यूपी में मोदी के सहारे ही सत्ता तक पहुंचेगी भाजपा, प्लान तैयार
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भाजपा यूपी में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के बजाय मोदी के नाम पर ही चुनावी मैदान में उतरेगी। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति ने इस पर मुहर लगा दी है। इससे यह लगभग साफ हो गया है कि बसपा, सपा और कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के चेहरों के सामने पीएम नरेंद्र मोदी ही भाजपा के खेवनहार होंगे।
भाजपा के रणनीतिकारों को पूरा भरोसा है कि हर बूथ तक उसकी पहुंच और पिछले दिनों चलाए गए जन अभियान उसके विजय रथ को मंजिल तक पहुंचाएंगे। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साफ छवि का युवा चेहरा घोषित करके पार्टी ज्यादा फायदे में रह सकती है।
राष्ट्रीय कार्यसमिति के दो दिवसीय अधिवेशन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव मौर्य ने साल भर के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड रखा। सदस्यों के बीच यूपी चुनाव को लेकर दो बिंदुओं पर विशेष मंथन हुआ। पहला, पार्टी किसी चेहरे को आगे करे या नहीं और दूसरा, हकीकत में भाजपा कितनी सीटें जीत पाएगी।
इन बातों ने बढ़ाया भाजपा का आत्मविश्वास
सूत्रों के अनुसार, भाजपा हाईकमान महाराष्ट्र और हरियाणा की तर्ज पर किसी को भी सीएम पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करने के पक्ष में है। उसका मानना है कि प्रदेश के सभी 1 लाख 47 हजार 148 बूथों तक भाजपा का संगठन है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हर बूथ प्रभारी से सीधे मोबाइल पर बात कर चुके हैं। पार्टी के महिला, युवा व पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों की सफलता, परिवर्तन यात्राओं में उमड़ी भीड़ और दो जनवरी को लखनऊ में पीएम की रैली में आए जन सैलाब से यह साबित हो गया है कि भाजपा के पास बूथ स्तर तक मजबूत संगठन है।
ऐसे में किसी एक चेहरे को सामने लाने से लाभ तो नहीं होगा, उल्टे नुकसान होने की ज्यादा आशंका है। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश भी देना चाहती है कि उसका काम व्यक्ति केंद्रित नहीं, बल्कि संगठन केंद्रित है।
यानी भाजपा मायावती, अखिलेश और शीला दीक्षित के मुकाबिल मोदी और उनकी सरकार के कामकाज को आगे रखकर ही चुनाव लड़ेगी।
प्रत्याशी घोषित होने पर ही पता चलेगी सीटों की संख्या
कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं से अनौपचारिक तौर पर यह भी पूछा गया कि उन्हें कितनी सीटें जीतने की उम्मीद है। बताते हैं कि सभी ने एक ही जवाब दिया कि पहले प्रत्याशी घोषित करो, उसके बाद ही सही स्थिति का आकलन किया जा सकता है। अभी कोई जवाब देना हवा-हवाई ही होगा।
भाजपा के लिए नुकसानदेह है चेहरा सामने न लाना
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एसके द्विवेदी मानते हैं कि मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करके भाजपा चुनाव में ज्यादा फायदा ले सकती थी। उसके पास साफ-सुथरी छवि के युवा नेता भी हैं। पर, लगता है कि फिलहाल पार्टी नेतृत्व बुजुर्ग नेताओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता।
प्रो. द्विवेदी कहते हैं, जिस राज्य में अखिलेश यादव जैसी साफ-सुथरी छवि वाले और अपने विकास कार्य को आगे रखकर चुनाव लड़ने वाले नेता हों, वहां लोग यही चाहते हैं कि अन्य पार्टियां भी अपना चेहरा सामने लाएं ताकि उन्हें चयन में आसानी हो।
सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर अब भी नहीं हुई देरी
उनका कहना है कि सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने में अब भी ज्यादा देर नहीं हुई है। अन्यथा, भाजपा के लिए अपना फैसला नुकसानदेह साबित होगा।
इस पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता हृदय नारायण दीक्षित का कहना है कि भाजपा जनता के बीच बारहों महीने सक्रिय रहने वाली पार्टी है। हमारा अभियान न तो प्रत्याशी आधारित होता है और न ही व्यक्ति केंद्रित। रही बात, सीएम पद का चेहरा घोषित करने या न करने की तो पार्टी हाईकमान बहुत सोच-विचार कर सदैव उचित निर्णय करता है।