पंचायत चुनाव में सुस्ती दिखा रहे यूपी भाजपाइयों के पेंच कसे गए
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भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने पंचायत चुनाव की तैयारियों में सुस्ती पर प्रदेश के नेताओं के पेंच कसे हैं। उन्होंने जिला पंचायत वार्डों के सम्मेलन पूरे न होने पर भी नाराजगी जताई। माथुर शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर पंचायत चुनाव की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पार्टी उम्मीदवारों को लड़ाना और जिताना पदाधिकारियों, विधायकों और सांसदों की जिम्मेदारी है। बैठक में तय हुआ कि जिला पंचायत वार्डों के चुनाव के लिए प्रत्याशियों के पैनल बनाने का काम जिला समितियां ही करेंगी। जिला समितियां क्षेत्रीय चुनाव समिति को पैनल भेजेंगी। जो प्रत्याशियों का चयन करेंगी।
समिति भेजेगी तीन नामों का पैनल
वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवप्रताप शुक्ल ने बताया कि जिला समितियां तीन नामों का पैनल भेजेंगी। जिला चुनाव समिति में प्रदेश द्वारा नियुक्त एक कार्यकर्ता, जिला अध्यक्ष, पंचायत चुनाव की दृष्टि से घोषित पदाधिकारी, विधायक, सांसद और संबंधित जिले में रहने वाले क्षेत्रीय पदाधिकारी व प्रदेश पदाधिकारी रहेंगे।
क्षेत्रीय चुनाव समिति में क्षेत्रीय अध्यक्ष, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, क्षेत्रीय पंचायत चुनाव प्रभारी, क्षेत्रीय संयोजक पंचायत प्रकोष्ठ एवं उस क्षेत्र में रहने वाले प्रदेश पदाधिकारी रहेंगे।
बैठक में सामने आई सबसे बड़ी गड़बड़ी
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जिला पंचायतों के लगभग एक हजार वार्डों में सम्मेलन नहीं हो पाए हैं। 3128 वार्डों में 2112 वार्डों में ही सम्मेलन हुए हैं। प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने बचे हुए वार्डों में जल्द सम्मेलन पूरे कराने को कहा।
हर गांव में दस लोगों की टीम
माथुर ने चुनाव में सभी गांवों में पार्टी की पहुंच बनाने के लिए हर गांव में कम से कम दस नौजवानों की टीम बनाने के बारे में जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि ज्यादातर जगह टीमें बन गई हैं। इसमें संबंधित गांव के सभी समुदायों के युवकों का रखा गया है।
प्रदेश सरकार कर रही अनियमितता
प्रदेश उपाध्यक्ष शुक्ल ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव में प्रदेश सरकार अनियमितता कर रही है। सरकार ने जिस तरह पहले के आरक्षण को शून्य मानकर इस चुनाव के लिए आरक्षण किया, वह नियम विरुद्ध है।
इसके चलते पंचायतों में आरक्षण के चक्रानुक्रम नियमों का पालन नहीं हुआ। कहा, प्रधानों का कार्यकाल 7 नवंबर को पूरा हो रहा है। पर, प्रदेश सरकार ग्राम पंचायत के चुनाव न कराकर पहले जिला और क्षेत्र पंचायतों का चुनाव कराने जा रही है। यह चुनाव जनवरी और मार्च में होने चाहिए थे।
सरकार ने हर शासनादेश में दोनों चुनाव साथ कराने की बात कही थी। पर, अचानक 5 सितंबर को शासनादेश जारी कर डाला। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष हरद्वार दुबे, करन सिंह पटेल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल, प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह, स्वतंत्र देव सिंह व अन्य पदाधिकारी थे।