आउटसोर्सिंग से सरकारी नौकरियों में भर्ती व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव, ये है तैयारी
प्रदेश में युवाओं के शोषण और सरकार की फजीहत का सबब बनी आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है। सरकार ड्राफ्ट पर कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से सुझाव ले रही है। इस पर जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी लेने की योजना है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी विभागों में नियुक्तियां आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए की जा रही हैं। इन एजेंसियों की न तो कोई स्पष्ट भर्ती प्रक्रिया है और न ही चयनित कर्मियों के मानदेय भुगतान की कोई पुख्ता व्यवस्था। निश्चित समय के लिए की जाने वाली इन भर्तियों में नवीनीकरण के नाम पर अलग खेल चलता है।
नतीजा ये होता है कि सरकारी खजाने से सेवा प्रदाता एजेंसियों से होने वाली इन भर्तियों में आम युवाओं को समान भागीदारी का अवसर नहीं मिल पाता। यही वजह है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों की चयन प्रक्रिया और मानदेय भुगतान प्रणाली सवालों से घिरी रहती है। सपा सरकार में पंचायतीराज विभाग में आउटसोर्सिंग में गड़बड़झाला चर्चा का विषय बना था।
मौजूदा सरकार में कलेक्ट्रेट व तहसीलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की नियुक्ति में गड़बड़ी सामने आने से सरकार की फजीहत हुई। हालांकि कलेक्ट्रेट व तहसीलों में हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया रद्द की जा चुकी है।
सुधार की सिफारिश कर चुके है कृषि उत्पादन आयुक्त
पूर्व कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार इस प्रणाली की खामियों को उजागर कर सरकार से इसमें सुधार की सिफारिश कर चुके हैं। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए नई नीति बनाई जा रही है।
नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और उस पर सुझाव लिया जा रहा है। नीति में चयन प्रक्रिया तय करने के साथ भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने का प्रस्ताव है। अधिकारी ने बताया कि इस नीति को जल्द ही अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी लेने की तैयारी है।