भगवा सेना में इस तरह तय होगा छोटों का कद व पद
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भाजपा ने अपने सांगठनिक ढांचे के गठन का फॉर्मूला बदल दिया है। पार्टी की इकाइयां अब ऊपर वालों की सहमति व सुझाव से गठित की जाएंगी। नीचे की इकाइयों में किसे क्या पद दिया जाए और उसका कद कैसा रखा जाए, इसका फैसला भी ऊपर के नेता ही करेंगे।
भाजपा में इसे तदर्थवाद के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। पर, पार्टी नेता इसे तदर्थवाद न मानकर संगठन के विभिन्न फोरम के बीच समन्वय व सामंजस्य का फॉर्मूला बता रहे हैं।
नए फॉर्मूले के अनुसार जिस इकाई का गठन होना है, पहले वहां व्यापक विचार-विमर्श के बाद कार्यकर्ताओं की भूमिका तय की जाएगी। विकल्प के रूप में नाम भी बताए जाएंगे।
कुल पदों की संख्या से 10 प्रतिशत ज्यादा नाम छांटकर संबंधित इकाई से ऊपर वाली इकाई को भेज दिए जाएंगे। वह इन नामों पर विचार-विमर्श करके अपनी सहमति व संस्तुति अपने से ऊपर की इकाई को भेजेगी। वहां फिर विचार-विमर्श के बाद कमेटी घोषित की जाएगी।
इस तरह बनेंगी कमेटियां
फॉर्मूले के अनुसार, मंडल व ब्लॉक कमेटियों में किस कार्यकर्ता को क्या जिम्मेदारी सौंपी जाएगी यह फैसला जिला पदाधिकारियों की सहमति से क्षेत्रीय कमेटियां करेंगी।
इसी तरह जिलों की कमेटियों में किसे कौन सी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, इसका फैसला क्षेत्रीय कमेटियों की सहमति से प्रदेश का संगठन करेगा। अभी तक इन समितियों का गठन स्थानीय स्तर पर ही हो जाता था।
किस कार्यकर्ता की क्या भूमिका रहेगी या किसे पद मिलेगा अथवा नहीं, इसमें भी बड़ों की कोई भूमिका नहीं रहती थी।
इसलिए बना नया फॉर्मूला
माना जाता है कि पिछले कुछ वर्षों में जिलों व मंडल की कमेटियों में पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर उठने वाले विवाद के बाद भाजपा के रणनीतिकारों ने यह फॉर्मूला बनाया है ताकि पद देने से पहले सभी की राय सामने आ जाए। साथ ही अगर कहीं कोई विवाद हो भी तो संगठन के गठन से पहले ही उसका निपटारा कर दिया जाए।