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यूपी कैबिनेट का फैसला: अगले वित्त वर्ष के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मिली मंजूरी

Sat, 09 Mar 2019 11:31 AM IST
Priyesh Mishra ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 09 Mar 2019 11:31 AM IST
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Cabinet decision on Mining lease and other projects in lucknow
फाइल फोटो

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा को प्रदेश में वर्ष 2019-20 में लागू किए जाने के फैसले को हरी झंडी दे दी गई। प्राकृतिक आपदाओं व रोके न जा सकने वाले अन्य जोखिमों जैसे रोग व कीट आदि से फसल नष्ट होने पर यह बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है।

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खरीफ मौसम में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, तिल, सोयाबीन, मूंगफली और रबी मौसम में गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, लाही-रसरों, आलू और अलसी को ग्राम पंचायत स्तर पर बीमित किया जाएगा। प्रतिकूल मौसम होने पर बोआई न कर पाने पर बीमित कृषक को बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक तत्काल क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। कम वर्षा, बेमौसम व अधिक वर्षा, पाला, कम व अधिक तापमान, आर्द्रता आदि से फसल नष्ट होने पर पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का संचालन किया जाएगा। मौसम की स्थिति के आकलन के लिए ब्लॉक में दो स्वचालित मौसम केंद्र की स्थापना बीमा कंपनी की ओर से स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से की जाएगी। मौसम के प्रतिदिन के आंकड़ों के आधार पर फसल की संभावित क्षति का आकलन किया जाएगा।
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अब खनन पट्टे वाले जिलों में नहीं होगा भंडारण
खनन को लेकर सरकार द्वारा पूर्व में तय बाध्यताओं में संशोधन किया गया है। मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को तय किया कि नदी तलीय खनन क्षेत्र के पट्टा धारक को अब उस जिले में भंडारण की अनुमति नहीं दी जाएगी। पूर्व में यह भंडारण पट्टा धारक को स्वीकृत खनन क्षेत्र में भंडारण की अनुमति थी।
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इसके अलावा खनिज स्रोत से दस किमी दायर में भंडारण पूर्व में तय दस किमी की परिधि में भंडारण पर प्रतिबंध में बदलाव करते हुए अब इसे पांच किमी कर दिया गया है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि नदी तलीय उप खनिज का भंडारण की स्वीकृति पांच किमी की परिधि में नहीं की जा सकेगी।

काष्ठ आधारित उद्योगों में मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी सृजित
इन्वेस्टर्स समिट में मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी के एमओयू साइन करने वाले काष्ठ आधारित उद्योगों के लिए लाइसेंस देने की नीति तय कर दी गई है। मंत्रिमंडल ने इस संबंध में राज्य स्तरीय समिति के फैसले केमद्देनजर फैसला किया है।

इसके लिए इंडस्ट्रियल एंड एंप्लायमेंट प्रमोशन पालिसी - 2017 केतहत पूर्व में स्वीकृत 8 श्रेणियों के अलावा मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा की अतिरिक्त श्रेणी के सृजन को मंजूरी दी गई है। नव सृजित श्रेणी में राज्य स्तरीय समिति द्वारा आवंटित प्रकाष्ठ की मात्रा की सीमा तक नए लाइसेंस दिए जाने का प्रस्ताव है। यह भी तय हुआ है कि अवशेष प्रकाष्ठ की मात्रा के संबंध में राज्य स्तरीय समिति फैसला करेगी।

इसमें राज्य के औद्योगिक विकास विभाग की इंडस्ट्रियल एंड एंप्लायमेंट प्रमोशन पालिसी - 2017 केतहत मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी में एमओयू करने वाले उद्यमियों को अवसर दिए जाने के लिए यह फैसला किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से प्रदेश के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित होंगे।

मिड डे मील रसोइयों व हेल्पर का मानदेय 1500 करने का फैसला

स्कूलों में मिड डे मील बनाकर बच्चों को खिलाने वाले रसोइयों व कुक कम हेल्प का मानदेय बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। बृहस्पतिवार को लोकभवन से मुख्मंत्री योगी आदित्य नाथ ने इसकी घोषणा की थी। अभी रसोइयों को 10 माह केलिए 1000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। जिसमें भारत सरकार 600 रुपये और राज्य सरकार 400 रुपये देती है। 26 दिसंबर 2009 से निर्धारित इस मानदेय में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद 10 माह तक रसोइयों को 500 रुपये बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।

