'यूपी सरकार नहीं चाहती किसानों की मदद करे मोदी सरकार'
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बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों की मदद पर सियासत अभी थमने वाली नहीं है। अब केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान ने कहा है कि राज्य ने केंद्र को किसान विरोधी साबित करने के लिए सोची समझी चाल चली। इसके लिए उसने नियम के हिसाब से दी जाने वाली स्पष्ट सूचनाएं नहीं दी।
प्रदेश की योजना थी कि केंद्र किसानों की मदद को एक पाई न दे पाए ताकि वह उसे प्रदेश भर में घूम-घूम कर बदनाम कर सके। यह ओछापन है। केंद्र किसानों की मदद करना चाहता है लिहाजा उसने इसका रास्ता निकाला। प्रदेश के फसल उत्पादन में गिरावट की राज्य सरकार की रिपोर्ट को आधार बनाया और अब तक की सबसे बड़ी सहायता राशि मंजूर की है।
केंद्र ने 2801 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मंजूर की तो प्रदेश के राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने इसे जरूरत का एक तिहाई बताते हुए केंद्र सरकार को किसान विरोधी ठहरा दिया। अब संजीव बालियान ने प्रदेश सरकार पर पलटवार करते हुए उसे ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
‘अमर उजाला’ से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न सिर्फ केंद्रीय सहायता पर फैसले में देरी के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है, बल्कि मांग से कम पैसे के लिए भी वही जिम्मेदार है। केंद्र सरकार किसानों को ज्यादा से ज्यादा सहायता देना चाहती है। इसी वजह से जैसे ही बेमौसम बरसात व ओलावृष्टि की घटनाएं शुरू हुई फसलों के नुकसान पर मुआवजे का मानक बदला गया। आजादी के बाद पहली बार ऐसा किया गया।
किसान विरोधी हरकतें कर रही है राज्य सरकार
बालियान ने बताया कि आपदा राहत नियमों में स्पष्ट है कि बेमौसम बारिश से नुकसान का मुआवजा राज्य सरकार राज्य आपदा राहत निधि से जबकि ओलावृष्टि से नुकसान का मुआवजा केंद्र सरकार एनडीआरएफ से देगी।
केंद्र प्रदेश से लगातार ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से अलग-अलग नुकसान की रिपोर्ट मांगता रहा। महीनों तक इसकी रिपोर्ट नहीं दी गई। बाद में यह कह दिया कि ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से नुकसान अलग नहीं किया जा सकता।
राज्यमंत्री ने कहा कि जब तक ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से नुकसान अलग नहीं किया जा सकता तब तक एनडीआरएफ से बजट की स्वीकृति नहीं दी जा सकती। यह जानने के बावजूद यह रवैया अपनाया गया। ऐसा सिर्फ इसलिए कि केंद्र सहायता मंजूर ही न कर सके और वह प्रदेश भर में केंद्र को बदनाम करे। यह किसान विरोधी कृत्य है।
बालियान ने कहा कि सूबे के कितने जिलों में ओलावृष्टि हुई यह तक स्पष्ट नहीं किया। सवाल ये है कि क्या सूबे के सभी 75 जिलों में ओलावृष्टि हुई थी? यह जवाब नहीं में है। ऐसा होने के बावजूद यह रवैया अपनाया गया। उन्होंने कहा कि जब नियम में सबकी जिम्मेदारी स्पष्ट है तो उससे भागना नहीं चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने बजट का पैसा खर्च करने से बचने के लिए यह तरीका अपना रही थी। लेकिन केंद्र प्रदेश के किसानों को हर हाल में सहायता देना चाहता था। इसलिए राज्य सरकार की उस रिपोर्ट को आधार बनाया गया जिसमें इस वर्ष फसल उत्पादन में 10 फीसदी कमी की बात कही गई थी।
केंद्र ने दी अब तक की सबसे बड़ी सहायता
केंद्र ने उत्पादन में नुकसान की पूरी भरपाई करते हुए 2801 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह प्रदेश को आजादी के बाद एनडीआरएफ से मिली सबसे बड़ी सहायता है। राज्य सरकार को इसे पारदर्शिता के साथ किसानों तक पहुंचाना चाहिए। अब यदि नुकसान से ये आंकड़े सही नहीं है तो इसके लिए भी राज्य सरकार ही जिम्मेदार है।
सर्वे, राहत वितरण में शिकायतों की भरमार
बालियान ने कहा कि प्रदेश के जिलों से मनमानी सर्वे, पक्षपात पूर्ण सर्वे, मनमानी राहत वितरण, एक ही गांव के कुछ लोगों को राहत राशि देने और कुछ को न देने जैसे शिकायतें मंत्रालय को लगातार मिल रही हैं।
उन्होंने बताया कि वह प्रदेश के जिलाधिकारियों को ये पत्र भेजकर जांच कर कार्यवाही के लिए लिख रहे हैं। उन्हें इन पत्रों की पावती तक की सूचना नहीं भेजी जा रही है। प्रदेश सरकार आपदा राहत वितरण के नाम पर किसानों में भेदभाव कर रही है।