'मोदी की काशी' में भाजपाई ही दे रहे हैं पार्टी को चुनौती
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भाजपा में प्रत्याशियों के चयन को लेकर चल रही बगावत थामने की कोशिशें नाकाम दिख रही हैं। यही स्थिति रही तो सूबे की बहुत सी सीटों पर पार्टी को न सिर्फ विरोधियों से ही बल्कि अपनों से भी जंग लड़नी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और महंत आदित्यनाथ के प्रभाव वाले गोरखपुर क्षेत्र में स्थिति विस्फोटक है। इसकी ताप दोनों क्षेत्रों की 140 सीटों पर महसूस की जा रही है।
पिछले दिनों वाराणसी में पार्टी के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर व अध्यक्ष केशव मौर्य के सामने ही कार्यकर्ताओं ने बवाल किया। कहा जा रहा है कि जल्द डैमेज कंट्रोल की पहल नहीं हुई तो 40 से 60 सीटों पर उम्मीद्वारों को अपनों से जंग लड़नी पड़ेगी।
लगातार हो रहा है बवाल
वाराणसी की आठ में से चार सीटों पर प्रत्याशियों के चयन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शहर दक्षिणी से सात बार विधायक रहे श्यामदेव राय चौधरी ‘दादा’ का टिकट काटकर नीलकंठ तिवारी के साथ वाराणसी कैंट की विधायक रहीं ज्योत्सना श्रीवास्तव के पुत्र सौरभ श्रीवास्तव और रोहनिया से सुरेंद्र नारायण को टिकट देने के खिलाफ भाजपा के ही पुराने लोग लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
शहर उत्तरी के विधायक व प्रत्याशी रविंद्र जायसवाल के खिलाफ गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी रहे सुजीत सिंह टीका ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में उतरने का एलान किया है।
हालांकि केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा व डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने मंगलवार को वाराणसी पहुंचकर दादा समेत अन्य असंतुष्टों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन कोई पीछे हटने को तैयार नहीं।