सीएम योगी ने कहा: अब यूपी के माध्यमिक विद्यालयों का होगा कायाकल्प, बदल चुकी है बेसिक स्कूलों की सूरत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थान समूहों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा में किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह देश और समाज का भविष्य संवारने का माध्यम है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आज से सात साल पहले स्कूलों की स्थिति ऐसी थी कि बच्चे यहां आने से डरते थे। स्कूलों में पेड़ और झाड़ियां उगी रहती थी। बच्चों के नामांकन में गिरावट थी, आज उन्हीं विद्यालयों का कायाकल्प हुआ है। आज वहां बच्चों की संख्या 60 लाख बढ़ी है। बेसिक शिक्षा में परिवर्तन दिखता है, अब बारी माध्यमिक शिक्षा की है। माध्यमिक विद्यालयों के लिए ऑपरेशन कायाकल्प फेज 2 चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री बेसिक विद्यालय के 1.91 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते मोजे, स्टेशनरी के लिए 2300 करोड़ रुपए डीबीटी करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माध्यमिक में नकल विहीन परीक्षा हुई है। पहले नकल का अड्डा कोई और चलाता था, बदनाम शिक्षक होता था। माध्यमिक के राजकीय व एडेड विद्यालयों की, संस्कृत विद्यालयों की स्थिति कार्ययोजना बनाकर सुधारें। इसके लिए सीएसआर फंड, पूर्व छात्रों, सांसद-विधायक निधि का प्रयोग करें।
इस अवसर पर सीएम ने बेसिक विद्यालयों के कायाकल्प के लिए सीएसआर फंड से 250 करोड़ देने वाली संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह दानदाता पहले भी थे लेकिन पहले कोई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। अब सब जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।
सीएम ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में पहले की अपेक्षा बच्चों की संख्या 1.30 करोड़ से बढ़कर 1.91 करोड़ हो गई है। इस संख्या को बढ़ाने के साथ, बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी महत्वपूर्ण है। शिक्षक ड्राप आउट रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खासकर बच्चियों के लिए, जिनके अभिभावक कक्षा पांच के बाद स्कूल नहीं भेजते। एक बच्चा स्कूल नहीं आता है तो उसके अभिभावक से बात करें, उसके घर जाकर जानकारी ले। इससे शिक्षक के प्रति सकारात्मक भाव पैदा होगा।
शिक्षकों की जिम्मेदारी है, ऑपरेशन कायाकल्प की तरह डीबीटी की सफलता के लिए काम करने की। डीबीटी से जो पैसा भेजा गया, उसका सही प्रयोग हो और बच्चे ड्रेस में ही स्कूल आएं। इसके लिए शिक्षक, अभिभावकों के साथ बैठक करें। सीएम ने कहा कि शिक्षक अपडेट होगा तो पूरी पीढ़ी अपडेट होगी। शिक्षकों को अपडेट करने के लिए समय-समय पर शिक्षण, प्रशिक्षण, रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि मैंने देखा कि शिक्षकों के व्यवहार में थोड़ा रूखापन है। आप खुद देखे की स्कूल में आपका व्यवहार कैसा है। अगर शिक्षक सकारात्मक भाव से बच्चों को आगे बढ़ाएंगे तो इसके काफी बदलाव दिखेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) माध्यमिक शिक्षा गुलाब देवी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा संदीप सिंह, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद आदि उपस्थित थे।
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डीबीटी के माध्यम से जारी की गई राशि की निगरानी करें शिक्षक
