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पढ़ाई से खुलेंगे तरक्की के रास्ते
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 20 Sep 2014 01:31 PM IST
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वरिष्ठ नागरिकों को अगर किताबें पढ़ने के लिए लाइब्रेरी तक जाना पड़ेगा तो वे ऐसा करने से बचेंगे। चूंकि, वहां जाना और किताब लाना उनके लिए मुश्किल भरा होगा।
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इसलिए जरूरत है एक ऐसी होम डिलीवरी चेन की, जहां ईमेल से भेजे गए ऑर्डर पर न केवल तय समय पर पुस्तक पहुंचाए, बल्कि उन्हें वापस भी ले जाने की सुविधा हो।
उन्होंने कहा कि स्पर्धा के युग में जो पढ़ेगा, वही बचेगा। बातें प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मोतीमहल लॉन में शुक्रवार को 12वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के शुभारंभ पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
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उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसी सुविधाएं नागरिकों को दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि ई-बुक लैंडिंग का संकल्प लें, ताकि पुस्तक मेले के उद्देश्य को पूरा करने में मदद मिल सके।
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उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति पैदा करने में किताबों व भाषा का अहम रोल होता है। वफादारी में भी किताबों का कोई जवाब नहीं। जरूरत है कि किताबों की गुणवत्ता व पाठकों की रुचि का विशेष ध्यान रखा जाए। टीवी व इंटरनेट पुस्तकों की जगह नहीं ले सकती।
पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने पहले पुस्तक मेले का उद्घाटन किया था। आज उनका लगाया पौधा बड़ा हो गया है। इससे पूर्व उन्होंने फीता काटकर दस दिवसीय मेले का उद्घाटन किया।
विशिष्ट अतिथि महापौर दिनेश शर्मा ने कहा कि लेखक की आयु व समय सीमा नहीं होती। किताबें जीवंतता व गति प्रदान करती हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय युवा आयोग के गठन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भी कहा था कि हमें अपने पूर्वजों की लिखी हुईं किताबों को जरूर पढ़ना चाहिए।
द फेडरेशन ऑफ पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स एसोसिएशन इन इंडिया के एससी सेठी ने कहा कि कोलकाता बुक फेयर के लिए आयोजकों को एक रुपये प्रतिवर्ग फुट के हिसाब से किराया देना पड़ता है।
ऐसे ही श्रीनगर में मेले के लिए सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। उन्होंने आग्रह किया कि मेले के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराए, जिस पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि सरकारी जमीन पर वह सीएम को लिख सकते हैं। महापालिका की जमीन का बंदोबस्त महापौर कर सकते हैं।