फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   CDRI developed process technology of covid drug

रूस-चीन में इस्तेमाल हो रही फ्लू की दवा सीडीआरआई ने बनाई, कोरोना के लिए होगा क्लीनिकल ट्रायल

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2020 02:58 AM IST
विज्ञापन
CDRI developed process technology of covid drug
लखनऊ। लखनऊ स्थित काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की लैब सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) ने चीन और रूस में फ्लू के इलाज में इस्तेमाल हो रही एंटीवायरल दवा उमीफेनोविर तैयार करने लिए जरूरी प्रोसेस टेक्नोलॉजी विकसित कर ली है। कोरोना के मामलों में इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से हरी झंडी मिल गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में केजीएमयू सहित लखनऊ के तीन अस्पतालों में इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो जाएगा। सीडीआरआई के निदेशक डॉ. तापस कुंडू तैयार की गई दवा की खासियत को लेकर बताते हैं कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती है। इससे वायरस का कोशिकाओं में प्रवेश रुक जाता है। क्लीनिकल ट्रायल सफ ल रहा तो यह इलाज के लिए सस्ता विकल्प हो सकती है। वहीं क्लीनिकल ट्रायल के सवाल पर सीडीआरआई के प्रवक्ता डॉ. संजीव यादव कहते हैं कि ट्रायल सरकारी क्षेत्र के केजीएमयू, लोहिया इंस्टीट्यूट और निजी क्षेत्र के एरा मेडिकल कालेज में 130 मरीजों पर होगा। खुद पर ट्रायल के लिए रजामंदी देने वाले मरीजों का अगले 15 दिनों में चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। ट्रायल करीब दो महीने तक चलेगा। इसमें इलाज के समय और उसके बाद मरीजों पर दवा के असर को परखा जाएगा।  
विज्ञापन
उमीफेनोविर है क्या? उमीफेनोविर एक एंटी वायरल दवा है। अभी तक रूस और चीन के पास ही इसे बनाने के लिए जरूरी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी है। उनके पेटेंट का हम उपयोग नहीं कर सकते हैं और अन्य किसी देश में यह उपलब्ध नहीं है। हाल ही में कोविड-19 के रोगियों के लिए इसके संभावित उपयोग को चिह्नित किया गया है। ऐसे में सीडीआरआई ने तीन महीने में इस दवा के देसी वर्जन के लिए अपनी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी विकसित कर ली।
विज्ञापन
120 में चुने गए 30 कंपाउंड में से पहला सीडीआरआई ने कुल 120 कंपाउंड कोरोना की संभावित दवा के लिए चुने थे। उसमें से 30 को प्रभावी पाया गया। यह पहला कंपाउंड है जिसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो रहा है। खास बात है कि इसके उत्पादन के लिए किसी भी एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इंग्रीडिएंट को आयात करने की जरूरत नहीं होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोवा की फार्मा कंपनी बनाएगी दवा गोवा की निजी फार्मा कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सीडीआरआई ने की है। फार्मा कंपनी भी अलग से डीजीसीआई से क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति ले चुकी है। दवा के निर्माण और बिक्री का लाइसेंस उनके पास है जिससे क्लीनिकल ट्रायल सफल रहने पर न्यूनतम समय में उत्पादन करने में आसानी होगी।
इस टीम ने किया काम डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, चंद्र भूषण त्रिपाठी, नयन घोष, नीलांजना मजुमदार, डॉ पीआर मिश्रा, विवेक भोसले, आर के त्रिपाठी, एसके रथ और शरद शर्मा। नोडल वैज्ञानिक डॉ. रविशंकर रामचंद्रन हैं। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे ने वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना है कि ट्रायल के अगले चरणों को तेजी से ट्रैक किया जा रहा है। ताकि, जल्द से जल्द भारतीय मरीजों को यह दवा उपलब्ध हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed