'आरटीआई के डर से अफसर नहीं कर रहे सही टिप्पणी'
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नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) जावेद उस्मानी ने कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू करने की वजह समाज को फायदा पहुंचाना था। ब्यूरोक्रेसी की हर सूचना को छिपाने की आदत के खिलाफ सर्चलाइट का काम आरटीआई ने किया।
हालांकि, सरकारी पत्रावली में अधिकारियों की टिप्पणी को आरटीआई के दायरे में लाना बहस का मुद़्दा बना हुआ है। अधिकारी भी अब आरटीआई के डर से पत्रावलियों पर सही टिप्पणी की जगह सुरक्षित टिप्पणी करने लगे हैं। विभागों की वेबसाइट पर भी सूचनाएं नहीं होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।
उस्मानी राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर रविवार को यूपी जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) की ओर से उद्यान भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून में आ रही कठिनाइयों को दूर करना होगा। इसके लिए विदेशों में उपयोग हो रहे बेहतर तरीकों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, कार्यभार संभालने के बाद आरटीआई के तहत सभी को आसानी से सूचनाएं मुहैया कराना मेरी प्राथमिकता होगी। सीआईसी ने पत्रकारों से कहा कि वे भी सूत्रों के बजाय आरटीआई के तहत सूचना लें। यह ज्यादा विश्वसनीय होगी।
निष्पक्ष पत्रकार खुद का शुरू करें अखबार
सूचना आयुक्त स्वदेश कुमार, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के पूर्व अध्यक्ष और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य प्रज्ञानंद चौधरी, उपजा के प्रदेश अध्यक्ष रतन दीक्षित, लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने भी विचार रखे।
विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि प्रेस काउंसिल को मीडिया काउंसिल बना देना चाहिए। इससे न्यूज चैनल भी इसके दायरे में आ जाएंगे। उन्होंने अपील की कि निष्पक्ष पत्रकारों को मिलकर एक अखबार निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता को पत्रकार गंभीरता से लें।
यह समाज के लिए उनका बड़ा योगदान होगा। उन्होंने पत्रकारों को अलग से पेंशन जैसी मदद मिलने की जरूरत भी बताई।