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Lucknow News: ऐसे तो मिल चुकी ट्रेनों को आउटर पर रोकने से मुक्ति
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उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल का मामला
चारबाग फोरलेन आउटर, सिग्नलिंग का काम ठप
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। ट्रेनों को आउटर पर न रुकना पड़े, इसके लिए दिलकुशा व आलनमगर आउटर को फोरलेन बनाया जा रहा था। लेकिन यह काम ठप सा पड़ गया है। इससे ट्रेनों को आउटर पर रोकने के संकट से फिलहाल मुक्ति मिलते नजर नहीं आ रही है।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के चारबाग स्टेशन पर प्रतिदिन 250 से अधिक ट्रेनों की आवाजाही होती है। इससे सवा लाख से ज्यादा पैसेंजर सफर करते हैं। ट्रेनों का ट्रैफिक अधिक होने के चलते दिलकुशा व आलमनगर आउटर पर इन्हें रोकना पड़ता है। इससे यात्रियों को बेवजह दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। औसतन आधे से एक घंटे ट्रेन रुकने से यात्री परेशान होते हैं। यात्रियों की दिक्कतों को दूर करने के लिए रेलवे प्रशासन ने फोरलेन आउटर की योजना बनाई। चारबाग से दिलकुशा के लिए फोरलेन आउटर पर काम भी शुरू किया गया, लेकिन जिस गति से काम किया गया, वह ठप पड़ गई है। इससे यह काम दिसंबर तक भी पूरा होते नजर नहीं आ रहा है। दिलकुशा तक फोरलेन होने के बाद आलमनगर आउटर पर रुकने वाली ट्रेनों की समस्याओं को दूर किया जाना है।
40 साल पुरानी सिग्नलिंग व्यवस्था भी नहीं सुधरी
चारबाग स्टेशन पर सिग्नलिंग को अपग्रेड करने के लिए रूट रिले इंटरलॉकिंग आरआरआई का कार्य शुरू करवाया गया। यह करीब 40 साल बाद किया जा रहा था। जिसके तहत 250 किमी लंबे पुराने तारों को बदला जाना था। रेलवे प्रशासन ने आरआरआई बिल्डिंग बनवाई, लेकिन आगे के कार्य सुस्त हो गए हैं, जिससे सिग्नलिंग व्यवस्था भी अपग्रेड नहीं हो पाई।
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आधिकारिक वर्जन
चारबाग स्टेशन के अपग्रेडेशन का कार्य पूरे जोर से चल रहा है। फोरलेन आउटर व रूट रिले इंटरलॉकिंग के कार्य को भी गति दी जाएगी, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
-सुनील कुमार वर्मा, डीआरएम, उत्तर रेलवे
चारबाग फोरलेन आउटर, सिग्नलिंग का काम ठप
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। ट्रेनों को आउटर पर न रुकना पड़े, इसके लिए दिलकुशा व आलनमगर आउटर को फोरलेन बनाया जा रहा था। लेकिन यह काम ठप सा पड़ गया है। इससे ट्रेनों को आउटर पर रोकने के संकट से फिलहाल मुक्ति मिलते नजर नहीं आ रही है।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के चारबाग स्टेशन पर प्रतिदिन 250 से अधिक ट्रेनों की आवाजाही होती है। इससे सवा लाख से ज्यादा पैसेंजर सफर करते हैं। ट्रेनों का ट्रैफिक अधिक होने के चलते दिलकुशा व आलमनगर आउटर पर इन्हें रोकना पड़ता है। इससे यात्रियों को बेवजह दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। औसतन आधे से एक घंटे ट्रेन रुकने से यात्री परेशान होते हैं। यात्रियों की दिक्कतों को दूर करने के लिए रेलवे प्रशासन ने फोरलेन आउटर की योजना बनाई। चारबाग से दिलकुशा के लिए फोरलेन आउटर पर काम भी शुरू किया गया, लेकिन जिस गति से काम किया गया, वह ठप पड़ गई है। इससे यह काम दिसंबर तक भी पूरा होते नजर नहीं आ रहा है। दिलकुशा तक फोरलेन होने के बाद आलमनगर आउटर पर रुकने वाली ट्रेनों की समस्याओं को दूर किया जाना है।
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40 साल पुरानी सिग्नलिंग व्यवस्था भी नहीं सुधरी
चारबाग स्टेशन पर सिग्नलिंग को अपग्रेड करने के लिए रूट रिले इंटरलॉकिंग आरआरआई का कार्य शुरू करवाया गया। यह करीब 40 साल बाद किया जा रहा था। जिसके तहत 250 किमी लंबे पुराने तारों को बदला जाना था। रेलवे प्रशासन ने आरआरआई बिल्डिंग बनवाई, लेकिन आगे के कार्य सुस्त हो गए हैं, जिससे सिग्नलिंग व्यवस्था भी अपग्रेड नहीं हो पाई।
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चारबाग स्टेशन के अपग्रेडेशन का कार्य पूरे जोर से चल रहा है। फोरलेन आउटर व रूट रिले इंटरलॉकिंग के कार्य को भी गति दी जाएगी, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
-सुनील कुमार वर्मा, डीआरएम, उत्तर रेलवे