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कोर्ट का फैसला, बच्ची के दुराचारी कातिल को नहीं है जिंदा रहने का अधिकार

Wed, 20 Apr 2016 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 20 Apr 2016 10:25 AM IST
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capital punishment for rapist in sravasti
- फोटो : demo pic

छह साल की मासूम से दुराचार और जघन्य तरीके से उसकी हत्या करने वाले दरिंदे की फांसी पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भी मुहर लगा दी है। अदालत ने निर्णय सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की और कहा, अभियुक्त ने अपनी अप्राकृतिक यौन इच्छा संतुष्ट करने के लिए एक छह साल की बच्ची की निर्ममता से हत्या कर दी। 

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यह दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध है। अभियुक्त भले ही युवा है लेकिन उसने इस समाज में जिंदा रहने का अधिकार खो दिया है। उसके लिए केवल मौत की सजा ही एक सजा हो सकती है। 
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घटनाक्रम के मुताबिक, आठ मार्च 2012 को श्रावस्ती के इकौना के एक गांव में होली के दिन युवक छोटकऊ ने गांव की ही एक मासूम को टॉफी देने के बहाने गांव के बाहर गन्ने के खेत में ले जाकर दुराचार किया था। 
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इसके बाद बच्ची के सलवार से उसका गला घोटकर हत्या कर दिया। आक्रोशित ग्रामीण जब उसे पकड़ने के लिए उसे घर पहुंचे तो वह अपने मड़हे मे आग लगा कर परिवार समेत फरार हो गया। 

सेशन कोर्ट ने उसे दुराचार और हत्या का दोषी माना। 29 मार्च 2014 को हत्या के लिए फांसी और 50 हजार रुपये जुर्माना जबकि दुराचार के लिए उम्र कैद व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। छोटकऊ ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे जस्टिस सुरेंद्र विक्रम सिंह राठौड़ और जस्टिस प्रत्युश कुमार की खंडपीठ ने मंगलवार को खारिज कर दिया।

ऐसी क्रूरता... पूरे गांव को लगा होगा सदमा

capital punishment for rapist in sravasti
अदालत ने कहा, ‘अभियुक्त की नीचता केवल दुराचार तक नहीं रुकी। उसने बेहद हिंसक तरीके से उसकी हत्या भी कर दी। 

मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि बच्ची को जान से मारने से पहले उसके शरीर पर आठ वार किए गए। यह बेहद जघन्य है। इसे देखकर बच्ची के अभिभावकों और उसके गांव वालों के दिल कांप गए होंगे।’

‘ऐसे मामलों में अगर कोर्ट नरमी बरतेगा तो इससे समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा। इन अपराधों में ऐसी सजा होनी चाहिए जिससे दुश्चरित्र लोगों के व्यवहार में बदलाव आए और वे ऐसा करने का सोच भी न सकें।’

capital punishment for rapist in sravasti
रहम से जाएगा गलत संदेश - फोटो : Amar Ujala
इकौना थाना क्षेत्र के एक गांव में आठ मार्च 2012 को होली के दिन एक अधेड़ हैवान ने गांव की एक छह वर्षीय से बालिका को टॉफी देने के बहाने गांव के बाहर गन्ने के खेत में ले जाकर दुराचार किया था। 

इसके बाद बालिका के सलवार का ही फंदा बनाकर उसकी गला घोटकर हत्या कर दी थी। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ने के लिए उसके घर का घेराव किया तो वह अपने मड़हे मे आग लगा कर स्वयं पूरे परिवार के साथ फरार हो गया। 

इस मुकदमे की सुनवाई के बाद जिला जज ने 29 मार्च 2014 को फैसला सुनाते हुए घटना को हैवानियत की पराकाष्ठा बताते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। 
रहम की उम्मीद लिए आरोपी ने हाईकोर्ट लखनऊ का दरवाजा खटखटाया था, परंतु हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए सेशन कोर्ट द्वारा दिए गए फांसी के आदेश को बरकरार रखा। 
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