कानून व्यवस्था की समीक्षा: सीएम की अफसरों को दो टूक, अपराध रोके वरना कार्रवाई को रहे तैयार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों से दो टूक कहा है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करें वरना खुद पर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। बुधवार को लोकभवन में कानून-व्यवस्था और विकास योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अवैध शराब कांड पर बाराबंकी के एसपी, टप्पल कांड पर अलीगढ़ के एसएसपी और वारदातों पर अंकुश न लगा पाने के कारण शामली के एसपी को खरी-खरी सुनाई।
मुख्यमंत्री बुधवार को लखनऊ के लोकभवन में जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों व पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक कर रहे थे।
वहीं केंद्र व राज्य सरकार की विकास योजनाओं को ढंग से लागू करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए। चेतावनी भी दी कि परिणाम अपेक्षित न मिलने पर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री ने पहली बार प्रदेश भर के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों की एक साथ बैठक की।
मुख्यमंत्री ने अफसरों को हिदायत दी कि थानेदार हों या तहसीलदार या एसडीएम अपने-अपने तैनाती स्थल पर ही रात्रि विश्राम करें और जनता से संवाद स्थापित करें, नहीं तोे हटने के लिए लिखकर दे दें।
मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ की घटना पर नाराजगी जताई और अफसरों से अपराध न रुक पाने का कारण पूछा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वायड को और प्रभावी बनाया जाए। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारियों को सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। योगी ने कहा कि योजनाओं का लाभ समाज के सबसे गरीब लोगों को मिले। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। अगर किसी कारण उसे योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो उसे इलाज के लिए दो हजार रुपये व मृत्यु पर उसके परिवार को पांच हजार रुपये पंचायत निधि से दिए जाएं।
उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वह हर रोज निरीक्षण करने के लिए विद्यालयों, अस्पतालों व अलग-अलग ब्लॉक में जाएं और लोगों की शिकायतें सुनें। कहा कि पुलिसकर्मी छोटे दिखने वाले अपराधों के प्रति भी संवेदनशील होकर काम करें। इस मौके पर उन्होंने लोकसभा चुनाव शांतिपूर्वक कराने के लिए अफसरों को बधाई दी। उन्होंने बंगाल का उदाहरण देकर कहा कि वहां चुनाव में काफी हिंसा हुई लेकिन यूपी में ऐसा कोई वाक्या नजर नहीं आया।
इसे लेकर मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने आदेश भी जारी किया था जिमसें कहा गया था कि, लोकभवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में किसी का भी मोबाइल फोन लाना प्रतिबंधित है। यह पत्र उप मुख्यमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार के सभी राज्यमंत्रियों व राज्यमंत्रियों के निजी सचिवों को दिया गया था।
इस आदेश का असर तब दिखा जब बुधवार को कानून व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में अफसरों के फोन बाहर रखवा लिए गए। उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए मोबाइल जमा करने पर टोकन दिया गया, जिसे वापस करने पर मोबाइल दिया गया।
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