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जब हार से मायूस सीएम योगी ने रद्द किए दौरे और अपने सारे कार्यक्रम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:39 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
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गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में भाजपा को मिली करारी हार का असर सीएम योगी आदित्यनाथ पर दिखने लगा है। यही वजह है कि शायद उन्होंने गुरुवार को आयोजित अपने सारे कार्यक्रम और दौरों को रद्द कर दिया है। हालांकि, वह अफसरों के साथ बैठक करेंगे। ये बैठक जनता से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी हो सकती है।
जनता के बीच फिर से भरोसा पैदा करने के लिए सीएम अफसरों को उचित दिशा-निर्देश दे सकते हैं। हार से मायूस हुए सीएम अब जन समस्याओं को प्रमुखता में दूर कर उनमें भाजपा के प्रति विश्वास बनाना चाहते हैं।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गढ़ फूलपुर में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वहीं, गोरखपुर संसदीय सीट पर 28 साल बाद गोरक्षपीठ का दबदबा खत्म हो गया। इसी तरह 2014 में केशव मौर्य की जीत के साथ आजादी के बाद पहली बार फूलपुर में खिला कमल भी चार साल में ही मुरझा गया।
इससे पहले भाजपा की हार पर सीएम ने कहा था कि ये चुनाव परिणाम हमारे लिए एक सबक हैं। हम इसकी समीक्षा करेंगे। जो नतीजे आए हैं हम उनका सम्मान करते हैं और विजयी प्रत्याशियों को बधाई देते हैं। उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन को राजनीतिक सौदेबाजी करार देते हुए कहा कि हम इस गठबंधन को नहीं समझ सके हैं। हमें इसके लिए एक रणनीति बनानी होगी। उन्होंने अतिआत्मविश्वास को भी हार का एक कारण बताया।
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जनता के बीच फिर से भरोसा पैदा करने के लिए सीएम अफसरों को उचित दिशा-निर्देश दे सकते हैं। हार से मायूस हुए सीएम अब जन समस्याओं को प्रमुखता में दूर कर उनमें भाजपा के प्रति विश्वास बनाना चाहते हैं।
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CM Yogi Adityanath has cancelled engagements and visits scheduled for today, he will hold meetings with officials instead (file pic) pic.twitter.com/XaE0yVCCak
विज्ञापन विज्ञापन— ANI UP (@ANINewsUP) March 15, 2018
मालूम हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गढ़ फूलपुर में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वहीं, गोरखपुर संसदीय सीट पर 28 साल बाद गोरक्षपीठ का दबदबा खत्म हो गया। इसी तरह 2014 में केशव मौर्य की जीत के साथ आजादी के बाद पहली बार फूलपुर में खिला कमल भी चार साल में ही मुरझा गया।
इससे पहले भाजपा की हार पर सीएम ने कहा था कि ये चुनाव परिणाम हमारे लिए एक सबक हैं। हम इसकी समीक्षा करेंगे। जो नतीजे आए हैं हम उनका सम्मान करते हैं और विजयी प्रत्याशियों को बधाई देते हैं। उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन को राजनीतिक सौदेबाजी करार देते हुए कहा कि हम इस गठबंधन को नहीं समझ सके हैं। हमें इसके लिए एक रणनीति बनानी होगी। उन्होंने अतिआत्मविश्वास को भी हार का एक कारण बताया।