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नमो-नमो के लिए शुरू हुईं अजब-गजब 'डील'
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 01 Dec 2013 04:42 PM IST
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कुनबा बढ़ाने में भाजपा के सामने कई मुश्किलें आ खड़ी हुई हैं।
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किसी को पार्टी में लेने पर स्थानीय नेता व कार्यकर्ता विरोध पर अड़े हैं तो किसी को शामिल करने पर बड़े नेता एक राय नहीं हो पा रहे हैं।
कहीं-कहीं तो दिलचस्प स्थिति यह बन गई है कि पार्टी में शामिल होने वाले की तरफ से ही कुछ ऐसी शर्ते भाजपा के सामने रख दी जा रही हैं। जिन्हें पूरी करना पार्टी के लिए मुश्किल हो रहा है।
बृजभूषण के नाम से ही भूचाल
समाजवादी पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह अभी तकनीकी रूप से भाजपा में नहीं है। उनके बेटे प्रतीक भूषण ने भाजपा की सदस्यता ले ली है। पर, पार्टी में इसको लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। इस घमासान को देखते हुए पार्टी के रणनीतिकारों के सामने आगे की योजना पर काम करना मुश्किल हो गया है।
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सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेताओं ने सोची-समझी रणनीति के तहत बृजभूषण की जगह उनके लड़के को पार्टी में लिया था, जिससे तुरंत कोई ऐसी स्थिति न बन जाए जिसका पार्टी के मजबूती पर विपरीत प्रभाव पड़े।
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बृजभूषण को आगे तकनीकी रूप से पार्टी में लेने पर सहमति बनी थी। पर, अब कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते तरकीब पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इन लोगों को शामिल करने पर खींचतान
बसपा के एक एमएलसी आगे का राजनीतिक सफर भाजपा के साथ शुरू करना चाहते हैं। उनकी प्रारंभिक बातचीत भी हो चुकी है। बड़े नेताओं का आश्वासन व आशीर्वाद भी मिल चुका है। कानपुर रैली में भीड़ जुटाने को कई बसों की व्यवस्था भी की थी।
बसपा के ये एमएलसी भाजपा से इस बात की गारंटी चाहते हैं कि उन्हें उन्नाव से लोकसभा चुनाव में टिकट दिया जाए। पर, भाजपा के भीतर इन्हें शामिल करने को लेकर ही विरोध प्रारंभ हो गया है।
टिकट तो दूर उनकी भाजपा में इंट्री ही फंसी हुई है। भाजपा से ही पहले एमएलसी रह चुके वाराणसी के एक सज्जन दोबारा भाजपा में शामिल होना चाहते हैं।
पार्टी के कुछ बड़े नेता उन्हें पार्टी में लेना भी चाह रहे हैं लेकिन वाराणसी और आसपास के जिलों में हो रहा विरोध फिलहाल बाधा बना हआ है।
यह भी चाहते हैं भगवा चोला
बसपा से विधायक रह चुके वाराणसी के ही एक और सज्जन भाजपा में वापसी चाहते हैं। पर, इनकी इच्छा लोकसभा चुनाव में टिकट मिलने का आश्वासन पाने की भी है। भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता इनका भी विरोध कर रहे हैं। सुल्तानपुर के चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
पर, इनको लेकर शुरू हुआ विरोध अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। पश्चिम में बसपा से चुनाव लड़ चुके धर्मेन्द्र कश्यप पार्टी में आ चुके हैं।
पर, कश्यप को टिकट पर पार्टी में कम खींचतान नहीं है। बसपा से सांसद एक बाहुबली फिलहाल जेल में हैं। पर, भाजपा में प्रवेश की इनकी संभावनाएं समाप्त नहीं हुई हैं। पार्टी के नेताओं के बीच इस मुद्दे पर जबरदस्त खींचतान है।
शर्तों पर अटका मामला
भाजपा, कांग्रेस के एक प्रमुख नेता को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारकर उन्हें घेरना चाहती है। पर, कांग्रेस के इस नेता ने राहुल को घेरने की एवज में राज्यसभा सदस्यता की शर्त रख दी है। इस शर्त को पूूरी करना भाजपा के लिए काफी मुश्किल हो रहा है।
सुब्रह्मण्यम् स्वामी पार्टी समेत भाजपा में आ चुके हैं। पार्टी उन्हें रायबरेली में सोनिया गांधी के खिलाफ मैदान में उतारकर उन्हें घेरना चाहती है।
न्यायालय के जरिये कांग्रेस और केंद्र सरकार को घेरने वाले स्वामी सोनिया को चुनाव में घेरने को तैयार हैं। पर, स्वामी की इच्छा भी राज्यसभा की सदस्यता सुनिश्चित करने की है।
जानकारी के मुताबिक, मोदी की तारीफ करके बसपा से बाहर हो चुके हमीरपुर से सांसद विजय बहादुर भी भाजपा से टिकट की गारंटी चाहते हैं।
इन्हें चाहिए टिकट की गारंटी
हमीरपुर से ही अलग-अलग दलों से सांसद रह चुके एक अन्य नेता भी भाजपा में प्रवेश को दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। पर, वह टिकट का आश्वासन भी पाना चाहते हैं। नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से लोग भाजपा में आने को इच्छुक हैं। किसे लेना है या किसे नहीं लेना है, किसे लड़ाना है और किसे अन्य कोई भूमिका सौंपनी है।
यह सब पार्टी की रणनीति के लिहाज से तय होगा। पर, लोगों को शामिल करने पर दल के भीतर कोई खींचतान नहीं है। भाजपा वैसे भी सामूहिक नेतृत्व वाली पार्टी है। फैसले सभी की सहमति से होते हैं।