सीएम योगी ने कहा कि डीबीटी के माध्यम से जो पैसा यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और स्टेशनरी के लिए भेजा गया है, उसमें हमारे शिक्षकों की भी जिम्मेदारी है कि वो सुनिश्चित करें कि बच्चे नियमित रूप से यूनिफॉर्म में स्कूल आएं। उम्मीद की जाती है कि हर शिक्षक बच्चे के लिए यूनिफॉर्म बनवाने को अभिभावक के साथ बैठक कर चर्चा करेगा, ताकि समयसीमा में बच्चे यूनिफॉर्म, किताबें, जूते-मोजे पा सकें। दो-तीन वर्ष पहले तक यह शिकायत आती थी कि यूनिफॉर्म नहीं मिल पा रहा, बुक्स नहीं मिल पा रही है। आज पैसा अभिभावक के खाते में जा रहा है, जो पारदर्शिता का नमूना है। इसकी मॉनीटरिंग विद्यालय स्तर पर प्रधानाचार्य के माध्यम से, शिक्षकों के माध्यम से होनी चाहिए। अभिभावकों के साथ जब संवाद होगा तो समस्या के समाधान के साथ सही आंकड़े भी हमारे पास आ पाएंगे कि वास्तव में कितने बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं। इसी तरह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि जो बच्चे आधे में स्कूल छोड़ देते हैं इसके लिए अभिभावकों से बातचीत की जाए। ये बच्चे पढ़ लिख जाएंगे तो सकारात्मक योगदान दे पाएंगे।
गरीबी दूर करने में प्रमुख पैरामीटर बनी है शिक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि छह साल में 5.50 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त होकर सक्षम बने हैं। इसमें जो पैरामीटर तय किया है, वह था शिक्षा। हमने शिक्षा के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए हैं। आगे पांच-दस साल में और बेहतर बदलाव दिखेंगे। आकांक्षात्मक जिलों में भी काफी बदलाव देखने को मिला है।
6 वर्ष में की गईं 1.64 लाख शिक्षकों की भर्ती
सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले की स्थिति क्या थी, शिक्षकों की भारी कमी थी। मुझे आश्चर्य होता है कि कुछ लोग इस बात की चर्चा करते हैं कि 5 वर्ष से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। पिछले 6 वर्ष में एक लाख 64 हजार शिक्षकों की भर्ती बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद में हुई है। जो लोग रिटायर हो रहे हैं, जहां अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता होती है, वहां पर निरंतर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी के लिए प्रदेश के अंदर एक शिक्षा आयोग बनाने की प्रक्रिया वर्तमान में प्रचलित है और बहुत जल्द हम इसका गठन करने जा रहे हैं। इसके साथ ही समय समय पर शिक्षकों के रिफ्रेशर कोर्स चलाने चाहिए। शिक्षक यदि अपडेट होगा तो वो पूरी पीढ़ी को अपडेट कर देगा। हमारा प्रयास होना चाहिए कि डायट खाली न हो, योग्य शिक्षक जाएं। उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं दीजिए। शिक्षकों को और पारंगत करने के लिए वहां जो भी गैप है उसे पूरा करना होगा। आज जो किताबें यहां विमोचित हुई हैं, वो हर विद्यालय में उपलब्ध कराई जाएं और शिक्षक भी उसे अवश्य पढ़ें।
डीबीटी प्रक्रिया के शुभारंभ के साथ विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों का भी किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को छात्रवृत्ति एवं दिव्यांग छात्राओं को स्टाइपेंड तथा गंभीर दिव्यांग छात्र-छात्राओं को एस्कार्ट अलाउंस का डीबीटी के माध्यम से अंतरण प्रक्रिया का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर 125 कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज व 20 जिलों के शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में निर्मित अतिरिक्त कक्षा-कक्ष एवं ऑडिटोरियम का लोकार्पण भी किया गया। यही नहीं सीएम ने एमसीईआरटी द्वारा विकसित कलांकुर, कलासृजन-2, इंटर्नशिप मैनुअल एवं संस्कृत भाषा किट के विमोचन के साथ ही 1772 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में "लर्निंग वाय डूइंग कार्यक्रम का भी शुभारंभ और शिक्षक मैनुअल का विमोचन किया। इस दौरान प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए 52, 836 को लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों को आईआईटी गाँधीनगर द्वारा विकसित वंडर बॉक्स के वितरण का भी शुभारंभ किया गया।
