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Breastfeeding Week : स्तनपान कराने में ग्रामीण महिलाएं आगे, एनएफएचएस रिपोर्ट ने दिखाई यूपी की तस्वीर
Mon, 01 Aug 2022 10:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 01 Aug 2022 10:59 AM IST
सार
Breastfeeding : यही वजह है कि ग्रामीण इलाके के बच्चों की इम्युनिटी शहरी से बेहतर पाई जाती है। वहीं, प्रदेश में पांच साल पहले कुल स्तनपान की दर 95.75 फीसदी थी, जो अब घटकर 94.60 फीसदी पर आ गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं नवजात को स्तनपान कराने में शहरी महिलाओं से आगे हैं। यही वजह है कि ग्रामीण इलाके के बच्चों की इम्युनिटी शहरी से बेहतर पाई जाती है। वहीं, प्रदेश में पांच साल पहले कुल स्तनपान की दर 95.75 फीसदी थी, जो अब घटकर 94.60 फीसदी पर आ गई है।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के शहरी इलाकों में नवजात को स्तनपान कराने की दर 94.4 फीसदी और ग्रामीण में 94.8 फीसदी है। नवजात के जन्म लेने के दिन स्तनपान कराने की दर देखें तो एनएफएचएस-4 (2015-16) में शहरी इलाके में 64.9 फीसदी और ग्रामीण इलाके में 68.1 फीसदी थी। यह एनएफएचएस-5 (2019-21) में बढ़कर शहरी इलाकों में 75.5 फीसदी और ग्रामीण इलाके में 82.3 फीसदी पहुंच गई।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्तनपान के लिए चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों के बाद पांच साल में शहरी इलाके की दर में 10.6 फीसदी तो ग्रामीण में 14.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, धर्म के आधार पर देखें तो हिंदुओं में बच्चों के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने की दर 25.9 फीसदी और मुस्लिम में 23.4 फीसदी थी, जो एनएफएचएस-5 में हिंदुओं में 23.3 फीसदी और मुस्लिमों में 26.7 फीसदी हो गई।
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5 फीसदी बच्चों को नहीं मिल पाता मां का दूध
करीब 5.40 फीसदी बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पाता है। इन बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने पर राजधानी लखनऊ में तो मदर मिल्क बैंक से दूध उपलब्ध कराया जाता है, जबकि ग्रामीण इलाके के बच्चे दूसरे वैकल्पिक साधनों के लिए विवश हैं। केजीएमयू की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोना बजाज का कहना है कि प्रसव के बाद कुछ महिलाओं की हालत गंभीर हो जाती हैं। कुछ दम तोड़ देती हैं। ऐसे में इनके नवजात को मदर मिल्क बैंक से दूध लेकर पिलाया जाता है। वह बताती हैं कि बच्चे दूध पीने लगते हैं तो मां का दूध अपने आप बनने लगता है। प्रयास होना चाहिए कि जन्म के घंटे भर के अंदर नवजात को मां का दूध मिल जाए।
अमृत के समान होता है मां का दूध
लोहिया संस्थान के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके यादव का कहना है कि जन्म के एक घंटे के अंदर मां का पीला गाढ़ा दूध बच्चे को मिल जाए तो वह उसके लिए अमृत समान होता है। यह दूध इम्युनिटी बढ़ाता है और कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। यह शारीरिक विकास ही नहीं बल्कि मानसिक विकास में भी योगदान देता है। छह माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना चाहिए।
घंटे भर के का ग्राफ बढ़ाने की जरूरत
एनएफएचएस-4 में जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर शहरी इलाके में 21.5 फीसदी और ग्रामीण में 26.4 फीसदी थी, जो एनएफएचएस-5 में शहरी इलाके में 24.2 और ग्रामीण में 23.8 फीसदी रही। इस तरह देखा जाए तो घंटे भर के अंदर स्तनपान की दर शहरी इलाके में बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण इलाके में कम हुई है। अब स्वास्थ्य विभाग की रणनीति है कि ग्रामीण इलाके में भी इस दर को बढ़ाया जाए।
मां-शिशु दोनों के लिए जरूरी
यूनिसेफ के पोषण अधिकारी डॉ. रविश शर्मा का कहना है कि स्तनपान मां-शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है। शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए स्तनपान को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन डब्बाबंद व बोतल के दूध स्तनपान के फायदे से बच्चों को वंचित कर रहे हैं।