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UP: उदित राज बोले, मायावती के 'दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और लालच' के बावजूद बसपा की 'राजनीतिक ताकत बरकरार'

Tue, 18 Feb 2025 01:53 PM IST
ishwar ashish पीटीआई, लखनऊ
पीटीआई, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 18 Feb 2025 01:53 PM IST
सार

पूर्व सांसद उदित राज ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक आंदोलन का गला घोंटा है। अब उनका गला घोंटने का समय आ गया है।

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BSP's 'political strength remained intact' despite Mayawati's 'misbehaviour, corruption and greed says Uditraj
पूर्व सांसद उदित राज व बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

विस्तार

पूर्व सांसद उदित राज ने बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और लालच के बावजूद उनकी राजनीतिक ताकत लंबे समय तक बरकरार रही। उन्होंने यह भी कहा कि मायावती ने सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया है और अब मायावती का गला घोंटने का समय आ गया है।

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सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से उदित राज ने कहा, महाभारत के युद्ध के दौरान जब अर्जुन ने भगवान कृष्ण से पूछा कि वह अपने ही रिश्तेदारों को कैसे मारेंगे, तो भगवान कृष्ण ने कहा कि कोई रिश्तेदार नहीं होते और उन्हें (अर्जुन को) न्याय के लिए लड़ना है। आज मेरे कृष्ण ने मुझसे कहा है कि पहले अपने दुश्मन को मारो। सामाजिक न्याय की दुश्मन मायावती ने सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया और अब उनका गला घोंटने का समय आ गया है।
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उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय आज उसी दौर से गुजर रहा है, जिस दौर में कभी दलित बुरी स्थिति में थे। 1980 के दशक के बाद कांशीराम जी ने उत्तर प्रदेश में बहुजन जागृति की शुरुआत की, जो 2000 के दशक में अपने चरम पर पहुंच गई। भले ही आंदोलन की परिणति राजनीति में हुई, लेकिन सोच और आधार सामाजिक न्याय रहा है। अन्य राजनीतिक दल राजनीति से शुरू होते हैं और उसी पर खत्म होते हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी के साथ ऐसा नहीं था।
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उन्होंने मायावती पर हमला करते हुए कहा कि मायावती की क्रूरता और अक्षमता के बावजूद कार्यकर्ता और मतदाता लड़ते रहे। कार्यकर्ताओं के घर बिक गए, उनके बच्चों को शिक्षा नहीं मिल सकी और उनके साथ क्रूर व्यवहार किया गया, फिर भी वे बहुजन राज लाने के लिए संघर्ष करते रहे। फुले, शाहू, अंबेडकर को मानने वाले लाखों कार्यकर्ता निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। कुछ ने अपने स्तर पर छोटे संगठन स्थापित किए हैं लेकिन उनकी सोच खत्म नहीं हुई है।

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