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लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचे उत्तराखंड के सीएम, कहा- हॉस्टल छोड़ने के बाद रो पड़ा था मैं
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के हॉस्टल में जो चार से सात साल रह लेगा वह यहां बिताए दिनों को आजीवन याद रखेगा। जब मैं यहां से निकला और एक दिन होटल में रह रहा था तो रोना आ गया कि मैं हॉस्टल छोड़कर कहां आ गया। मैं यहां आकर भावुक हो गया हूं। यह संस्मरण थे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के। मुख्यमंत्री बनने के बाद वह पहली बार बुधवार को लविवि पहुंचे थे। लविवि एल्युमिनाई फाउंडेशन और लविवि द्वारा मालवीय सभागार में आयोजित समारोह में उनको सम्मानित किया गया।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राजनीति का ककहरा लविवि से ही सीखा है। उन्होंने 1994 में यहां से बीए की पढ़ाई की। इस दौरान वे नरेंद्र देव छात्रावास के कमरा नंबर 119 में रहते थे। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर इकाई के लिए कार्य किया। बुधवार को वह हॉस्टल में बिताए संस्मरणों को सुनाते हुए पुराने दिनों खो गए। बताया कि रात को 11-12 बजे हॉस्टल में आते तो तब 11 से 12 छात्र एक साथ खाना खाते थे। कोई रोटी ले आता था तो दाल कमरे में ही बना लेते थे। बसंती चाची के पकौड़े और चाय के साथ उन्होंने पप्पू ढाबा का भी जिक्र किया, जहां से रोटी और दाल मंगाई जाती थी।
प्रो. निशी अब पहले जैसी नहीं दिखतीं
सीएम पुष्कर सिंह सैनी ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कई ऐसे वाक्य कहे जिसे सुन सभागार में बैठे सभी ठहाके लगाने लगे। वे मंच से सभी पुराने शिक्षकों, छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों, सदस्यों का नाम ले रहे थे। उनके साथ बिताए दिनों को याद कर रहे थे। प्रो. निशी पांडेय का नाम लेकर बोले आप तो बिल्कुल बदल गईं। अब पहले जैसी नहीं दिखतीं। वहीं प्रो. नीरज जैन को याद कर बोले आप तो बिल्कुल नहीं बदले, आज भी शक्ल वैसी ही है। उन्होंने कहा मैं भी नहीं बदला, मेरी भी शक्ल पहले जैसी है। उन्होंने कहा कि सीएम बनने के बाद भी कुछ नहीं बदला, मैं आज भी वैसा ही हूं। उन्होंने कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक के साथ विवि में बिताए दिनों को याद कर कहा कि बहुत तेज तर्रार थे। छात्रसंघ के अध्यक्ष बने और आज कैबिनेट मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि यहां आकर घूमना, खाना, पुराने लोगों से मिलना, नए छात्रों से मिलना बेहद अच्छा लग रहा है।
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भगवान को कुछ और ही मंजूर था
सीएम ने कहा कि 21 वर्ष हो गए लविवि को छोड़े हुए। गत वर्ष भी एल्युमिनाई ने मुझे 27 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन मैं नहीं आ पाया। शायद भगवान यही चाहते थे कि मैं मुख्य सेवक बनने के बाद ही लविवि में दोबारा प्रवेश करूं। जब तक भगवान की इच्छा नहीं होती तब तक पत्ता तक नहीं हिलता।
कोई पद पाने की उम्मीद छोड़ चुके थे सीएम
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सीएम बनने के सफर तक की दिलचस्प कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक बार वह पल आया जब कोई भी पद पाने की उम्मीद छोड़ चुके थे। उन्होंने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब एमएलए बना तो हमारी सरकार भी बनी। उम्मीद थी कि मंत्री परिषद में जगह मिलेगी, लेकिन मेरे जिले से दो एमएलए मंत्री बन गए, तीन बन नहीं सकते थे। तब थोड़ी निराशा हुई और समर्थकों में ज्यादा निराशा थी। कुछ वक्त बाद उम्मीद जगी कि सांसद का टिकट मिलेगा, लेकिन वह भी नहीं मिला। फिर एक बार जोर-शोर से मेरा नाम अध्यक्ष पद के लिए उठा, लेकिन वह भी नहीं मिला। अचानक बदलाव हुआ सीएम बदले और तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया गया। तब जोर-शोर से मेरे डिप्टी सीएम बनने का शोर हुआ, लेकिन उनके सीएम बनने के बाद मंत्री परिषद वही रहा। डिप्टी सीमए तो दूर मंत्री तक नहीं बना। इसके बाद मैंने अपना सामान पैक कर देहरादून छोड़ दिया, अपने क्षेत्र में चला गया। ठाना तो यही था कि 2022 में जब इलेक्शन का परिणाम आएगा तभी वापस आऊंगा, लेकिन फिर सीएम बदलने का समय आया। विधान मंडल की बैठक हुई। मैं बिना किसी उम्मीद के पीछे बैठा था। इस बार कोई शोर नहीं था किसी ने फोन नहीं किया। यहां तक कि बैठक में भी किसी ने कुछ नहीं बताया। अचानक 20 मिनट बाद नरेंद्र सिंह तोमर उठे और बोले पुष्कर सिंह धामी को विधायक दल का नेता चुना जाता है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो काम करता है वो नजर में आता है भले ही देर से ही। उन्होंने युवाओं को भी दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़े की सलाह दी।
