रामनवमी से पहले तैयार हो जाएगा राममंदिर का ब्लूप्रिंट, रामलला को शिफ्ट करने के लिए अनुमति जरूरी
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वर्ष 1989 में रामजन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के शिलान्यास की पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर चौपाल ने कहा कि अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण को लेकर जब तक रणनीति ही तय नहीं हो जाती कुछ कहना मुश्किल है। मंदिर निर्माण शुरू होने से पहले रणनीति बनाने का काम किया जा रहा है।
अयोध्या में राममंदिर निर्माण एक बड़ा काम है। सभी तकनीकी पहलू सुलझाने के बाद समिति अंतिम रूप से मंदिर निर्माण के लिए कदम उठाएगी। उम्मीद है कि रामनवमी से पहले राममंदिर का ब्लूप्रिंट तैयार हो जाएगा। राममंदिर के लिए मास्टर प्लान बनेगा।
रामलला को अस्थाई गर्भगृह में शिफ्ट करने पर कहा कि इससे पहले सुरक्षा की अनुमति लेनी होगी। सुरक्षा बिंदुओं पर विचार होने के बाद ही कुछ होगा। परिसर की मिट्टी जांच भी की जाएगी। इसके लिए आर्किटेक्टों की टीम बुलाई गई है। ये टीम जब अपनी रिपोर्ट सौंप देगी तब ट्रस्ट की अगली बैठक होगी।
जूट के गद्दों के बीच परिसर तक जाएंगी शिलाएं
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सवाल उठाया कि तराशी गई शिलाएं रामलला परिसर में कैसे जाएंगी। चंपत राय ने बताया कि जूट के एक फिट मोटे गद्दे बनाने पड़ेंगे, जिसे शिला के चारों तरफ रखकर उसके अगल-बगल और ऊपर दूसरी शिलाएं रखी जाएंगी ताकि कहीं कोई डिजाइन में टूट-फूट न हो।
उन्होंने बताया कि शिलाओं को क्रेन से उठाकर लादने में भी रस्सी या लोहे के जंजीर का प्रयोग नहीं होगा। बल्कि शिलाओं को बड़े टायरों में फंसाकर उठाया जाएगा और इसी तरह उतारा जाएगा।