75वां स्वतंत्रता दिवस: मुख्यमंत्री योगी बोले- अपना कर्तव्य निभाना ही राष्ट्रधर्म है, नए भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना हो रही साकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी अमर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी।
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देश के 75वें स्वाधीनता दिवस पर रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानभवन में आयोजित समारोह में झण्डारोहण किया। सीएम योगी ने इस स्थल से समस्त प्रदेशवासियों को हृदय से बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने सभी अमर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए अपनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश की बाह्य व आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाए रखने व भारत के नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान करने हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले देश के वीर जवानों को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
सीएम योगी ने विधानभवन से प्रदेशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि देश की स्वाधीनता के ‘अमृत’ महोत्सव वर्ष का हम सब को साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश के साथ ही हम प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 'नए भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को साकार होते हुए देख रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश के 09 पुलिस अधिकारी व कर्मियों को 'पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री' प्राप्त करने पर बधाई दी। स्वाधीनता दिवस समारोह पर प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से 04 पुलिस अधिकारी व कर्मी सम्मानित हुए। पुलिस पदक के लिए 73 अधिकारी व कर्मी चयनित हुए हैं। सभी को सीएम योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी।
प्रदेश के शहीद स्मारक स्वाधीनता की कीमत के जीवंत गवाह
उन्होंने कहा कि वर्ष 1916 में लखनऊ में ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर ही रहेंगे' का उद्घोष किया था। यह उद्घोष देश के स्वाधीनता आंदोलन का एक मंत्र बन गया था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानियों ने देश की इस लड़ाई को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उत्तर प्रदेश इस निर्णायक लड़ाई का एक केंद्र बिंदु बना।
पूर्वजों की आहुति को समर्पित चौरी चौरा की एतिहासिक घटना का शताब्दी वर्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वाधीनता के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही यह वर्ष चौरी चौरा की ऐतिहासिक घटना का शताब्दी वर्ष भी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1922 में गोरखपुर के चौरी चौरा के नागरिकों ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई को आगे बढ़ाया था। बलिया ने तो 1942 में ही स्वयं को स्वाधीन घोषित कर दिया था। उन्होंने कहा कि काकोरी की घटना कभी विस्मृत नहीं हो सकती।
इतना ही नहीं लखनऊ से क्रांतिकारियों ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ क्रांति का जो बिगुल बजाया था, उसकी परिणीति 15 अगस्त 1947 के रूप में देखने को मिली। हमारे पूर्वजों ने 75 वर्ष पूर्व 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को साकार करने हेतु अपनी आहुति दी थी। अपने सम्बोधन को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारियों के सपनों को साकार करने हेतु हम सब पूरी ईमानदारी के साथ कार्य कर सकें, इस विश्वास के साथ मैं 'अमृत महोत्सव' वर्ष पर सबका अभिनंदन करते हुए आपको बधाई व शुभकामनाएं देता हूं।
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