केंद्र व यूपी सरकार पर मायावती का हमला, बोलीं- प्रदेश में एक बार फिर शुरू हो गया छलावा अभियान
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लॉकडाउन के बीच दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश लौटे श्रमिकों को प्रदेश में ही रोजगार दिलाने के लिए योगी सरकार तमाम योजनाएं बना रही है। इसे लेकर रविवार को बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
मायावती ने ट्वीट कर सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि चीन छोड़कर भारत आने वाली कंपनियों की प्रतीक्षा के बजाए केंद्र व यूपी सरकार को अपने बूते आत्मनिर्भर बनने का प्रयास शुरू करना चाहिए, क्योंकि शेनजेन इकोनोमिक जोन जैसी सड़क, पानी, बिजली आदि की फ्री आधारभूत सुविधा व श्रमिकों को कार्यस्थल के पास रहने की व्यवस्था आदि यहां कहां है।
4. अच्छा होता सरकार नया एमओयू करने व फोटो छपवाने से पहले यह बताती कि पिछले वर्षों में साइन किए गए इसी प्रकार के अनेकों एमओयू का क्या हुआ? एमओयू केवल जनता को वरगलाने व फोटो के लिए नहीं हो तो बेहतर है क्योंकि लाखों श्रमिकों को जीने के लिए लोकल स्तर पर रोजगार की प्रतीक्षा है। 4/4
विज्ञापन विज्ञापन— Mayawati (@Mayawati) May 31, 2020
लेकिन चीन के शेनजेन स्पेशल इकोनोमिक जोन जैसी सुविधाएं भारतीय उद्यमियों को देकर उनका सदुपयोग उत्कृष्ट वस्तुओं के उत्पादन के लिए सुनिश्चित किया जाए तो लॉकडाउन में उजड़े छोटे व मझोले उद्योग, पीड़ित श्रमिक वर्ग का हित व कल्याण और भारत को सही मायने में आत्मनिर्भर बनाना थोड़ा आसान हो जाएगा।
मायावती ने लिखा कि लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी व बदहाली में घर लौटे सर्वसमाज के लाखों श्रमिकों को जरूरी प्रभावी मदद पहुंचाने के बजाय यूपी में एमओयू हस्ताक्षर व घोषणाओं आदि द्वारा छलावा अभियान एक बार फिर शुरू हो गया है।
1.चीन छोड़कर भारत आने वाली कम्पनियों की प्रतीक्षा के बजाए केन्द्र व यूपी सरकार को अपने बूते आत्मनिर्भर बनने का प्रयास शुरू करना चाहिए क्योंकि शेनजेन इकोनोमिक जोन जैसी सड़क, पानी, बिजली आदि की फ्री आधारभूत सुविधा व श्रमिकों को कार्यस्थल के पास रहने की व्यवस्था आदि यहाँ कहाँ है।1/4
— Mayawati (@Mayawati) May 31, 2020
यह अति-दुःखद है। जनहित के ठोस उपायों के बिना समस्या और विक्राल बन जाएगी। उन्होंने लिखा कि अच्छा होता अगर सरकार नया एमओयू करने व फोटो छपवाने से पहले यह बताती कि पिछले वर्षों में साइन किए गए इसी प्रकार के अनेकों एमओयू का क्या हुआ?
एमओयू केवल जनता को बरगलाने व फोटो के लिए नहीं हो तो बेहतर है, क्योंकि लाखों श्रमिकों को जीने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की प्रतीक्षा है।