निराला की जन्मस्थली में स्मृति भवन निर्माण की अनुमति
पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जन्मस्थली गढ़ाकोला उन्नाव में विशाल स्मृति भवन, पुस्तकालय के निर्माण में विशिष्टियों की अनुमति प्रदेश कैबिनेट ने दी है। कार्यदायी संस्थान उप्र आवास विकास परिषद ने 17.03 करोड़ रुपये इसके निर्माण कार्य का बजट आंकलना किया था। जिसे परीक्षण प्रायोजना रचना मूल्यांकन प्रभाग ने  14.64 करोड़ रुपये मूल्यांकित है। इसमें इपोक्सी फ्लोरिंग, पैडेस्टल, शो केस, डायरोमा, कारपेट फ्लोरिंग, वुड ब्लॉक फ्लोरिंग, फाल्स सीलिंग, सीलिंग वाल एकॉवास्टिक, एक्वास्टिकल वाल पैनलिंग और केंद्रीय वातानुकूलन सिस्टम कैबिनेट ने दी है।

गोरखपुर एयरपोर्ट फोर लेने में आने वाले मकानों को मुआवजा
सर्किट हाउस से गोरखपुर एयरपोर्ट तक फोर लेन के निर्माण के बीच में आने वाले पांच मकानों को ध्वस्त करने का मुआवजा दिया जाएगा। प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को इसकी अनुमति दे दी। गोरखपुर सर्किट हाउस से एयरपोर्ट तक 8.710 किलोमीटर लंबा फोर लेन मार्ग स्वीकृत है। इसी मार्ग पर छठे किलोमीटर पर पांच आवासीय भवन है। मार्ग चौड़ा करने के लिए इनका तोड़ा जाना जरूरी है। पीडब्लूडी की जमीन पर बने भवनों के ध्वस्तीकरण से पहले उनको मुआवजा देने के संबंध में कोई नीति नहीं है। इन्हें हटाने के लिए 48.54 लाख रुपये अनुकंपा के आधार पर प्रतिकर देने की मंजूरी कैबिनेट ने दी है।

मनोरंजन कर विभाग के निरीक्षक अब वाणिज्य कर विभाग के कर्मी

प्रदेश मनोरंजन कर विभाग के निरीक्षकों को उत्तर प्रदेश माल एवं सेवाकर के प्रावधानों के तहत वाणिज्य कर विभाग में शामिल कर लिया गया है। मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि इन निरीक्षकों को वाणिज्य कर विभाग में मृत संवर्ग के रूप में निरीक्षक संवर्ग का गठन करते हुए संविलय कर दिया जाए।

मुख्य निर्वाचन कार्यालय निजी सचिव सेवा नियमावली को मंजूरी
कैबिनेट ने उप्र मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के लिए निजी सचिव (श्रेणी-एक) और निजी सचिव (श्रेणी-दो) के पद के लिए सेवा नियमावली 2019 को मंजूरी दे दी। उप्र मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी/अनुभाग अधिकारी व समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी/अपर निजी सचिव सेवा नियमावली पहले से लागू है।

फोरलेन चौड़ीकरण में प्रभावित भवनों के लिए मुआवजा
गोरखपुर में जंगल कौड़िया से मोहद्दीपुर चौक के फोर लेन मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकर कार्य में प्रभावित भवनों को मुआवजा देने को मामले को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। 17.515 किलोमीटर लंबे इस मार्ग, पुल व ओवरब्रिज निर्माण केलिए भारत सरकार ने 323.36 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। मार्ग चौड़ीकरण में आवासीय, अनावासीय, व्यावसायिक भवनों को तोड़ा जाना जरूरी है। लेकिन भारत सरकार के स्वीकृत कार्यों के लिए भूमि के मुआवजे और सरकारी जमीन पर बने भवनों के तोड़े जाने से पहले प्रभावित लोगों को प्रतिकर देने की कोई नीति नहीं है। विशेष परिस्थितियों में मार्ग चौड़ीकरण केलिए 6625.08 वर्गमीटर जमीन के लिए 5633.73 लाख रुपये और प्रभावित भवनों के लिए 1256.49 लाख के मुआवजे को कैबिनेट ने मंजूर दे दी है।

