तिलमिलाए भाजपाइयों ने अखिलेश पर उगला जहर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को तोड़ने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश्ा पर भाजपा ने खुलकर हमला किया और उन्हें ईर्ष्या का शिकार बताया।
भाजपा ने प्रदेश सरकार पर व्यास महोत्सव का स्थान बदलने का फैसला करके काशी का अपमान करने का आरोप लगाया है।
भाजपा प्रवक्ता डॉ चंद्रमोहन ने कहा कि सपा सरकार राजनीतिक ईर्ष्या में फैसले कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी को भारतीय संस्कृति के केंद्र के रूप में विकसित करना चाह रहे हैं।
प्रदेश सरकार से यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। वर्ष 2007 से यह महोत्सव काशी में होता आया है।
ये है पीएम नरेंद्र मोदी का सपना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी को संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना चाहते हैं। वहां के घाटों से लेकर पर्यटन तक को विकसित करने की योजनाएं बना रहे हैं, लेकिन संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘व्यास महोत्सव’ की मेजबानी वाराणसी से छिन गई है। यह महोत्सव अब इलाहाबाद में होगा।
बताया जा रहा है कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद राज्य सरकार ने आयोजन स्थल बदलने का निर्णय किया है। इसके लिए गत वर्ष सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय प्रशासन से हुए विवाद को कारण बताया जाना बेबुनियाद है।
हर साल होता है महोत्सव
गौरतलब है कि व्यास जयंती पर प्रतिवर्ष राज्य सरकार के उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से व्यास महोत्सव कराया जाता है।
वर्ष 2007 से लगातार यह आयोजन काशी में होता आ रहा है लेकिन इस वर्ष का महोत्सव दिसंबर में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कराने की तैयारियां चल रही हैं।
पहली बार होगा कहीं और
यह पहला मौका है जब महोत्सव काशी से प्रयाग शिफ्ट किया जा रहा है। महोत्सव में वेद-पुराणों पर गोष्ठियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं होती हैं।
इसमें देश के चुनिंदा व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्कृत विद्वान शामिल होते हैं। इसका बजट करीब 15 लाख रुपये तक रहता है।
संस्थान के पदाधिकारी बताते हैं कि 2013 में वाराणसी के सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन से महोत्सव आयोजन स्थल के किराए को लेकर मामूली कहासुनी हो गई थी। इसके बाद इसे बीएचयू में कराया गया।
सीएम अखिलेश का किया बचाव
संस्कृति निदेशालय के आला अधिकारी बताते हैं कि वाराणसी प्राचीन भारतीय संस्कृति व संस्कृत की शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, इसलिए वहां पर 2007 में व्यास महोत्सव की नींव डाली गई।
मामले पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष शंकर सुहैल कहते हैं कि ‘वाराणसी की तरह इलाहाबाद भी देश का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र है।
चूंकि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से आयोजन कराने के लिए उत्सुक है, इसलिए व्यास महोत्सव वहां कराने का निर्णय किया गया है। बजट करीब 15 लाख रुपये रखा गया है। इसके लिए नई आयोजन समिति गठित करने की प्रक्रिया चल रही है।'