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यूपी: अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज और पारीक्षा प्लांट पर कोयला संकट, सिर्फ दो से चार दिन का ही बचा है स्टॉक
Thu, 05 May 2022 11:04 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 05 May 2022 11:04 AM IST
सार
यूपी के अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज और पारीक्षा प्लांट में कोयला संकट गहरा गया है। चार प्रमुख उत्पादन प्लांटों पर 2 से 4 दिन का ही कोयला बचा है। उपलब्धता और मांग में 2000 मेगावाट से अधिक का अंतर बना हुआ है। ललितपुर पावर की 660 मेगावाट की इकाई से उत्पादन शुरू हुआ है।
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फाइल फोटो
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
प्रदेश के प्रमुख विद्युत उत्पादन गृहों में अब भी कोयले के किल्लत बनी हुई है। ओबरा, अनपरा, पारीक्षा और हरदुआगंज विद्युत उत्पादन गृहों में मात्र 2 से 4 दिन के लिए ही कोयला उपलब्ध है। वहीं, बुधवार को बिजली की मांग 23538 मेगावाट तक पहुंचने के कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई है। शहरी क्षेत्रों में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, पर ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट अब भी बना हुआ है।
इससे निपटने के लिए उप्र पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा 2000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद भी बुधवार को बिजली की उपलब्धता और मांग में 2 से 2.5 हजार मेगावाट का अंतर बना रहा। वहीं ललितपुर पावर प्लांट की 660 मेगावाट क्षमता की इकाई से बुधवार को विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है और अन्य बंद इकाईयों को जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अनपरा विद्युत उत्पादन गृह को पूरी क्षमता से चलाने के लिए 40000 मिट्रिक टन कोयले की आवश्यकता थी, लेकिन बुधवार को मात्र 31000 एमटी कोयला ही उपलब्ध हो पाया। यानी अनपरा पावर प्लांट के पास मात्र 4 दिन का ही कोयला शेष बचा है। ओबरा विद्युत उत्पादन गृह को 12500 के स्थान पर 11500 एमटी और हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट को 19000 के स्थान पर मात्र 11500 एमटी ही कोयला मिल पाया। इस प्रकार हरदुआगंज के पास 4 दिन और और ओबरा के पास 3 दिन का ही कोयला बचा है।
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जबकि पारीक्षा पावर प्लांट को 15500 के स्थान पर 3500 एमटी ही कोयला उपलब्ध कराया जा सका है। यहां भी अब 2 दिन का ही कोयला उपलब्ध है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को बिजली की उपलब्धता और मांग में भारी अंतर होने के बावजूद जिला, तहसील और नगर पंचायत मुख्यालयों पर बिजली आपूर्ति शेड्यूल के मुताबिक ही की गई।
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इससे निपटने के लिए उप्र पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा 2000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद भी बुधवार को बिजली की उपलब्धता और मांग में 2 से 2.5 हजार मेगावाट का अंतर बना रहा। वहीं ललितपुर पावर प्लांट की 660 मेगावाट क्षमता की इकाई से बुधवार को विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है और अन्य बंद इकाईयों को जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अनपरा विद्युत उत्पादन गृह को पूरी क्षमता से चलाने के लिए 40000 मिट्रिक टन कोयले की आवश्यकता थी, लेकिन बुधवार को मात्र 31000 एमटी कोयला ही उपलब्ध हो पाया। यानी अनपरा पावर प्लांट के पास मात्र 4 दिन का ही कोयला शेष बचा है। ओबरा विद्युत उत्पादन गृह को 12500 के स्थान पर 11500 एमटी और हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट को 19000 के स्थान पर मात्र 11500 एमटी ही कोयला मिल पाया। इस प्रकार हरदुआगंज के पास 4 दिन और और ओबरा के पास 3 दिन का ही कोयला बचा है।
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जबकि पारीक्षा पावर प्लांट को 15500 के स्थान पर 3500 एमटी ही कोयला उपलब्ध कराया जा सका है। यहां भी अब 2 दिन का ही कोयला उपलब्ध है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को बिजली की उपलब्धता और मांग में भारी अंतर होने के बावजूद जिला, तहसील और नगर पंचायत मुख्यालयों पर बिजली आपूर्ति शेड्यूल के मुताबिक ही की गई।
तैनाती स्थल पर ही मौजूद रहें कर्मी: एम देवराज
उधर, प्रमुख सचिव ऊर्जा एम देवराज ने भी विद्युत उत्पादन गृहों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को 24 घंटे पूरी स्थिति पर नजर रखने और तैनाती स्थल पर ही मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। बैठक में विद्युत उत्पादन से जुड़े अधिकारियों से भी उन्होंने अधिक विद्युत उत्पादन का प्रयास करने की अपील की।