सरकारी डॉक्टरों को केंद्र के समान प्रैक्टिस बंदी भत्ता
सरकारी एलोपैथिक डॉक्टरों और डेंटिस्ट को प्रैक्टिस बंदी भत्ता केंद्र के समान मिलेगा। शुक्रवार देर रात हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। भत्ते की पुनीक्षित दर जनवरी 2019 से लागू की जाएगी। डॉक्टर लंबे समय से सातवें वेतनमान के अनुसार नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) देने की मांग कर रहे थे। अभी सरकारी डॉक्टरों को छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एनपीए दिया जा रहा है।

प्रदेश सरकार के अनुसार 24 अगस्त 2009 से लागू दर के अनुसार डॉक्टरों को मूल वेतन का 25 फीसदी इस शर्त के साथ मिलता था कि भत्ते और मूल वेतन की अधिकतम सीमा 85 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी। कैबिनेट से मंजूर नई दर में मूल वेतन का 20 फीसदी इस शर्त केसाथ्थदिया जाएगा कि भत्ते का योग और अधिकतम सीमा 2,37500 प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी। 

यह भत्ता चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग के एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के राजकीय चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों को मिलेगा। प्रैक्टिस बंदी भत्ते की शर्तों को यथावत् रखे जाने का निर्णय लिया गया है। भत्ते की दरें भारत सरकार के समान रखी गई हैं। इसका फायदा सभी सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों को मिलेगा।

पीजीआई के रेजीडेंट डॉक्टरों को एम्स के समान भत्ते

प्रदेश कैबिनेट ने संजय गांधी पीजीआई के रेजीडेंट डॉक्टरों और सीनियर डिमांस्ट्रेटर को 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार एम्स दिल्ली के भत्ते देने को मंजूरी दे दी है। एसजीपीजीआई में इस समय सीनियर रेजीडेंट के 302 पद, जूनियर रेजीडेंट के 77 पद और डिमांस्ट्रेटर के सात पद हैं। 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार भत्ते देने से 33.91 लाख रुपये अतिरिक्त वार्षिक खर्च होने की संभावना है। ये भत्ते 1 जुलाई 2017 से देने के लिए प्रस्तावित थे।

सरकारी डॉक्टरों को केंद्र के समान प्रैक्टिस बंदी भत्ता
सरकारी एलोपैथिक डॉक्टरों और डेंटिस्ट को प्रैक्टिस बंदी भत्ता केंद्र के समान मिलेगा। शुक्रवार देर रात हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। भत्ते की पुनीक्षित दर जनवरी 2019 से लागू की जाएगी। डॉक्टर लंबे समय से सातवें वेतनमान के अनुसार नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) देने की मांग कर रहे थे। अभी सरकारी डॉक्टरों को छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एनपीए दिया जा रहा है।

प्रदेश सरकार के अनुसार 24 अगस्त 2009 से लागू दर के अनुसार डॉक्टरों को मूल वेतन का 25 फीसदी इस शर्त के साथ मिलता था कि भत्ते और मूल वेतन की अधिकतम सीमा 85 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी। कैबिनेट से मंजूर नई दर में मूल वेतन का 20 फीसदी इस शर्त के साथ दिया जाएगा कि भत्ते का योग और अधिकतम सीमा 2,37500 प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी। यह भत्ता चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग के एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के राजकीय चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों को मिलेगा। प्रैक्टिस बंदी भत्ते की शर्तों को यथावत् रखे जाने का निर्णय लिया गया है। भत्ते की दरें भारत सरकार के समान रखी गई हैं। इसका फायदा सभी सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों को मिलेगा।