सुरक्षा घेरा तोड़ सभी से मिले
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लविवि के मालवीय सभागार में पहुंचने के बाद अपने इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरे को हटा दिया। सभागार में पहुंचते ही उनके साथ सेल्फी लेने और सोशल मीडिया पर लाइव करने की होड़ लग गई। यहां तक कि मंच पर भी काफी पूर्व छात्र व छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी व सदस्य चढ़ गए और सेल्फी लेने लगे। इस दौरान अव्यवस्था भी हुई। लविवि एल्युमिनाई फाउंडेशन और लविवि द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में कुलपति प्रो. आलोक राय ने उनको शॉल व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी उनको सम्मानित किया। इस अवसर पर सीएम ने फूड मैन के नाम से जाने वाले विशाल सिंह और एक कोशिश ऐसी भी की संस्थापिका वर्षा वर्मा को सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया। वीसी ने एल्युमिनाई एसोसिएशन से विवि के संचालन में सहयोग की अपील की। इस अवसर पर एल्युमिनाई फाउंडेशन की अध्यक्ष प्रो. निशी पांडेय, प्रो. राकेश चंद्रा आदि मौजूद रहे।
फिर से उसी कमरे में पहुंचे
सम्मान समारोह के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी एनडी छात्रावास के उसी कमरा नंबर 119 में पहुंचे, जहां वह पढ़ाई के दौरान रहा करते थे। उन्होंने हॉस्टल के कमरों को निहारा और पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि आज भी दीवारें वैसी ही हैं। वे काफी भावुक हो गए। हॉस्टल के छात्रों से मिले। काफी छात्रों के साथ फोटो भी खिंचवाई।
चाय का एक रुपया तक नहीं मारा
इस अवसर पर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि जो एक बार लविवि में आ गया वह यहां बिताए दिनों को कभी नहीं भूल सकता। मैं अध्यापक हो चुका था और पुष्कर सिंह एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते थे। शिक्षकों और साथी गणों से कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की। उस समय छात्र राजनीति चरम पर थी। अक्सर छात्रनेता चाय के पैसे नहीं देते थे, लेकिन इन्होंने चाय का एक रुपया भी नहीं मारा। कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज लोग आपको प्रेरणा स्रोत के रूप में देखते हैं। जब आपके बारे में लोगों को बताया तो इतने कम समय में ही लोगों में इतना उत्साह और जोश भर गया, जिसकी कल्पना नहीं की थी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने भी लविवि में बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि इनके साथ हमने लविवि में संघर्ष किया।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राजनीति का ककहरा लविवि से ही सीखा है। उन्होंने 1994 में यहां से बीए की पढ़ाई की। इस दौरान वे नरेंद्र देव छात्रावास के कमरा नंबर 119 में रहते थे। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर इकाई के लिए कार्य किया। बुधवार को वह हॉस्टल में बिताए संस्मरणों को सुनाते हुए पुराने दिनों खो गए। बताया कि रात को 11-12 बजे हॉस्टल में आते तो तब 11 से 12 छात्र एक साथ खाना खाते थे। कोई रोटी ले आता था तो दाल कमरे में ही बना लेते थे। बसंती चाची के पकौड़े और चाय के साथ उन्होंने पप्पू ढाबा का भी जिक्र किया, जहां से रोटी और दाल मंगाई जाती थी।
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सीएम पुष्कर सिंह सैनी ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कई ऐसे वाक्य कहे जिसे सुन सभागार में बैठे सभी ठहाके लगाने लगे। वे मंच से सभी पुराने शिक्षकों, छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों, सदस्यों का नाम ले रहे थे। उनके साथ बिताए दिनों को याद कर रहे थे। प्रो. निशी पांडेय का नाम लेकर बोले आप तो बिल्कुल बदल गईं। अब पहले जैसी नहीं दिखतीं। वहीं प्रो. नीरज जैन को याद कर बोले आप तो बिल्कुल नहीं बदले, आज भी शक्ल वैसी ही है। उन्होंने कहा मैं भी नहीं बदला, मेरी भी शक्ल पहले जैसी है। उन्होंने कहा कि सीएम बनने के बाद भी कुछ नहीं बदला, मैं आज भी वैसा ही हूं। उन्होंने कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक के साथ विवि में बिताए दिनों को याद कर कहा कि बहुत तेज तर्रार थे। छात्रसंघ के अध्यक्ष बने और आज कैबिनेट मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि यहां आकर घूमना, खाना, पुराने लोगों से मिलना, नए छात्रों से मिलना बेहद अच्छा लग रहा है।
