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कॉल 112 सेवा करेगी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस संचालन में मदद
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कॉल 112 सेवा करेगी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस संचालन में मदद
एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस के संचालन के लिए कॉल 112 की सेवा मदद ली जाएगी। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए शासन ने यह फैसला किया है। कॉल 112 एएलएस सेवा के संचालन में आईटी सपोर्ट और कॉल सेंटर के रूप में मदद करेगी।
एएलएस एंबुलेंस का संचालन बंद करने के जीवीके ईएमआरआई कंपनी के नोटिस के लगभग एक सप्ताह बाद ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने नए संचालक की तलाश के लिए टेंडर निकाला था।
लेकिन अति महत्वपूर्ण सेवा के संचालन के लिए 16 अक्तूबर तक कंपनी का चुनाव करना चुनौती मानी जा रही है। यही नहीं एंबुलेंस संचालन के लिए एक कॉल सेंटर की जरूरत भी होगी।
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जिससे प्रदेश भर से मदद के लिए आने वाली कॉल को रिसीव किया जा सके और जरूरतमंद के पास एंबुलेंस भेजी जा सके।
इस आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार एएलएस के कॉल सेंटर के रूप में यूपी पुलिस की कॉल 112 सेवा की मदद लेगी।
एंबुलेंस के निर्बाध संचालन के लिए वहां सॉफ्टवेयर विकसित करने के साथ ही कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पूरे काम में जीवीके ईएमआरआई की मदद भी ली जा रही है।
इसलिए आई यह नौबत
योगी सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही एएलएस एंबुलेंस का संचालन शुरू हुआ था। दो चरणों में प्रदेश के सभी जिलों को 250 एंबुलेंस दी गई थीं जिससे हार्ट अटैक, सांस की गंभीर दिक्कत के मरीजों या फिर दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को एएलएस एंबुलेंस से जीवन रक्षा के लिए जरूरी सपोर्ट देते हुए अस्पताल पहुंचाया जा सके। प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा का संचालन कर ही जीवीके ईएमआरआई कंपनी को ही एएलएस एंबुलेंस के संचालन का मौका दिया गया। लेकिन कंपनी ने कोरोना महामारी काल के दौरान ही अचानक एएलएस एंबुलेंस सेवा संचालन का सरकार से हुआ एमओयू खत्म करने की घोषणा करते हुए अपने लगभग 700 कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी कर दिया। ऐसे में इसके संचालन की नए सिरे से तैयारी की जा रही है।
विकसित किया जा रहा सॉफ्टवेयर
कॉल 112 सेवा, एडीजी असीम अरुण ने बताया कि एएलएस एंबुलेंस के कॉल सेंटर के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। जल्द ही इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को एंबुलेंस के संचालन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस के संचालन के लिए कॉल 112 की सेवा मदद ली जाएगी। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए शासन ने यह फैसला किया है। कॉल 112 एएलएस सेवा के संचालन में आईटी सपोर्ट और कॉल सेंटर के रूप में मदद करेगी।
एएलएस एंबुलेंस का संचालन बंद करने के जीवीके ईएमआरआई कंपनी के नोटिस के लगभग एक सप्ताह बाद ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने नए संचालक की तलाश के लिए टेंडर निकाला था।
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लेकिन अति महत्वपूर्ण सेवा के संचालन के लिए 16 अक्तूबर तक कंपनी का चुनाव करना चुनौती मानी जा रही है। यही नहीं एंबुलेंस संचालन के लिए एक कॉल सेंटर की जरूरत भी होगी।
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जिससे प्रदेश भर से मदद के लिए आने वाली कॉल को रिसीव किया जा सके और जरूरतमंद के पास एंबुलेंस भेजी जा सके।
इस आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार एएलएस के कॉल सेंटर के रूप में यूपी पुलिस की कॉल 112 सेवा की मदद लेगी।
एंबुलेंस के निर्बाध संचालन के लिए वहां सॉफ्टवेयर विकसित करने के साथ ही कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पूरे काम में जीवीके ईएमआरआई की मदद भी ली जा रही है।
इसलिए आई यह नौबत
योगी सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही एएलएस एंबुलेंस का संचालन शुरू हुआ था। दो चरणों में प्रदेश के सभी जिलों को 250 एंबुलेंस दी गई थीं जिससे हार्ट अटैक, सांस की गंभीर दिक्कत के मरीजों या फिर दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को एएलएस एंबुलेंस से जीवन रक्षा के लिए जरूरी सपोर्ट देते हुए अस्पताल पहुंचाया जा सके। प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा का संचालन कर ही जीवीके ईएमआरआई कंपनी को ही एएलएस एंबुलेंस के संचालन का मौका दिया गया। लेकिन कंपनी ने कोरोना महामारी काल के दौरान ही अचानक एएलएस एंबुलेंस सेवा संचालन का सरकार से हुआ एमओयू खत्म करने की घोषणा करते हुए अपने लगभग 700 कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी कर दिया। ऐसे में इसके संचालन की नए सिरे से तैयारी की जा रही है।
विकसित किया जा रहा सॉफ्टवेयर
कॉल 112 सेवा, एडीजी असीम अरुण ने बताया कि एएलएस एंबुलेंस के कॉल सेंटर के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। जल्द ही इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को एंबुलेंस के संचालन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।