सेवानिवृत्त संस्कृत शिक्षक भी पढ़ा सकेंगे
संस्कृत विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षक भी मानेदय पर पढ़ा सकेंगे। प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को इसकी अनुमति दे दी। उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थाओं के प्रधानों, अध्यापकों व संस्थाओं के अन्य कर्मचारी की नियुक्ति तथा सेवा शर्ते) (द्वितीय संसोधन) विनियमावली-2018 के अनुसार संस्कृत अध्यापकों का चयन उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से कराए जाने का प्रावधान है। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों की उपलब्धता में समय लग सकता है। इस लिए अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों (प्रथमा से उत्तर मध्यमा) में रिक्त अध्यापकों के पदों पर सेवानिवृत्त अध्यापकों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर शिक्षण के लिए रखने के प्रस्ताव को मंजूर दी गई है।

केंद्र सरकार के बाद राज्य सरकार ने भी आशा कार्यकत्रियों की बढ़ाई प्रतिपूर्ति राशि

केंद्र सरकार के बाद अब प्रदेश सरकार ने भी आशा कार्यकत्रियों की प्रतिपूर्ति में बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया है। शुक्रवार देर रात हुई मंत्रि परिषद की बैठक में राज्य सरकार द्वारा मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन और बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने पर मिलेगा 750 रुपये अधिक देने का निर्णय लिया गया। इससे पहले केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष 16 अक्तूबर को पांच गतिविधियों के लिए काम करने पर 1000 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई थी। 

अब राज्य सरकार ने चार गतिविधियों ) मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन और बाल स्वास्थ्य) में काम करने पर प्रतिपूर्ति राशि में 750 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। इसके अतिरिक्त आशा संगनियों को भी उनके कार्य के आधार पर प्रतिमाह 750 रुपये अधिक प्रतिपूर्ति दिए जाने का निर्णय लिया है। यह प्रतिपूर्ति राशि प्रतिमाह 15 से अधिक आशाओं का सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने पर आशा संगनियों को दी जाएगी।

मालूम हो कि आशा एक मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकत्री हैं, जो समाज को स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जागरुक करती हैं। मौजूदा समय में प्रदेश में 159307 आशा कत्रियों के सापेक्ष 149327 आशा कार्यकत्री कार्यरत हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में इनकी संख्या 8036 के मुकाबले 6233 है। वहीं 8013 आशा संगनियों के सापेक्ष 6405 कार्यरत हैं, जिन्हें सरकार के इस निर्णय का लाभ होगा।

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के संशोधन का प्रस्ताव मंजूर
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 में संशोधन के प्रस्ताव को योगी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस संहिता की धारा 77 में किए गए संशोधन से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना, डेडीकेट फ्रंट कारिडोर परियोजना, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए आरक्षित श्रेणी की जमीनों के पुनर्ग्रहण और विनिमय में आसानी होगी।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि धारा 80 में संशोधन से कृषि भूमि के औद्यौगिक, वाणिज्यिक एवं आवासीय प्रयोजनों के लिए भू उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया आसान हो सकेगी। इसके अलावा 89(3) में संशोधन से निर्धारित सीमा से अधिक भूमि के संक्रमण के लिए अनुमति की प्रक्रिया आसान होगी। इससे औद्योगीकरण और प्रदेश के विकास की गति तेज हो सकेगी। 
धारा 94 व धारा 95 में संशोधन से कृषि योग्य भूमियों के पट्टे पर दिए जाने से कृषि को बढ़ावा मिल सकेगा। इसके अलावा सौर उर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि पट्टे पर उपलब्ध हो सकेगी। जिससे प्रदेश में विद्युत उत्पादन में वृद्घि संभव हो सकेगी। इसी तरह धारा 108 व धारा 110 में किए गए संशोधन से पैतृक भूमि में मृतक पुत्र के अविवाहित पुत्रियों को अधिकार मिल सकेगा।

बलिया में श्रीराम घाट सेतु की पुनरीक्षित लागत को मंजूरी 

बलिया में एनएच-31 से शिवपुर दियर नंबरी मार्ग पर श्रीराम घाट पर गंगा नदी सेतु की पुनरीक्षित लागत को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। यह सेतु परियोजना वर्ष 2014 में मंजूर की गई थी। तब से इसकी लागत बढ़ गई है। परियोजना की पुनरीक्षित लागत 630.29 करोड़ रुपये जारी की गई, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। नियमानुसार जीएसटी इससे अलग होगा।

