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सहकारी बैंक के एमडी के खिलाफ मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच प्रमुख सचिव सहकारिता को सौंपी
Sun, 19 May 2019 07:45 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sun, 19 May 2019 07:45 PM IST
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उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक केपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रमुख सचिव सहकारिता के खिलाफ जनसुनवाई पोर्टल पर हुई शिकायत का संज्ञान लेते हुए ये फैसला किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रमुख सचिव सहकारिता को पूरे मामले की जांच करते हुए यथास्थिति से अवगत कराने के लिए कहा है।
उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक केपी सिंह के खिलाफ जनसुवाई पोर्टल पर 24 अप्रैल 2019 को भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। इसके बाद 7 मई 2019 को मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रमुख सचिव सहकारिता एमवी रामी रेड्डी को उनके खिलाफ जांच के निर्देश दिए हैं।
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उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक केपी सिंह के खिलाफ जनसुवाई पोर्टल पर 24 अप्रैल 2019 को भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। इसके बाद 7 मई 2019 को मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रमुख सचिव सहकारिता एमवी रामी रेड्डी को उनके खिलाफ जांच के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि केपी सिंह पर पीसीयू प्रबंध निदेशक, अपर निबंधक व अपर आयुक्त प्रशासन सहकारिता के पद पर रहते हुए 15 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। इसकेअलावा एक क्षेत्रीय प्रबंधक के पद पर बिना स्वीकृति नियुक्ति की। क्षेत्रीय कार्यालय खोलने और क्षेत्रीय प्रबंधक के टीए-डीए के रूप में करोड़ों रुपये का खर्च बढ़ा दिया।
यहां तक कि कार के वीआईपी नंबर के लिए 15 हजार रुपये की व्यवस्था फर्जी वाउचर से करने, लखीमपुर खीरी में 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में निलंबित 29 कर्मचारियों को बहाल करने की एवज में भी करोड़ों का वारा-न्यारा करने, आगरा के सिकंदरा में होटल बनाने और 100 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति बनाने का आरोप भी है।
यहां तक कि कार के वीआईपी नंबर के लिए 15 हजार रुपये की व्यवस्था फर्जी वाउचर से करने, लखीमपुर खीरी में 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में निलंबित 29 कर्मचारियों को बहाल करने की एवज में भी करोड़ों का वारा-न्यारा करने, आगरा के सिकंदरा में होटल बनाने और 100 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति बनाने का आरोप भी है।