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अपराध की सजा : 36.68 लाख की हेराफेरी में लिपिक पर 1.41 करोड़ का जुर्माना, डिमोशन भी किया

Tue, 19 Apr 2022 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा नरेश शर्मा , लखनऊ
नरेश शर्मा , लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 19 Apr 2022 06:20 AM IST
सार

अमीनाबाद में 14 साल पहले 42 बिजली बिलों से रकम गबन का प्रकरण। राजभवन का लिपिक पदावनत, उपखंड से खंडीय कार्यालय में संबद्ध। ग्रेच्युटी व पीएफ से 45 लाख और 96 लाख रुपये वेतन से चुकाने होंगे।

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clerk fined 1.41 crore for misappropriation of 36.68 lakh, also demotion
UPPCL - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

यूपी पावर कार्पोरेशन ने 14 साल पहले अमीनाबाद में 42 बिजली बिलों में 36.68 लाख की हेराफेरी में राजभवन डिवीजन के लिपिक (कार्यालय सहायक तृतीय) मनीष कुमार गुप्ता को बर्खास्त तो नहीं किया, पर उस पर 1.41 करोड़ का तगड़ा जुर्माना लगाया है। उसकी ग्रेच्युटी, पीएफ से 36.68 लाख रुपये की ब्याज सहित रिकवरी का आदेश दिया गया है। यह रकम 45 लाख रुपये से अधिक होगी। वहीं, मनीष को दंड के 96 लाख रुपये वेतन से चुकाने होंगे। 

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प्रबंधन ने उसे लिपिक के मूल पद के न्यूनतम वेतन पर पदावनत किया है। इस संबंध में आठ अप्रैल को आदेश जारी हुए हैं। इसी घपले में 10 दिसंबर 21 को लेखाकार राजीव श्रीवास्तव भी दंडित हो चुके हैं। इनसे 33 लाख की रिकवरी, 50 लाख रुपये वेतन से वसूलने का आदेश हो चुका है। इस तरह तीन अन्य डिवीजन में भी बिलो से करोड़ों रुपये के गबन में 10-12 अभियंता-लिपिक फंसे हैं। 
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नए नजर में मामला
रेजीडेंसी डिवीजन में मार्च 2008 से जुलाई 2009 के बीच 2223 बिजली बिल संशोधित किए गए। स्पेशल ऑडिट के दौरान 42 बिलों के दस्तावेज जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराए गए। इनके दस्तावेज गायब कर दिए गए। वहीं, पांच बिलों से 62 हजार रुपये की रकम को पहले कम किया और फिर जोड़ा गया। 22 बिलों से 36.68 लाख रुपये कम किए गए।
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एक लाख कम हुआ वेतन
मनीष वर्तमान में 1.28 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन पा रहा था। दोषी पाए जाने पर उसका वेतन 27,200 रुपये कर दिया गया, जिस पर नियुक्ति होती है। इसके साथ ही उसकी राजभवन खंड के कैंट उपखंड लिपिक की कुसी भी चली गई। उसे खंडीय कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है। खुद को एक यूनियन का जिलाध्यक्ष बताने वाले मनीष कुमार गुप्ता ने यूपी पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष को पत्र देकर समिति पर उसे फंसाने का आरोप लगाया है। कहा कि जांच अधिकारी ने जो दस्तावेज मांगे थे, सब मुहैया कराए, फिर भी कार्रवाई की गई। 


यूपी पावर कॉर्पोरेशन ने स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट पर जांच समिति से कार्रवाई कराई है। इसमें लिपिक के दोषी पाए जाने पर कॉर्पोरेशन से वृहद स्तर का दंड देने का प्रावधान किया था। इसी आधार पर तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने लिपिक को दंड दिया है। 
- प्रदीप कक्कड़, निदेशक (कार्मिक) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ

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