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खुलम्मखुल्ला घूस मांगने के ऑडियो-वीडियो देखकर भी अफसर मौन, सीएम ने पूछा- क्यों नहीं की कार्रवाई
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 10 Sep 2018 09:19 AM IST
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सीएम आदित्यनाथ योगी
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खुल्लमखुल्ला घूस मांगने और लेने का ऑडियो-वीडियो उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कई विभागों के अफसर ऐसे मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उनके बचाव में खड़े हो गए हैं। ऐसे विभागों के सतही बहानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे अफसरों से जवाब तलब शुरू कर दिया गया है। अफसरों से पूछा जा रहा है कि प्रमाण होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो सकती है? इससे विभागों में बेचैनी बढ़ गई है।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री के एंटी करप्शन पोर्टल पर पिछले करीब छह महीनों में 1200 से अधिक शिकायतें आई हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों ने एक-एक ऑडियो व वीडियो सुनने के बाद बिल्कुल स्पष्ट आवाज व पहचान वाले 137 मामलों को संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए संदर्भित किया। इनमें 126 मामले शासन व 11 प्रकरण छह जिलों के डीएम को भेजे गए। इनमें 73 मामलों में विभागों से रिपोर्ट आई है। बाकी 63 प्रकरण अब भी लंबित हैं।
41 मामलों पर एक महीना बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। बाकी ऑडियो व वीडियो में कार्रवाई के लिए पर्याप्त सुबूत न होने का हवाला देते हुए शिकायतकर्ताओं से और सुबूत उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
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मगर, हैरान करने वाली बात ये है कि कई मामलों में विभागीय अफसरों ने यह रिपोर्ट लगा दी कि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। कर्मी का स्थानांतरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप वापस ले लिए हैं। शिकायतकर्ता ने अब शिकायती संदर्भ में की गई कार्रवाई पर संतुष्टि जताई है। ऐसे सभी मामलों में पूछा जा रहा है कि कार्रवाई क्यों संभव नहीं है?
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सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री के एंटी करप्शन पोर्टल पर पिछले करीब छह महीनों में 1200 से अधिक शिकायतें आई हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों ने एक-एक ऑडियो व वीडियो सुनने के बाद बिल्कुल स्पष्ट आवाज व पहचान वाले 137 मामलों को संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए संदर्भित किया। इनमें 126 मामले शासन व 11 प्रकरण छह जिलों के डीएम को भेजे गए। इनमें 73 मामलों में विभागों से रिपोर्ट आई है। बाकी 63 प्रकरण अब भी लंबित हैं।
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41 मामलों पर एक महीना बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। बाकी ऑडियो व वीडियो में कार्रवाई के लिए पर्याप्त सुबूत न होने का हवाला देते हुए शिकायतकर्ताओं से और सुबूत उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
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मगर, हैरान करने वाली बात ये है कि कई मामलों में विभागीय अफसरों ने यह रिपोर्ट लगा दी कि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। कर्मी का स्थानांतरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप वापस ले लिए हैं। शिकायतकर्ता ने अब शिकायती संदर्भ में की गई कार्रवाई पर संतुष्टि जताई है। ऐसे सभी मामलों में पूछा जा रहा है कि कार्रवाई क्यों संभव नहीं है?
कैसी-कैसी रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर
- एक मामले में रिपोर्ट दी गई कि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद सीएम कार्यालय ने संबंधित विभाग के प्रतिनिधि को बुलाया और ऑडियो सुनाकर बताया कि इसमें स्पष्ट रूप से पैसे मांगे जा रहे हैं। इन बिंदुओं पर ध्यान देकर प्रकरण में कार्रवाई की जानी चाहिए।
- एक विभाग ने आख्या दी कि आरोपी अधिकारी का स्थानांतरण कर दिया गया है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूछा है कि क्या स्थानांतरण दंड की श्रेणी में आता है?
- एक मामले में आख्या दी कि गई शिकायतकर्ता ने बयान दिया है कि गलती से ऑडियो-वीडियो भेज दिया। शिकायत को गलत समझकर खत्म करने पर विचार किया जाए। इस ऑडियो में स्पष्ट रूप से पैसा मांगने का हवाला देते हुए कार्रवाई के लिए कहा गया।
- एक मामले में स्पष्ट रूप से 250 रुपये घूस मांगे जाने के बावजूद रिपोर्ट भेज दी गई कि संबंधित व्यक्ति के कार्य से लोगों ने संतुष्टि जताई है। इस मामले में भ्रष्टाचार के पुष्ट प्रमाण होने की वजह से कार्रवाई को कहा गया है।
- एक ऑडियो-वीडियो में पैसे का लेन-देन होता दिख रहा है, लेकिन विभाग ने शिकायत को निराधार बताते हुए प्रकरण समाप्त करने की संस्तुति कर दी। इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई गई। इस बिंदु पर जांच कराने के निर्देश दिए गए।
- एक अन्य मामले में प्रकरण के न्यायालय में होने का हवाला देकर ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया गया। सीएम कार्यालय ने फैक्ट फाइंडिंग जांच के आदेश दे दिए।
- एक विभाग ने कई मामलों में आख्या दी कि कार्रवाई नहीं की जा सकती। अब विभाग से पूछा जा रहा है कि नियमानुसार कार्रवाई क्यों संभव नहीं है?
- एक विभाग ने आख्या दी कि आरोपी अधिकारी का स्थानांतरण कर दिया गया है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूछा है कि क्या स्थानांतरण दंड की श्रेणी में आता है?
- एक मामले में आख्या दी कि गई शिकायतकर्ता ने बयान दिया है कि गलती से ऑडियो-वीडियो भेज दिया। शिकायत को गलत समझकर खत्म करने पर विचार किया जाए। इस ऑडियो में स्पष्ट रूप से पैसा मांगने का हवाला देते हुए कार्रवाई के लिए कहा गया।
- एक मामले में स्पष्ट रूप से 250 रुपये घूस मांगे जाने के बावजूद रिपोर्ट भेज दी गई कि संबंधित व्यक्ति के कार्य से लोगों ने संतुष्टि जताई है। इस मामले में भ्रष्टाचार के पुष्ट प्रमाण होने की वजह से कार्रवाई को कहा गया है।
- एक ऑडियो-वीडियो में पैसे का लेन-देन होता दिख रहा है, लेकिन विभाग ने शिकायत को निराधार बताते हुए प्रकरण समाप्त करने की संस्तुति कर दी। इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई गई। इस बिंदु पर जांच कराने के निर्देश दिए गए।
- एक अन्य मामले में प्रकरण के न्यायालय में होने का हवाला देकर ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया गया। सीएम कार्यालय ने फैक्ट फाइंडिंग जांच के आदेश दे दिए।
- एक विभाग ने कई मामलों में आख्या दी कि कार्रवाई नहीं की जा सकती। अब विभाग से पूछा जा रहा है कि नियमानुसार कार्रवाई क्यों संभव नहीं है?
कार्रवाई भी हुई
- खाद्य एवं रसद विभाग ने एक मामले में शिकायत सही पाते हुए 2000 रुपये की प्रतिभूति राशि जब्त की। दो मामलों में आरोपी को निलंबित कर कार्रवाई की जा रही है। एक कोटेदार का लाइसेंस निलंबित किया गया। कई मामलों में आरोप पत्र दिए जा चुके हैं। कई में विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
- राजस्व विभाग ने दो मामलों में आरोप के दायरे में आए कर्मियों को निलंबित किया।
- खादी ग्रामोद्योग विभाग ने दो मामलों में आरोपियों को स्थानांतरित कर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की।
- आवास विकास प्राधिकरण से जुड़े तीन मामलों में जिलाधिकारी सहारनपुर और एक में जिलाधिकारी गाजियाबाद से जांच कराकर रिपोर्ट देने का आदेश हुआ।
सरकार के एक साल पूरे होने पर दी थी पोर्टल की सौगात
मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर लोगों को एंटी करप्शन पोर्टल की सौगात दी थी। लोग इस पोर्टल पर घूस मांगने या लेने-देने के ऑडियो-वीडियो अपलोड कर सकते हैं। शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता रखी जाती है और शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से देखी जाती हैं। जनता ने इस हथियार का पूरी सजगता से उपयोग किया है।
- राजस्व विभाग ने दो मामलों में आरोप के दायरे में आए कर्मियों को निलंबित किया।
- खादी ग्रामोद्योग विभाग ने दो मामलों में आरोपियों को स्थानांतरित कर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की।
- आवास विकास प्राधिकरण से जुड़े तीन मामलों में जिलाधिकारी सहारनपुर और एक में जिलाधिकारी गाजियाबाद से जांच कराकर रिपोर्ट देने का आदेश हुआ।
सरकार के एक साल पूरे होने पर दी थी पोर्टल की सौगात
मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर लोगों को एंटी करप्शन पोर्टल की सौगात दी थी। लोग इस पोर्टल पर घूस मांगने या लेने-देने के ऑडियो-वीडियो अपलोड कर सकते हैं। शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता रखी जाती है और शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से देखी जाती हैं। जनता ने इस हथियार का पूरी सजगता से उपयोग किया है।
लंबित मामलों में एक सप्ताह में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल ने विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को इस संबंध में एक पत्र लिखा है। उन्होंने एक महीने से अधिक बीतने के बावजूद कार्रवाई न किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने सभी लंबित मामलों में एक सप्ताह में कार्रवाई सुनिश्चित कर उसका ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।