होमगार्ड ड्यूटी घोटाले की जांच को जिलों में बनेंगी समितियां, 34 महीनों के मस्टर रोल की करेंगी जांच
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प्रदेश सरकार ने होमगार्डों की ड्यूटी में हुए फर्जीवाड़े के बाद अब स्वयं सेवकों की ड्यूटी के मस्टर रोल की जांच के लिए सभी जिलों में समिति गठित करने के आदेश दिए हैं। जिले के अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली इस समिति में अपर पुलिस अधीक्षक व जिला कमांडेंट बतौर सदस्य होंगे। नई व्यवस्था के लिए शासनादेश जारी कर दिया गया है।
होमगार्ड स्वयं सेवकों की ड्यूटी के एक दिसंबर 2016 से 30 सितंबर 2019 तक के मस्टर रोल व भुगतान की जांच की जा रही है। सरकार के आदेश पर बनने वाली जिलों की समितियां इन 34 महीनों के मस्टर रोल की जांच करेंगी। ड्यूटी सूची को उपहार पोर्टल से हासिल कर मस्टर रोल से मिलान किया जाएगा। यह नई व्यवस्था एरियर का सही भुगतान करने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर प्रभावी की जा रही है।
होमगार्ड ड्यूटी घोटाले के आरोपी कंपनी कमांडर की जमानत अर्जी खारिज
होमगार्ड की ड्यूटी लगाने में हेरफेर कर लाखों रुपये का घोटाला करने के आरोपी कंपनी कमांडर सुशील कुमार की जमानत अर्जी एडीजे संजय शंकर पांडेय ने खारिज कर दी। कोर्ट में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए सरकारी वकील दीपक यादव का तर्क था कि वादी गुडंबा थाने के प्रभारी रितेंद्र प्रताप सिंह ने गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। डिप्टी कमांडेंट जनरल रणजीत सिंह के पत्र के आधार पर जांच की गई तो पता चला कि होमगार्ड के मस्टर रोल और वास्तविक ड्यूटी में अनियमितता के साथ ही भुगतान में लगभग 3 गुना का अंतर है।
होमगार्ड मुख्यालय की रिपोर्ट और ड्यूटी के मस्टर रोल के मिलान से पता चला कि मात्र दो माह में ही 4 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान किया गया। फर्जी मस्टर रोल, हस्ताक्षर और दस्तावेज बनाकर घोटाला किया गया। पुलिस की विवेचना के दौरान पता चला कि कंपनी कमांडर सुशील कुमार की मामले में संलिप्तता है। आरोपी ने 25 नवंबर को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर उसके घर से 19 मुहरें बरामद की थीं जिनका इस्तेमाल करके आरोपी ने फर्जी मस्टर रोल बनाकर घोटाला किया।