अलर्ट रहें कहीं, आपके बच्चे को भी न हो जाए ये बीमारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर माता-पिता दोनों सांस की एलर्जी से पीड़ित होते हैं तो उनके बच्चों में अस्थमा की आशंका 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। माता या पिता दोनों में से किसी एक को एलर्जी है तो अस्थमा की आशंका 25 प्रतिशत तक होती है।
यह जानकारी विश्व अस्थमा दिवस (5मई) की पूर्व संध्या पर प्रेस क्लब में डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने दी।
उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए बाजार में तमाम तरह की दवाएं हैं और उनके निरंतर सेवन से इसे दूर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि शरीर में जब आईजीई इम्यूनोग्लोबलीन की मात्रा बढ़ती है, तो पीड़ित को अस्थमा अटैक पड़ता है। गर्भवती के धूम्रपान करने से गर्भस्थ शिशु के फेफड़े की बनावट में दिक्कत हो सकती है।
इन बातों का रखें ध्यान
बच्चे को अस्थमा से बचाने के लिए धूम्रपान से बचना चाहिए। फेफड़े के बनावट में कमी होने पर संक्रमण की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
ऐसा होने पर शिशु के जन्म के बाद उसे समस्या हो सकती है। अस्थमा से पीड़ित बुजुर्ग लोगों को ऐसे काम करने से बचना चाहिए, जिससे उन्हें थकावट हो।
इस मौके पर डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि जिन बच्चों को अस्थमा की परेशानी होती है उन्हें धूल, धुआं, पालतू जानवरों के फर, पक्षियों के पंख या फूलों के पराग से एलर्जी हो सकती है, इस लिए उन्हें इसके प्रभाव से दूर रखना चाहिए।
अस्थमा पर नियंत्रण के लिए दवाएं सांस की नलियों को सुरक्षा देती हैं, रोगी को दमा का दौरा पड़ने पर फौरी तौर पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
बच्चों की सांस फूलने पर उनके दिनचर्या पर अधिक ध्यान देना चाहिए। ज्यादा भागदौड़ से भी ऐसे बच्चों की सेहत को नुकसान हो सकता है।