यूपी के 12 शहरों को स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र की मंजूरी
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केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी के लिए यूपी के 12 शहरों को मंजूरी दे दी है जबकि 13वें शहर के लिए रायबरेली व मेरठ के बीच कड़ी टक्कर है। शहरी विकास मंत्रालय दोनों शहरों को मिले स्कोर व वहां हुए कार्यों के आधार पर इनमें से किसी एक का चयन करेगा। केंद्र सरकार ने तीन माह के अंदर राज्य को स्मार्ट सिटी के लिए प्रपोजल देने को कहा है। इसके लिए जल्द कंसल्टेंट का चयन करना होगा।
केंद्र सरकार प्रपोजल तैयार करने के लिए प्रत्येक शहर को दो-दो करोड़ रुपये देगा। सचिव नगर विकास श्रीप्रकाश सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी का प्रपोजल तैयार करने के लिए कंसल्टेंट का चयन जल्द ही कर लिया जाएगा। प्रपोजल मंजूर होने के बाद सबसे पहले यूपी के दो से पांच शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का पैसा केंद्र से मिलेगा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में बृहस्पतिवार व शुक्रवार को हुई बैठक में राज्य सरकार की ओर से सचिव नगर विकास ने स्मार्ट सिटी के लिए कुल 14 शहरों की सूची प्रस्तुत की। इनके साथ इन शहरों में हुए काम और इसके आधार पर दिए गए अंकों का ब्यौरा भी दिया गया।
वरीयताक्रम में मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, बरेली, झांसी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा, रामपुर और 13वें नंबर पर रायबरेली को ए व मेरठ को बी श्रेणी देते हुए रखा गया।
शहरी विकास मंत्रालय ने वरीयताक्रम में 12 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में मंजूरी दे दी है, लेकिन 13वें शहर पर मुहर अभी नहीं लग पाई है। शहरी विकास मंत्रालय ने जल्द ही 13वें शहर का नाम तय करते हुए राज्य सरकार को सूचित कर देगी।
अब होगी यूपी की असली परीक्षा
स्मार्ट सिटी बनने के लिए यूपी की असली परीक्षा तो अब होगी। नगर विकास विभाग ने अब तक हुए कामों के आधार पर भले ही 14 शहरों की सूची केंद्र सरकार को सौंप दी है, लेकिन तीन माह के अंदर स्मार्ट सिटी का प्रपोजल देना होगा। इसमें राज्य सरकार को यह बताना होगा कि स्मार्ट सिटी के लिए वह शहरों में क्या-क्या करेगा।
केंद्र ने इसके लिए तीन महत्वपूर्ण बिंदु तय किए हैं। पहला शहर के अंदर न्यूनतम 500 एकड़ में जनता के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करनी होंगी। यह सुविधाएं ऐसी होंगी, जो बिलकुल नई होनी चाहिए और शहर के लोग इस सुविधा का पूरा फायदा उठा सकें।
दूसरा शहर के न्यूनतम 50 एकड़ के क्षेत्रफल को लिया जाएगा। इसमें पुराने भवनों या शहर के पुराने क्षेत्र को नया लुक दिया जाएगा। तीसरा शहर में न्यूनतम 250 एकड़ जमीन की व्यवस्था करनी होगी और इसमें आधुनिक टाउनशिप विकसित करने के साथ औद्योगिक क्षेत्रफल भी विकसित किया जा सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था करेगी परीक्षण
राज्यों से स्मार्ट सिटी के लिए भेजे जाने वाले प्रपोजल को अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था परीक्षण करेगी। उनसे मानक पर खरा उतरने वाले शहर को ही स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र सरकार फंड देगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था ने यदि इसे खारिज कर दिया, तो उस शहर को दुबारा अपना प्रपोजल भेजना होगा। प्रपोजल मंजूर होने के बाद ही राज्यों से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) लिया जाएगा।