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संघ का फरमान, 'यंगिस्तान' संभाले भाजपा की कमान

Tue, 22 Jul 2014 10:20 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 22 Jul 2014 10:20 PM IST
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BJP old leaders to go on backfoot in UP

अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद युवा भाजपा एजेंडे को निचले स्तर तक जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है।

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बुजुर्गों को मार्गदर्शक की भूमिका सौंपकर युवा चेहरों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जाएगा। बुजुर्गों को वानप्रस्थ में भेजने का काम उत्तर प्रदेश में जिला व क्षेत्रीय कमेटियों से शुरू होगा।

पहले मोर्चा व प्रकोष्ठों में बदलाव होगा और उसके बाद मुख्य संगठन के कायाकल्प की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक, संघ चाहता है कि लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान भी लागू किया जाए।

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यही होगा विधानसभा चुनाव का फॉर्मूला

BJP old leaders to go on backfoot in UP

जिस तरह लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण और अन्य फैसलों में युवा चेहरों को तवज्जो दी गई, वैसा ही विधानसभा चुनाव में भी हो।

दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 2009 में संघ प्रमुख की भूमिका संभालने के साथ ही युवा एजेंडे पर चलने का संकेत दे दिया था।

उन्होंने कहा था कि विश्व में सबसे ज्यादा युवा हमारे देश में होने के कारण धीरे-धीरे इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती जाएगी।

सभी लोगों को इस बदलाव का स्वागत करना चाहिए और देश के निर्माण में युवाओं को भागीदारी देने के लिए बुजुर्गों को अब अपनी भूमिका तय कर लेनी चाहिए।

केंद्र का कामकाज भी कसौटी पर

BJP old leaders to go on backfoot in UP

संघ व भाजपा के शीर्ष नेता कई बार कह चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में मजबूत हुए बगैर देश में मजबूत नहीं हुआ जा सकता।

लोकसभा चुनाव में यूपी में दमदार समर्थन मिलने के बाद वे चाहते हैं कि इस जीत से बने माहौल के माध्यम से संगठनात्मक ढांचा भी दुरुस्त कर लिया जाए।

राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में तो मोदी के नाम पर बने माहौल से वोट मिल गया, पर विधानसभा चुनाव में केंद्र सरकार के कामकाज भी कसौटी पर होंगे।

ऐसे में केंद्र के कामकाज और उपलब्धियों को नीचे तक पहुंचाना होगा। साथ ही विरोधियों के दुष्प्रचार का भी मजबूती से जवाब देने की तैयारी करनी होगी। यह काम संगठन के मजबूत ढांचे के बगैर नहीं हो पाएगा।

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संघ ने माना, खत्म हुआ बुजुर्गों का वक्त

BJP old leaders to go on backfoot in UP

उत्तर प्रदेश भाजपा बड़े नेताओं में खींचतान और गुटबाजी के लिए जानी जाती है। कई नेता खुद ही मनचाही सीट से चुनाव लड़ने का दावा ठोककर मुश्किलें बढ़ा देते थे। मोदी ने चुनाव की कमान मिलने के बाद टिकट वितरण में कई बुजुर्ग नेताओं की भूमिका नगण्य कर दी।

संघ में वरिष्ठ पद संभाल चुके एक वरिष्ठ प्रचारक ने पिछले दिनों अनौपचारिक बातचीत में टिप्पणी की थी कि लालकृष्ण आडवाणी के रहते हुए नरेंद्र मोदी का राज्याभिषेक कराकर संघ बुजुर्गों की भूमिका की असली चुनौती से पार पा चुका है।

अब उसे भाजपा की मजबूती के लिए उत्तर प्रदेश में सिर्फ बुजुर्ग नेताओं का भार ही नहीं घटाना है बल्कि प्रदेश संगठन में गुटबाजी बढ़ाने वालों का हस्तक्षेप भी कम करना है। इसलिए आने वाले दिनों में यूपी भाजपा के कई नेताओं की भूमिका बदली जा सकती है। यह कवायद उसी का हिस्सा लगती है।

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