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भाजपा की भाषा स्तरहीन, धर्म-जाति के नाम पर डाल रही फूट: अखिलेश यादव
Fri, 24 Jan 2020 09:33 PM IST
Vikas Kumar
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 24 Jan 2020 09:33 PM IST
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
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समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं की भाषा निहायत स्तरहीन है। राजनीति में ऐसी गिरावट चिंताजनक है। भाजपा जाति-धर्म के नाम पर फूट डाल रही है और असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन पर जयंती पर उन्हें नमन किया।
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कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने हमेशा गरीबों, पिछड़ों के सम्मान व अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उनका बचपन घोर गरीबी में बीता। इस कारण वे विधायक और मंत्री रहते हुए अपना वेतन गरीबों के दुखदर्द में बांट देते थे। उन्होंने राजनीति में पिछड़ों को जगाने का काम किया। उनके रास्ते पर चलकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं। कहा, डॉ. लोहिया ने नारा दिया था, सोशलिस्टों ने बांधी गांठ-सौ में पावें पिछड़े साठ। कर्पूरी ठाकुर ने इसे पूरा करने का भरसक प्रयास किया। लेकिन आज भी पिछड़ों को अधूरा लाभ मिला है। यदि जनगणना में सही ढंग से जातियों की गणना हो जाए तो हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा समाप्त हो जाएगा। प्रत्येक समाज की भागीदारी भी तय हो जाएगी। लेकिन सरकार तो इसके आंकड़े सामने नहीं लाना चाहती है।
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उन्होंने कहा, कर्पूरी ठाकुर ने हमेशा गरीबों, पिछड़ों के सम्मान व अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उनका बचपन घोर गरीबी में बीता। इस कारण वे विधायक और मंत्री रहते हुए अपना वेतन गरीबों के दुखदर्द में बांट देते थे। उन्होंने राजनीति में पिछड़ों को जगाने का काम किया। उनके रास्ते पर चलकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं।
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कहा, डॉ. लोहिया ने नारा दिया था, सोशलिस्टों ने बांधी गांठ-सौ में पावें पिछड़े साठ। कर्पूरी ठाकुर ने इसे पूरा करने का भरसक प्रयास किया लेकिन आज भी पिछड़ों को अधूरा लाभ मिला है। यदि जनगणना में सही ढंग से जातियों की गणना हो जाए तो प्रत्येक समाज की भागीदारी भी तय हो जाएगी। लेकिन सरकार तो इसके आंकड़े सामने नहीं लाना चाहती है।
सभागार में मौजूद नौजवानों से मुखातिब होते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। कहा कि भाजपा नेताओं की भाषा में अहंकार झलकता है। डंके की चोट पर, बदला लेंगे, जबान खींच लेंगे, ठोक दो.... जैसी भाषा राजनीति की नहीं हो सकती। भाषा में ऐसी गिरावट चिंताजनक है। समाजवादी ऐसी भाषा नहीं बोलते हैं। हम बड़े अस्पताल, बड़े शिक्षा संस्थानों की बातें करते है। भाजपा सरकार में किसान, नौजवान, व्यापारी, छात्र सभी परेशान हैं। किसान का न तो कर्ज माफ हुआ और न ही उनकी आय दोगुनी हुई। किसान आत्महत्या करने को विवश हैं। नौजवान बेरोजगारी से त्रस्त हैं। सबको अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। देश भर में सीएए के खिलाफ जनता आंदोलन कर रही है। महिलाएं दिन-रात प्रदर्शन कर रही है। सरकार के कानों में जूं नहीं रेंग रही है। इस मौके पर अखिलेश यादव ने विश्वनाथ राजभर नीलम द्वारा लिखित दमयंती महाकाव्य का विमोचन भी किया।
गंगा मैली तो गंगा रथ निकालने का क्या मतलब
सपा अध्यक्ष ने कहा, भाजपा सरकार ने विकास किया नहीं, इसलिए ध्यान बंटाने को तमाम आयोजनों पर करोड़ों रुपये फूंक रही है। धर्म-जाति के नाम पर फूट डाल रहे हैं। उन्होंने कहा गंगा यात्रा पर रथ निकालने का क्या मतलब है। करोड़ों रुपये गंगा की सफाई के नाम पर फूंक दिए लेकिन गंगा आज भी मैली हैं। पांच साल से नमामि गंगे का नाटक हो रहा है। जब तक गंगा में मिलने वाली नदियां और काली नदी साफ नहीं होती है, तब तक गंगा साफ नहीं हो पाएगी।
अखिलेश का मंत्र, काम ज्यादा, माइक पर कम रहें
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे अपना ध्यान बूथ मजबूत करने पर लगाएं। बूथ स्तर पर ध्यान देने से ही पार्टी मजबूत होगी और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा की सरकार बनने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने कहा गांव-गांव, घर-घर समाजवादी सरकार के कामों की जानकारी दें, उनके दुख-दर्द में शामिल रहे। उन्होंने मंत्र दिया, काम ज्यादा, माइक पर कम रहें।