सरकार के मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे सीएमओ, सीएम योगी के कोप का होना पड़ा शिकार
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आगरा, मथुरा, बुलंदशहर, कानपुर और बलिया सहित दर्जनों जिलों के सीएमओ को कोरोना संक्रमण नियंत्रण में सही काम न करने पर हटाया जा चुका है। कोरोना की शुरुआत के समय नोएडा का बुरा हाल था। 1 अप्रैल को वहां सीएमओ रहे डॉ. अनुराग भार्गव को हटाया गया और परिवार कल्याण महानिदेशालय से राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एपी चतुर्वेदी को सीएमओ की जिम्मेदारी दी गई थी।
19 अप्रैल को डॉ. एपी चतुर्वेदी को हटाकर आगरा से डॉ. दीपक ओहरी को लाकर नोएडा का सीएमओ बनाया गया। बताया जा रहा है कि डॉ. चतुर्वेदी स्वयं कोरोना संक्रमित हो गए थे। 13 मई को सीएम के निर्देश पर मथुरा के सीएमओ डॉ. शेर सिंह को हटाकर डॉ. संजीव यादव सीएमओ बनाए गए थे।
आगरा के सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स पर भी गिरी थी गाज
उधर, बुलंदशहर में डॉ. केएन तिवारी को हटाकर डॉ. भवतोष शंखधर को सीएमओ की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी तरह कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों का काबू न कर पाने के कारण आगरा के सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स और अपर निदेशक मंडल पर भी गाज गिरी थी। दोनों ही अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे थे।
उन्हें सेवानिवृति तक पद पर रखने के लिए डॉ. आरसी पांडेय को सीएमओ कार्यालय में ओएसडी और डॉ. अविनाश कुमार सिंह को अपर निदेशक मंडल कार्यालय में ओएसडी बनाया गया था। लेकिन आगरा में बेकाबू संक्रमण के चलते शासन ने आनन-फानन में अधिकारियों के पदों पर फेरबदल कर दिया था।
शासन ने डॉ. आरसी पांडेय को आगरा के सीएमओ के पद पर तैनात किया था। वहीं अपर निदेशक आगरा मंडल के पद पर डॉ. अविनाश कुमार सिंह को तैनात किया था। डॉ. एसपी गौतम को शाहजहांपुर का सीएमओ नियुक्त किया था। वहां से डॉ. राजीव कुमार गुप्ता को हटाया गया। इसी तरह 17 जुलाई को कानपुर से डॉ. अशोक शुक्ला और बलिया से डॉ. प्रीतम कुमार मिश्रा को हटाया गया है।
अस्पतालों के सीएमएस पर भी गिरी गाज
इससे वह पहले से ही वहां की कार्यशैली को समझ लें, लेकिन नतीजा अच्छा नहीं निकला। कई जिलों में सीएमओ की सेवानिवृत्ति से पहले ही ओएसडी को कार्यभार सौंपना पड़ गया।