शिक्षा में किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थान समूहों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा में किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह देश और समाज का भविष्य संवारने का माध्यम है। उत्तर प्रदेश जैसी युवा आबादी वाले राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में अनंत संभावनाएं हैं। निजी क्षेत्र को इसका लाभ उठाना चाहिए। असेवित जिलों में विश्वविद्यालयों की स्थापना करने वाले संस्थानों को सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी।
मंगलवार को दक्षिण भारत और मध्य भारत के प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलाधिपतिगणों, कुलपति गणों, प्रतिकुलपतिगणों, निदेशकों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों व अन्य प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के आध्यत्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। पुरातन काल से यह प्रदेश, शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। काशी इसका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। काशी, अयोध्या, मथुरा संस्कृति और सभ्यता के प्राचीन नगर रहे हैं। हालांकि बीते दशकों में शिक्षा के प्रति विमुखता का भाव देखा गया किंतु आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश व प्रदेश में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक भाव जागृत हुआ है।
आज प्रदेश में इंफ्रस्ट्रक्चर डेवलपमेंट और इंटर स्टेट कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। 2017 से पूर्व प्रदेश में 12 मेडिकल कॉलेज थे, विगत 06 वर्षों के प्रयास के बाद आज 45 जिलों में सरकारी मेडिकल कालेज संचालित हैं, जबकि 16 निर्माणाधीन हैं और पीपीपी मोड पर 16 और मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो रही है। आज प्रदेश में 22 राज्य व 03 केंद्रीय विश्वविद्यालय संचालित हैं, 03 राज्य विश्वविद्यालय निर्माणाधीन हैं जबकि 36 निजी विश्वविद्यालय, 02 एम्स, 02 आईआईटी व आईआईएम संचालित हैं। 2000 से अधिक पॉलिटेक्निक व वोकेशनल इंस्टिट्यूट भी संचालित हैं, इनकी लंबी श्रृंखला है, जो यहां के शैक्षिक परिदृश्य को मजबूत बनाते है। बावजूद इसके, अभी बहुत से जनपद ऐसे हैं, जहां कोई विश्वविद्यालय क्रियाशील नहीं हैं। स्थानीय युवाओं की आकांक्षा को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहित करते हुए एक नई नीति लागू की, जिसके आशातीत परिणाम मिले हैं। अभी हाल में शाहजहांपुर, बागपत और चित्रकूट जनपद के शिक्षण संस्थानों ने अपनी रुचि दर्शायी है। उतर प्रदेश ने उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों की दिशा में प्रयासरत है। निजी क्षेत्र में अनेक शैक्षिक संस्थानों ने उत्कृष्टता का मानक स्थापित किया है।
उत्तर प्रदेश, इनके अनुभवों का लाभ प्रदेश के युवाओं को दिलाने के लिए तत्पर हैं। निजी क्षेत्र के लिए संभावनाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के लिए यह आश्चर्यजनक हो सकता है लेकिन यह सत्य है कि आज प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 1.91 करोड़ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। आज ही सुबह सभी के बैंक खाते में गणवेश के लिए ₹1200 ट्रांसफर किये हैं। इसी तरह, इस साल 56 लाख बच्चों ने यूपी बोर्ड की परीक्षा दी। विद्यार्थियों के यह आकड़ें कई राज्यों की जनसंख्या से भी अधिक है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसी जिले के स्वास्थ्य केंद्र या शिक्षण संस्थान में जाएं, वहां उत्तर प्रदेश के साथ-साथ नेपाल, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के लोग भी मिलेंगे। यह स्थिति यह बताती है कि निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों के लिए उत्तर प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में कोई विश्वविद्यालय स्थापित नहीं है, वहां अपने विश्वविद्यालय स्थापित करने वाले निवेशकों को राज्य सरकार अपनी नीति के अनुरूप हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगी।