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कुंभ में पहली बार कैबिनेट बैठक करेगी योगी सरकार, बनेगा ये कीर्तिमान
Mon, 21 Jan 2019 11:49 AM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 21 Jan 2019 11:49 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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इलाहाबाद और फैजाबाद को इतिहास बना चुकी योगी सरकार अब प्रयागराज में एक नया अध्याय रचने जा रही है। नए कलेवर में आयोजित कुंभ में 28 या 29 जनवरी को प्रदेश कैबिनेट की बैठक की तैयारी है। उत्तराखंड बनने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक कभी-कभी नैनीताल में होती थी।
यह भी अंतिम बार 1962 में हुई थी। बंटवारे के बाद यह पहला मौका होगा कि प्रदेश कैबिनेट की बैठक लखनऊ से बाहर होगी। कुंभ में तो किसी भी सरकार की कैबिनेट बैठक का यह पहला मौका होगा।
यह भी बनेगा कीर्तिमान
सूर्य की गति के हिसाब से प्रयागराज के अलावा हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में भी कुंभ के आयोजन होते हैं। हरिद्वार पहले उत्तर प्रदेश में ही था, पर अब उत्तराखंड का हिस्सा है। नासिक महाराष्ट्र में है जबकि उज्जैन मध्यप्रदेश में है।
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राजनीति शास्त्री प्रो. एसके द्विवेदी कहते हैं, मुझे याद नहीं आता कि देश को आजादी मिलने के बाद इन राज्यों की सरकारों ने कुंभ के बीच जाकर कभी कैबिनेट बैठक की हो। योगी सरकार प्रयागराज कुंभ में कैबिनेट की बैठक करके इतिहास रचने जा रही है। प्रदेश में भी पहली बार ऐसा संयोग बनेगा जब संगम तट पर एक साथ एक ही दिन पूरी सरकार और सरकारी अमला उपस्थित होगा।
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यह भी अंतिम बार 1962 में हुई थी। बंटवारे के बाद यह पहला मौका होगा कि प्रदेश कैबिनेट की बैठक लखनऊ से बाहर होगी। कुंभ में तो किसी भी सरकार की कैबिनेट बैठक का यह पहला मौका होगा।
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यह भी बनेगा कीर्तिमान
सूर्य की गति के हिसाब से प्रयागराज के अलावा हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में भी कुंभ के आयोजन होते हैं। हरिद्वार पहले उत्तर प्रदेश में ही था, पर अब उत्तराखंड का हिस्सा है। नासिक महाराष्ट्र में है जबकि उज्जैन मध्यप्रदेश में है।
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राजनीति शास्त्री प्रो. एसके द्विवेदी कहते हैं, मुझे याद नहीं आता कि देश को आजादी मिलने के बाद इन राज्यों की सरकारों ने कुंभ के बीच जाकर कभी कैबिनेट बैठक की हो। योगी सरकार प्रयागराज कुंभ में कैबिनेट की बैठक करके इतिहास रचने जा रही है। प्रदेश में भी पहली बार ऐसा संयोग बनेगा जब संगम तट पर एक साथ एक ही दिन पूरी सरकार और सरकारी अमला उपस्थित होगा।
पंत ने पहली बार की थी बाहर बैठक
वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह सूर्य बताते हैं कि जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का बंटवारा नहीं हुआ था तब प्रदेश की राजधानी गर्मी में तीन महीने आमतौर पर नैनीताल हो जाया करती थी। इस दौरान राज्यपाल वहीं से काम करते थे। सरकार भी वहीं होती थी।
वर्ष 1962 तक यह परंपरा चली। इस दौरान प्रदेश सरकार की कैबिनेट की बैठकें नैनीताल में हुआ करती थीं। पर, धीरे-धीरे सरकार का गर्मी में नैनीताल जाना बंद हो गया। हालांकि राज्यपाल जाते रहे। सूर्य कहते हैं कि 1962 के बाद नैनीताल में कैबिनेट की बैठकें होने का सिलसिला खत्म हो गया। वयोवृद्ध प्रोफेसर एसएम सईद भी इसकी पुष्टि करते हैं। वह अपनी याददाश्त पर जोर डालते हुए कहते हैं कि संभवत: गोविंद वल्लभ पंत ने पहली बार लखनऊ से हटकर नैनीताल में प्रदेश कैबिनेट की बैठक की थी।
56 वर्ष बाद लखनऊ से बाहर कैबिनेट बैठक
इस तरह लगभग 56 वर्ष बाद पहला मौका होगा जब उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक लखनऊ से बाहर होगी। साफ है कि लखनऊ और नैनीताल के बाद प्रयागराज वह पहला शहर बनने जा रहा है जहां कैबिनेट की बैठक होगी।
वर्ष 1962 तक यह परंपरा चली। इस दौरान प्रदेश सरकार की कैबिनेट की बैठकें नैनीताल में हुआ करती थीं। पर, धीरे-धीरे सरकार का गर्मी में नैनीताल जाना बंद हो गया। हालांकि राज्यपाल जाते रहे। सूर्य कहते हैं कि 1962 के बाद नैनीताल में कैबिनेट की बैठकें होने का सिलसिला खत्म हो गया। वयोवृद्ध प्रोफेसर एसएम सईद भी इसकी पुष्टि करते हैं। वह अपनी याददाश्त पर जोर डालते हुए कहते हैं कि संभवत: गोविंद वल्लभ पंत ने पहली बार लखनऊ से हटकर नैनीताल में प्रदेश कैबिनेट की बैठक की थी।
56 वर्ष बाद लखनऊ से बाहर कैबिनेट बैठक
इस तरह लगभग 56 वर्ष बाद पहला मौका होगा जब उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक लखनऊ से बाहर होगी। साफ है कि लखनऊ और नैनीताल के बाद प्रयागराज वह पहला शहर बनने जा रहा है जहां कैबिनेट की बैठक होगी।