वायरलेस विभाग के डीआईजी सहित चार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज, 65 लाख का था मामला
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हाईकोर्ट के आदेश पर वायरलेस के डीआईजी अनिल कुमार और ठगी के आरोपी चंद्रपाल सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ महानगर कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
एडीसीपी उत्तरी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि डीआईजी पर गुडंबा के कल्याणपुर निवासी कारोबारी रमेश कुमार गुप्ता से फ्लैट बेचने के नाम पर पांच लाख रुपये लेने और बाद में सौदे से मुकर जाने का आरोप है। रमेश ने डीआईजी की पत्नी पुष्प, अनिल और दरोगा बृजेश कुमार सिंह को भी आरोपी बनाया है। जांच चल रही है।
एडीसीपी उत्तरी ने बताया कि रमेश ने डीआईजी और उनकी पत्नी से महानगर के इंदिरा दर्शन रेजीडेंसी स्थित फ्लैट खरीदने के लिए संपर्क किया था। डीआईजी ने 60 लाख रुपये में सौदा किया और पांच लाख रुपये एडवांस देने को कहा। रमेश ने रकम देकर फ्लैट पर कब्जा ले लिया। वह फ्लैट की मरम्मत व रंगाई-पुताई भी कराने लगे।
उन्होंने करीब 65 हजार रुपये इस पर खर्च किए और डीआईजी को भी करीब डेढ़ लाख रुपये और दिए। रमेश का आरोप है कि कुछ महीने बाद ही डीआईजी सौदे से मुकर गए और उन्हें जबरदस्ती फ्लैट से निकाल दिया।
महिला थाने में छेड़छाड़ का फर्जी केस दर्ज करा दिया
रमेश का कहना है कि उन्होंने रुपया वापस मांगा तो डीआईजी ने पत्नी की तरफ से उनके खिलाफ महिला थाने में छेड़छाड़ का फर्जी केस दर्ज करा दिया। पीड़ित कारोबारी ने भी पुलिस से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में डीआईजी के खिलाफ प्रार्थनापत्र दिया।
इससे पूर्व भी महिला सिपाही ने डीआईजी और चंद्रपाल के खिलाफ रुपये और कार ठगने का आरोप लगाते हुए महानगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। चंद्रपाल खुद को डीआईजी का भाई बताता है। उसके खिलाफ ठगी के कई मुकदमे और भी दर्ज हैं।