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सीएम ने कहा कि 21 वर्ष हो गए लविवि को छोड़े हुए। गत वर्ष भी एल्युमिनाई ने मुझे 27 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन मैं नहीं आ पाया। शायद भगवान यही चाहते थे कि मैं मुख्य सेवक बनने के बाद ही लविवि में दोबारा प्रवेश करूं। जब तक भगवान की इच्छा नहीं होती तब तक पत्ता तक नहीं हिलता।
कोई पद पाने की उम्मीद छोड़ चुके थे सीएम
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सीएम बनने के सफर तक की दिलचस्प कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक बार वह पल आया जब कोई भी पद पाने की उम्मीद छोड़ चुके थे। उन्होंने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब एमएलए बना तो हमारी सरकार भी बनी। उम्मीद थी कि मंत्री परिषद में जगह मिलेगी, लेकिन मेरे जिले से दो एमएलए मंत्री बन गए, तीन बन नहीं सकते थे। तब थोड़ी निराशा हुई और समर्थकों में ज्यादा निराशा थी। कुछ वक्त बाद उम्मीद जगी कि सांसद का टिकट मिलेगा, लेकिन वह भी नहीं मिला। फिर एक बार जोर-शोर से मेरा नाम अध्यक्ष पद के लिए उठा, लेकिन वह भी नहीं मिला। अचानक बदलाव हुआ सीएम बदले और तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया गया। तब जोर-शोर से मेरे डिप्टी सीएम बनने का शोर हुआ, लेकिन उनके सीएम बनने के बाद मंत्री परिषद वही रहा। डिप्टी सीमए तो दूर मंत्री तक नहीं बना। इसके बाद मैंने अपना सामान पैक कर देहरादून छोड़ दिया, अपने क्षेत्र में चला गया। ठाना तो यही था कि 2022 में जब इलेक्शन का परिणाम आएगा तभी वापस आऊंगा, लेकिन फिर सीएम बदलने का समय आया। विधान मंडल की बैठक हुई। मैं बिना किसी उम्मीद के पीछे बैठा था। इस बार कोई शोर नहीं था किसी ने फोन नहीं किया। यहां तक कि बैठक में भी किसी ने कुछ नहीं बताया। अचानक 20 मिनट बाद नरेंद्र सिंह तोमर उठे और बोले पुष्कर सिंह धामी को विधायक दल का नेता चुना जाता है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो काम करता है वो नजर में आता है भले ही देर से ही। उन्होंने युवाओं को भी दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़े की सलाह दी।
सुरक्षा घेरा तोड़ सभी से मिले
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लविवि के मालवीय सभागार में पहुंचने के बाद अपने इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरे को हटा दिया। सभागार में पहुंचते ही उनके साथ सेल्फी लेने और सोशल मीडिया पर लाइव करने की होड़ लग गई। यहां तक कि मंच पर भी काफी पूर्व छात्र व छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी व सदस्य चढ़ गए और सेल्फी लेने लगे। इस दौरान अव्यवस्था भी हुई। लविवि एल्युमिनाई फाउंडेशन और लविवि द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में कुलपति प्रो. आलोक राय ने उनको शॉल व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी उनको सम्मानित किया। इस अवसर पर सीएम ने फूड मैन के नाम से जाने वाले विशाल सिंह और एक कोशिश ऐसी भी की संस्थापिका वर्षा वर्मा को सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया। वीसी ने एल्युमिनाई एसोसिएशन से विवि के संचालन में सहयोग की अपील की। इस अवसर पर एल्युमिनाई फाउंडेशन की अध्यक्ष प्रो. निशी पांडेय, प्रो. राकेश चंद्रा आदि मौजूद रहे।
फिर से उसी कमरे में पहुंचे
सम्मान समारोह के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी एनडी छात्रावास के उसी कमरा नंबर 119 में पहुंचे, जहां वह पढ़ाई के दौरान रहा करते थे। उन्होंने हॉस्टल के कमरों को निहारा और पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि आज भी दीवारें वैसी ही हैं। वे काफी भावुक हो गए। हॉस्टल के छात्रों से मिले। काफी छात्रों के साथ फोटो भी खिंचवाई।
चाय का एक रुपया तक नहीं मारा
इस अवसर पर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि जो एक बार लविवि में आ गया वह यहां बिताए दिनों को कभी नहीं भूल सकता। मैं अध्यापक हो चुका था और पुष्कर सिंह एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते थे। शिक्षकों और साथी गणों से कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की। उस समय छात्र राजनीति चरम पर थी। अक्सर छात्रनेता चाय के पैसे नहीं देते थे, लेकिन इन्होंने चाय का एक रुपया भी नहीं मारा। कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज लोग आपको प्रेरणा स्रोत के रूप में देखते हैं। जब आपके बारे में लोगों को बताया तो इतने कम समय में ही लोगों में इतना उत्साह और जोश भर गया, जिसकी कल्पना नहीं की थी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने भी लविवि में बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि इनके साथ हमने लविवि में संघर्ष किया।