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लारी कार्डियोलॉजी में जल्द ही बनेगी एक और कैथ लैब, सांसद देंगे करोड़ों रुपये
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:48 PM IST
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- फोटो : डेमो
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केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी में जल्द ही एक और कैथ लैब बनेगी। इसके लिए राज्यसभा सदस्य संजय सेठ ने अपनी निधि से पांच करोड़ रुपये देने की बात कही है। बृहस्पतिवार को इसकी कार्ययोजना तैयार की गई। केजीएमयू कुलपति डॉ. आरबीएलबी भट्ट के साथ बृहस्पतिवार को राज्यसभा सदस्य संजय सेठ, जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा व कार्डियोलॉजी के चिकित्सकों की बैठक हुई।
इसमें नई कैथ लैब बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई। राज्यसभा सदस्य ने निधि सेे पांच करोड़ रुपये देने की बात कही। साथ ही भरोसा दिलाया कि लैब के लिए हर स्तर पर सहयोग करेंगे। कुलपति ने बताया कि नई कैथ लैब से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। सांसद ने पांच करोड़ देने की बात कही है।
इसके अलावा विश्वविद्यालय अन्य जगह से भी रुपयों का इंतजाम कर कैथ लैब को अत्याधुनिक तरीके से बनवाएगा।हृदय की जांच और इलाज करने के लिए अस्पताल में अलग से कैथ लैब होती है। लैब में मौजूद मशीनों के जरिए आसानी से मॉनीटर पर हृदय को देखकर बीमारी का पता लगाया जाता है।
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इसमें एंजियोग्राफी, एंटीनियोप्लास्टिक सहित सभी आधुनिक मशीनें होती हैं। इसमें हार्ट ब्लॉकेज संबंधी व अन्य ऑपरेशन की सुविधाएं रहती हैं। मरीजों की संख्या ज्यादा होने की वजह से केजीएमयू की कैथलैब पर बहुत दबाव है। जांच के लिए तीन से चार हफ्ते तो ऑपरेशन के लिए दो से ढाई साल की वेटिंग चल रही है।
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इसमें नई कैथ लैब बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई। राज्यसभा सदस्य ने निधि सेे पांच करोड़ रुपये देने की बात कही। साथ ही भरोसा दिलाया कि लैब के लिए हर स्तर पर सहयोग करेंगे। कुलपति ने बताया कि नई कैथ लैब से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। सांसद ने पांच करोड़ देने की बात कही है।
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इसके अलावा विश्वविद्यालय अन्य जगह से भी रुपयों का इंतजाम कर कैथ लैब को अत्याधुनिक तरीके से बनवाएगा।हृदय की जांच और इलाज करने के लिए अस्पताल में अलग से कैथ लैब होती है। लैब में मौजूद मशीनों के जरिए आसानी से मॉनीटर पर हृदय को देखकर बीमारी का पता लगाया जाता है।
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इसमें एंजियोग्राफी, एंटीनियोप्लास्टिक सहित सभी आधुनिक मशीनें होती हैं। इसमें हार्ट ब्लॉकेज संबंधी व अन्य ऑपरेशन की सुविधाएं रहती हैं। मरीजों की संख्या ज्यादा होने की वजह से केजीएमयू की कैथलैब पर बहुत दबाव है। जांच के लिए तीन से चार हफ्ते तो ऑपरेशन के लिए दो से ढाई साल की वेटिंग चल रही है।