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केजीएमयू के शिक्षक को चार्जशीट, न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 12 Jan 2018 02:26 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में फंसे केजीएमयू के फार्माकोलॉजी के शिक्षक को चार्जशीट देने का फैसला किया गया है। शिक्षक ने न्यूज चैनल के छिपे कैमरे के सामने केजीएमयू में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इस मामले में बृहस्पतिवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में उनके खिलाफ बनी अनुशासनात्मक समिति को शिक्षक को चार्जशीट देने का अनुमोदन किया गया।
इसके अलावा नर्सिंग संकाय को पीजीआई के बराबर वेतन देने का मामला शासन को भेजने के फैसले समेत कई अन्य फैसले कार्यपरिषद ने लिए। केजीएमयू प्रशासन ने बृहस्पतिवार को कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई थी। इसका कारण 2016 और जनवरी 2017 में हुई सलेक्शन कमेटी के बाद बुलाई गई कार्य परिषद की बैठक का समय अधिक हो जाना था।
नियमत: कार्य परिषद की बैठक तीन माह में एक बार होनी चाहिए यदि इससे अधिक समय हो जाए तो इसमें कुलाधिपति की अनुमति लेनी होती है। केजीएमयू प्रशासन ने चार माह पर कार्य परिषद की बैठक बुलाई थी। इसी कारण कार्य परिषद की बैठक में हुए सभी फैसले कुलाधिपति की अनुमति के लिए भेजे गए थे।
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वहां भी देर से अनुमति मिलने के कारण दोबारा कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलानी पड़ी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सात असिस्टेंट प्रोफ ेसर की नियुक्ति व पांच की प्रोन्नति का अनुमोदन किया गया। इसमें प्लास्टिक सर्जरी, जनरल सर्जरी, मेडिसिन विभाग में सात असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति करने के अलावा निश्चेतना विभाग, फिजियोलॉजी विभाग, प्लास्टिक सर्जरी विभाग में पांच प्रोन्नति को भी दोबारा अनुमोदित किया गया। यूरोलॉजी विभाग के डॉ. राहुल जनक सिन्हा की पदोन्नति मामले में उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश के मामले में कार्यपरिषद ने विधिक राय लेने की सलाह दी।
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इसके अलावा नर्सिंग संकाय को पीजीआई के बराबर वेतन देने का मामला शासन को भेजने के फैसले समेत कई अन्य फैसले कार्यपरिषद ने लिए। केजीएमयू प्रशासन ने बृहस्पतिवार को कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई थी। इसका कारण 2016 और जनवरी 2017 में हुई सलेक्शन कमेटी के बाद बुलाई गई कार्य परिषद की बैठक का समय अधिक हो जाना था।
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नियमत: कार्य परिषद की बैठक तीन माह में एक बार होनी चाहिए यदि इससे अधिक समय हो जाए तो इसमें कुलाधिपति की अनुमति लेनी होती है। केजीएमयू प्रशासन ने चार माह पर कार्य परिषद की बैठक बुलाई थी। इसी कारण कार्य परिषद की बैठक में हुए सभी फैसले कुलाधिपति की अनुमति के लिए भेजे गए थे।
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वहां भी देर से अनुमति मिलने के कारण दोबारा कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलानी पड़ी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सात असिस्टेंट प्रोफ ेसर की नियुक्ति व पांच की प्रोन्नति का अनुमोदन किया गया। इसमें प्लास्टिक सर्जरी, जनरल सर्जरी, मेडिसिन विभाग में सात असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति करने के अलावा निश्चेतना विभाग, फिजियोलॉजी विभाग, प्लास्टिक सर्जरी विभाग में पांच प्रोन्नति को भी दोबारा अनुमोदित किया गया। यूरोलॉजी विभाग के डॉ. राहुल जनक सिन्हा की पदोन्नति मामले में उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश के मामले में कार्यपरिषद ने विधिक राय लेने की सलाह दी।