पुखरायां-घाटमपुर-बिंदकी राज्य राजमार्ग के लिए आरएफपी को मंजूरी
पुखरायां-घाटमपुर-बिंदकरी राज्य राजमार्ग संख्या-46 का निर्माण सावर्जनिक-निजी-सहभागिता से कराने के लिए निजी विकासकर्ता के चयन के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी)को मंजूरी दे दी गई है। वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (उपशा) ने इस सड़क को फोरलेन विद पेव्ड शोल्डर करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया था। परियोजना की लागत 1136.45 करोड़ रुपये है।

 कुल लंबाई 82.530 किलोमीटर है। वर्तमान में यह सड़क टू लेन विद पेव्ड शोल्डर है। यह मार्ग कानपुर देहात, कानपुर और फतेहपुर जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरता है। इतना ही नहीं तीन राष्ट्रीय मार्गों-एनएच-2, एनएच-25 और एनएच-86 को क्रॉस करता है। परियोजना में तीन रेलवे ओवरब्रिज और एक फ्लाईओवर बनाया जाना प्रस्तावित है। इस सड़क के लिए निजी विकासकर्ता के चयन के लिए आरएफपी, फिजिबिलिटी रिपोर्ट और ड्राफ्ट कंसेशन एग्रीमेंट के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है।

उत्तर प्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना के सेकेंड फेज को मंजूरी
विश्व बैंक की सहायता से चलाई जा रही उत्तर प्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना के दूसरे चरण को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। 2835 करोड़ रुपये की यह परियोजना अक्टूबर 2020 तक पूरी की जाएगी। इससे 1.62 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षेत्र में वृद्धि होगी। करीब 7.17 लाख किसान लाभान्वित होंगे। लागत का 70 प्रतिशत व्यय भार विश्व बैंक और 30 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। निचली गंगा नहर की जल प्रवाह क्षमता बढ़कर 8900 क्यूसेक हो जाएगी।

नरेंद्र देव कृषि विवि के नाम में जुड़ा ‘आचार्य’
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम-1958 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, फैजाबाद का नाम अब आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या होगा। इसके साथ ही ‘अध्यापक’ की परिभाषा में परिवर्तन करने और कुलपति पद पर नियुक्ति के लिए तीन नामों का पैनल नामित करने के लिए मौजूदा समिति में बदलाव के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में सातवां वेतनमान लागू
कैबिनेट ने प्रदेश के चार राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में सातवां वेतनमान दिए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। कानपुर, फैजाबाद, मेरठ और बांदा के राज्य कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व समकक्षीय संवर्ग के लिए सातवें वेतनमान की संस्तुतियां 1 जनवरी 2016 से लागू की जाएंगी। 

एक फरवरी 2019 से पुनरीक्षित वेतनमान का नकद भुगतान किया जाएगा। सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू किए जाने के परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2019 तक के 50 प्रतिशत अनुमानित व्यय-भार की राशि 24.02 करोड़ रुपये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा वहन किया जाएगा। प्रदेश सरकार के इस फैसले से एक हजार से ज्यादा शिक्षक व कार्मिक लाभान्वित होंगे।

ग्राम प्रहरी का मानदेय बढ़ा
राज्य सरकार ने ग्राम प्रहरियों के मानदेय व अन्य सुविधाएं निर्धारित कर दी हैं। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार के मुताबिक इन्हें 1500 रुपये के स्थान पर अब 2500 रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिलेगा। ग्राम प्रहरी को चार सेल की एक टार्च के लिए (रुपये 320 प्रतिमाह) व चार सेल के लिए 60 प्रतिमाह मिलेगा। उनको दस वर्षों में एक सारइकल (प्रति साइकिल 3000 रुपये) प्रदान की जाएगी। इसके अलावा साइकिल की देखरेख के लिए 600 रुपये का प्रति वर्ष भत्ता मिलेगा। इसके अलावा वर्दी, कोट, जर्सी, धोती, बेल्ट क्लास्प, चमड़े का पेटी और जूता अलग से दिया जाएगा।
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