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Mayawati: मायावती की कर्मभूमि पर पहुंचे आकाश आनंद, बोले- बहन जी के आदर्शों पर चलकर आगे बढूंगा
Fri, 26 Apr 2024 05:59 PM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबेडकरनगर
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 26 Apr 2024 05:59 PM IST
सार
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद शुक्रवार को मायावती की कर्मभूमि रहे अंबेडकरनगर पहुंचे रैली को संबोधित किया। उन्होंने जय भीम के उद्घोष के साथ अपने भाषण की शुरुआत की।
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अंबेडकरनगर में बसपा के संयोजक आकाश आनंद।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद शुक्रवार को मायावती की कर्मभूमि रहे अंबेडकरनगर पहुंचे रैली को संबोधित किया। जिले के शिवबाबा मैदान पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बहन जी ने अपना जीवन आदर्शों के रास्ते पर चलकर बसपा मूवमेंट को आगे बढ़ाया है। उन्होंने जनता को नई राजनीतिक शक्ति दी है। मैं उनके पदचिन्हों पर चलकर आगे बढ़ूंगा। दुश्मन साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपनाएगा। आकाश ने जय भीम के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। यहीं से वह प्रदेश और देश की सियासत में चमकीं।
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बसपा ने फिर से चला मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव
बसपा ने जिस कमर हयात को लोकसभा का टिकट थमाया है वह पार्टी में लंबे समय से सक्रिय हैं। जिले में उनकी पहचान सरल छवि के नेताओं में है। पार्टी ने पहले जिन कलामशाह को टिकट दिया था उनके सामने जिले में पहचान का संकट था, लेकिन कमर हयात के साथ ऐसा नहीं है। सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में वे किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
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लड़ चुके हैं विधानसभा चुनाव
वर्ष 2002 में बसपा के टिकट से जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। तब राकेश पांडेय विजयी हुए थे। कमर हयात 47,524 मत के साथ दूसरे स्थान पर रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने कई बार के विधायक रहे भाजपा प्रत्याशी शेरबहादुर सिंह को लगभग चार हजार मतों से पीछे छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन 2007 में बसपा के समर्थन से चुनाव लड़कर जलालपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष चुन लिए गए।
पांच वर्ष बाद फिर हुए नगर परिषद के चुनाव में उन्हें पराजित कर सपा के अबुल बशर अंसारी नगर परिषद अध्यक्ष बन गए। वर्ष 2017 के चुनाव में सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई। इस बार कमर हयात की पत्नी फरजाना खातून बसपा के समर्थन से अध्यक्ष बन गईं। हालांकि इसके बाद हुए चुनाव में अबुल बशर अंसारी की पत्नी खुर्शीद जहां जीतकर अध्यक्ष बनीं तो फरजाना को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद अब कमर हयात बतौर बसपा प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।