेशन कंपनी के खिलाफ एक शिकायत की सुनवाई में फोरम ने आश्चर्य जताया कि 1.83 लाख रुपये की मेंबरशिप फीस में कैसे कोई कंपनी मुंबई जैसे शहर में प्लॉट दिला सकती है।
हॉलीडे सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी कंट्रीक्लब के लोकल फ्रेंचाइजी और मुख्य प्रबंधक के खिलाफ अवधकुंज कालोनी, पिकनिक स्पॉट रोड निवासी अंजली और अमित प्रकाश आनंद निवासी ने शिकायत की थी।
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शिकायत के मुताबिक वादी को कंपनी ने लुभावने ऑफर देकर अपनी कंट्री वेकेशन इंटरनेशनल हाली क्लब की सदस्यता लेने के लिए प्रेरित किया।
इसके लिए शिकायतकर्ता ने दो इन्स्टॉलमेंट में 60,000 रुपये दे दिए। भुगतान के करीब 15 दिन बाद ही अमित आनंद ने कंपनी के फर्जी पाए जाने पर अपनी सदस्यता नोटिस देकर वापस कर दी।
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उनकी शिकायत थी कि ऑफर देते समय उन्हें बताया गया कि क्लब की सदस्यता लेने के एक महीने बाद उन्हें एक प्लॉट दिया जाएगा।
कंपनी के क्लब में स्वीमिंग पूल और बार की सुविधा भी दिए जाने का ऑफर दिया गया। सुविधा देने या जमा किए गए पैसे लौटाने की जगह एक नोटिस देकर कंपनी ने उनकी सदस्यता को ही रद कर दी।
उन्हें बताया गया कि पूरी फीस जमा नहीं करने से ऐसा किया गया। सुनवाई में उपभोक्ता फोरम ने पाया कि समझौते की फोटोकॉपी के मुताबिक वादी को मुंबई में प्लॉट दिया जाना प्रस्तावित है।
वहीं शिकायतकर्ता के कंपनी पर फर्जी होने और लखनऊ में कोई अस्तित्व नहीं होने के आरोप का भी कोई खंडन नहीं किया गया।
फोरम ने माना कि कंट्री क्लब ने फर्जी और झूठे तथ्यों से शिकायतकर्ता से सदस्यता के लिए समझौता किया।
कोई सुविधा या मुंबई में प्लॉट भी उपलब्ध नहीं कराया गया। फोरम का कहना था कि 1.83 लाख की मेंबरशिप फीस में मुंबई में 2,000 स्क्वायर फीट का प्लॉट कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है।
कंपनी ने शर्त में किसी भी न्यायालय में मांग करने का अधिकार नहीं होने की भी बात रखी थी। हालांकि, ग्राहक से प्लॉट के विकास शुल्क के तौर पर 20,000 रुपये भी वसूले जाने थे।
इसे लुभावने ऑफर देकर फंसाना ही माना गया। अध्यक्ष विजय वर्मा, सदस्य अंजू अवस्थी, एसएक्यू रिजवी की फोरम ने आदेश में कहा कि कंपनी का उद्देश्य सद्भावनापूर्ण नहीं था।
उनका एकमात्र उद्देश्य ग्राहक को लुभाकर उससे धनराशि की उगाही करना था। अपने पैसे वापस लेने की प्रार्थना को भी कंपनी ने अनसुना कर दिया।
यह अनुचित व्यापार प्रक्रिया और सेवा में कमी है। ऐसे में कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 60,000 उपभोक्ता को वापस करने होंगे। इसके अलावा 10,000 रुपये क्षतिपूर्ति और 3,000 रुपये विधिक व्यय का भी भुगतान करना होगा।