दो साल मोदी सरकार: यूपी में नहीं बही बदलाव की बयार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर एक गीत तैयार किया गया है, ‘मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है।’ पर, उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां बदलाव का एहसास कराने के लिए मोदी सरकार के कई काम अभी आगे बढ़ने के इंतजार में ही हैं।
कुछ काम जरूर आगे बढ़े हैं। प्रधानमंत्री जन-धन योजना, फसल बीमा योजना, बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी कई योजनाएं शुरू हुई हैं। गरीब घरों की महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस मुहैया कराने वाली उज्ज्वला योजना भी जमीन पर उतरी है।
लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने के काम पर मुहर लगी है। कुछ सड़कों पर भी काम शुरू हुआ है, लेकिन जनता को सीधे प्रभावित करने वाले कई वादों का कसौटी पर खरा उतरना अभी बाकी है।
महंगाई से निजात, गंगा की सफाई, गांवों को आदर्श बनाने, बेरोजगारों को रोजगार, किसानों को सुविधाएं देने के मुद्दे पर तमाम सवाल भाजपा व केंद्र सरकार के सामने खड़े हैं, जो सूबे के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को भी शायद इस बात का एहसास है। वे जानते हैं कि उनकी सरकार की तीसरी वर्षगांठ से पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव हो चुका होगा।
जनता के सामने तस्वीर न साफ की गई, जमीन पर काम न दिखे, तो विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
...तो इसीलिए इस बार सहारनपुर
यही वजह है कि उन्होंने अपने सरकार का एक साल पूरा होने पर रिपोर्ट कार्ड रखने के लिए जहां मथुरा को चुना था, वहीं इस बार सहारनपुर को चुना है ताकि यूपी के लोगों को बताया जा सके कि केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को भूली नहीं है। सांसदों को भी सरकार की उपलब्धियां बताने के काम पर लगाया है।
राज्यों का असहयोग बना बाधा
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का तर्क है कि केंद्र सरकार के कई काम जमीन पर न उतर सके, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार का असहयोगात्मक रवैया भी जिम्मेदार है।
उदाहरण के लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश के 13 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सूची में रखा लेकिन सही तरीके से डीपीआर नहीं भेजी गई। किसानों को राहत के मामले में भी समय से रिपोर्ट नहीं भेजी गई।
केंद्र सरकार ने अराजपत्रित पदों के लिए साक्षात्कार की व्यवस्था खत्म कर दी, लेकिन प्रदेश ने उसे अभी तक लागू नहीं किया। बावजूद इसके कई काम ऐसे हैं जिनमें केंद्र की राह में प्रदेश सरकार कहीं बाधा नहीं थी, लेकिन वे काम भी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे।
ये काम सिर्फ जुबान पर: परवान नहीं चढ़ पाई नमामि गंगे
लोकसभा चुनाव के पहले से भाजपा ने गंगा की सफाई को प्रमुख मुद्दा बनाया था। मोदी कहते थे कि जब साबरमती स्वच्छ हो सकती है तो गंगा क्यों नहीं? सरकार बनने पर उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय का पुनर्गठन किया। गंगा की सफाई के लिए 20,000 करोड़ रुपये की घोषणा भी हुई।
मंत्रालय भी उमा भारती को सौंपा गया जो काफी पहले से गंगा की सफाई के लिए मुहिम चलाती रही हैं। मोदी ने कहा था कि सरकार में इच्छाशक्ति हो तो गंगा एक साल में साफ हो जाएगी, लेकिन सरकार बनने के दो साल बाद भी गंगा की सफाई का काम जमीन पर नहीं दिख रहा है।
हाल ये हैं कि नमामि गंगे के लिए कंसल्टेंट नियुक्त की गई जापान की एनजेएस कंपनी ने अपना काम समेटने की तैयारी शुरू कर दी है। उसका कहना है कि दो साल में उसके सुझाव पर कोई अमल ही नहीं हुआ।
कानपुर के कारखाने चालू हुए न गोरखपुर की खाद फैक्ट्री
मोदी ने यूपी में लोकसभा चुनाव का अभियान कानपुर से शुरू किया था। कानपुर में उन्होंने एलान किया था कि भाजपा सरकार बनी तो कानपुर का गौरव लौटाया जाएगा। बंद कारखानों को फिर शुरू कराने की योजना पर काम होगा, जिससे लोगों को रोजगार मिले और कानपुर का नाम भी आगे बढ़े।
इसी तरह मोदी ने गोरखपुर की रैली में वहां चांद छाप यूरिया बनाने वाले कारखाने को चालू कराने की घोषणा की थी। कहा था कि उनकी सरकार बनी तो गोरखपुर व देवरिया को ‘चीनी का कटोरा’ का रुतबा दिलाया जाएगा।
देवरिया, बैतालपुर, भटनी, रामकोला, छिकौली सहित सभी चीनी मिलों को ठीक तरह से चलवाने की व्यवस्था की जाएगी, पर इसके लिए सरकार के प्रयास भी अभी तक नहीं दिखे हैं।
किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने पर भी काम नहीं
चुनाव अभियान के दौरान मोदी ने घोषणा की थी कि वे किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उनकी लागत मूल्य में 50 प्रतिशत जोड़कर कीमत तय करेंगे।
अनाज खरीद की व्यवस्था को दुरुस्त करेंगे, पर यह काम भी जमीन पर नहीं उतरा है। यूपी में गेहूं का उत्पादन देश में सबसे ज्यादा 300 लाख टन हुआ है, पर खरीद का लक्ष्य सिर्फ 45 लाख टन ही रखा गया है। केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
केंद्र सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य भी 1525 रुपये प्रति क्विंटल ही घोषित किया है। गन्ना किसानों को दुर्दशा से उबारने की दिशा में भी कुछ काम नहीं हुआ। पिछले वर्ष तो यूपी सरकार ने गन्ना मूल्य में प्रति क्ंिवटल 10 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की भी थी, लेकिन इस वर्ष तो एक पैसा भी नहीं बढ़ाया गया।
सांसद आदर्श ग्राम योजना में भाजपाइयों की ही दिलचस्पी नहीं
मोदी ने सभी सांसदों से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक ग्राम पंचायत को गोद लेकर उसका समग्र विकास कराने का काम सौंपा है। प्रदेश से 80 सांसदों में 73 भाजपा के हैं।
लोगों को लग रहा होगा कि कम से कम 73 सांसद तो इस वर्ष भी सूबे के 73 गांवों का विकास कराने के लिए गोद ले चुके होंगे, पर ऐसा नहीं हुआ है। 15 मई तक भाजपा के 73 में सिर्फ 14 सांसदों ने ही गांव गोद लिए थे। मतलब 59 सांसदों ने गांवों को गोद लेने में दिलचस्पी नहीं ली है।
बेरोजगारों को रोजगार का इंतजार
नरेंद्र मोदी ने यूपी की चुनावी रैलियों में कहा था कि हर साल वे देश के कम से कम दो करोड़ बेरोजगार युवकों को रोजगार मुहैया कराएंगे। यह वादा भी जमीन पर उतरने का इंतजार ही कर रहा है। मुद्रा बैंक योजना आई भी तो सिर्फ उनके लिए जो पहले से थोड़ा-बहुत काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार अभी यह नहीं साफ कर पाई है कि इसके लिए उसने कोई रोडमैप भी बनाया है या नहीं।
जीएसटी भी नहीं बन पाई हकीकत
मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) का सरलीकरण करके लागू करने का वादा किया था, लेकिन यह वादा भी हकीकत में नहीं बदल पाया है।
उल्टे व्यापारियों की तरफ से केंद्र के नए जीएसटी विधेयक का विरोध शुरू हो गया है। उनकी आपत्ति है कि विधेयक का सरलीकरण करने के बजाय उसे और जटिल बना दिया गया है।
महंगाई पर मौन
लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर महंगाई पर केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार को घेरा था। कहा था कि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं भी अगर लोगों को आसमान छूते दामों पर मिल रही हैं तो केंद्र सरकार सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि यह राज्य का मामला है। हालांकि केंद्र में मोदी की सरकार आने के दो साल बाद भी महंगाई पर रोक नहीं लग पाई है। दाल व सब्जियों के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं।
ये काम जमीन पर उतरे: लखनऊ बनेगा स्मार्ट सिटी
शहरों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के वादे के मद्देनजर देर से ही सही, लखनऊ को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल कर लिया गया है। इससे लोग उम्मीद कर सकते हैं कि देर-सवेर उत्तर प्रदेश के बाकी शहरों की तरक्की को भी पंख लगेंगे और उन्हें न तो भीड़ में धक्के खाने होंगे और न सफाई के लिए नगर निगम में बार-बार गुहार लगानी पड़ेगी। यही नहीं, लखनऊ की पारंपरिक धरोहरों को भी नए सिरे से सजाया व संजोया जाएगा।
किसानों को राहत का बदला फॉर्मूला
दैवी आपदा व सूखा में किसानों की राहत का फॉर्मूला बदलकर केंद्र सरकार ने किसानों को काफी राहत पहुंचाई है। पहले 50 प्रतिशत नुकसान होने पर ही किसानों को राहत मिलती थी।
मोदी सरकार ने इसे संशोधित कर 33 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही केंद्र से मिलने वाली राहत भी दोगुनी कर दी है। पहले इस तरह के मामलों में किसानों को प्रति हेक्टेयर 9000 रुपये राहत मिलती थी, जो अब 18000 रुपये कर दी गई है।
लोकसभा चुनाव में बनाया मुद्दा, अब बन रही हैं सड़कें
लोकसभा चुनाव से पहले मोदी जब बहराइच में रैली करने आए थे तो उन्होंने बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर सहित इस पूरे क्षेत्र में सड़कों की स्थिति को मुद्दा बनाया था। कहा था कि सड़कों पर गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क है।
अब बाराबंकी-बहराइच, गोरखपुर-बहराइच, फैजाबाद-रायबरेली मार्ग के चौड़ीकरण सहित प्रदेश में कई सड़कों को बनाने का काम शुरू हो गया है। मेरठ से दिल्ली एक्सप्रेस वे और देवरिया से बिहार बॉर्डर तक सड़क निर्माण की घोषणा की गई है।
गरीब महिलाओं के फेफड़ों में नहीं भरेगा धुआं
चुनाव प्रचार के दौरान मोदी कहा करते थे कि गरीब घरों की करोड़ों महिलाओं के फेफड़े इसलिए खराब हो जाते हैं क्योंकि चूल्हे का धुआं उनके फेफड़ों में भर जाता है। इस सिलसिले में मोदी ने उज्ज्वला योजना शुरू करते हुए गरीब परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने की योजना शुरू की है।
रेल सुविधाओं का विस्तार, यहां हुआ ये बदलाव
चुनाव के दौरान मोदी ने बहराइच में गोंडा व बलरामपुर की उपेक्षा का सवाल उठाया था। कहा था कि बौद्धों की आस्था से जुड़े श्रावस्ती को रेल सुविधा तक नहीं मिली है। इससे दुनिया भर से श्रावस्ती आने वाले बौद्ध धर्मावलंबियों को काफी दिक्कत होती है।
केंद्र सरकार ने श्रावस्ती को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए 1600 करोड़ रुपये की घोषणा की है। बढ़नी-काठमांडू रेलमार्ग के सर्वेक्षण की घोषणा भी की गई है।
गोंडा से मैलानी छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित करने का फैसला भी किया गया है। गोंडा से दिल्ली जाने वाली ट्रेन को बलरामपुर से ग्वालियर तक बढ़ाया गया। गोरखपुर से वाया बलरामपुर-दिल्ली गाड़ी भी 30 मई को शुरू होने वाली है।
गोरखपुर को एम्स
चुनाव के दौरान मोदी ने पूर्वांचल में इंसेफलाइटिस व अन्य बीमारियों से होने वाली मौतों का जिक्र करते हुए चिकित्सा सुविधाओं का मुद्दा उठाया था। मोदी सरकार ने गोरखपुर में एम्स की घोषणा करके इस वादा को पूरा करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिया है। जमीन भी चिह्नित कर ली गई है।