बिकरू कांड: प्रशासन के 75 अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश, एसआईटी ने शासन को सौंपी 3200 पेज की रिपोर्ट
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बिकरू कांड की जांच कर एसआईटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। कुल 3200 पन्नों की रिपोर्ट में एसआईटी ने 75 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें पुलिस व प्रशासन के लोग भी शामिल हैं।
एसआईटी ने अपनी जांच में कानपुर के पुलिस अफसरों की भूमिका को संदिग्ध पाया है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद कुछ पुलिस अफसरों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा सकती है।
जानकारों का कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट की मूल रिपोर्ट 700 पन्नों की है और इसमें 2500 पन्ने बतौर संलग्नक लगाए गए हैं। जिन 75 लोगों के खिलाफ कारवाई की सिफारिश की गई है उनमें 60 फीसदी पुलिस और 40 फीसदी प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी हैं।
सूत्र बताते हैं कि जांच में एसआईटी ने बिकरु मामले में कानपुर पुलिस पर लगे आरोपों को सही पाया है। शासन के निर्देश पर एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रशासनिक सुधार के लिए तीन तरह की सिफारिशें भी की हैं।
एसआईटी की टीम में शामिल अधिकारी हालांकि अपनी जांच रिपोर्ट के बारे में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं पर जानकारों का कहना है कि रिपोर्ट में गैंगस्टर विकास दुबे व उसके सहयोगियों को जारी शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया गया है।
गौरतलब है कि शासन ने एसआईटी को इस प्रकरण में विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए थे और जांच के लिए एसआईटी का गठन करने के समय शासन स्तर से इस बात पर भी चिंता जताई गई थी कि कैसे विकास दुबे जैसे अपराधी व उसके करीबियों के शस्त्र लाईसेंस बने और किन पुलिसकर्मियों की उसके साथ संलिप्तता थी।
एसआईटी ने शस्त्र लाईसेंस जारी किए जाने के बिंदु पर गहन छानबीन की। सूत्र बताते हैं कि जांच रिपोर्ट में विकास दुबे और गिरोह के कई लोगों को लाइसेंस जारी किए जाने में बड़े स्तर पर की गई नियमों की अनदेखी को आधार बनाते हुए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका तय की गई है और उनके खिलाफ कारवाई की सिफारिश की गई है। ऐसे ही विकास दुबे से जुड़े कुछ लोगों को पासपोर्ट जारी किए जाने में हुई अनदेखी पर भी रिपोर्ट दी गई है।
इस मामले की जांच के दौरान एसआईटी ने 100 से अधिक लोगों का बयान दर्ज किया और उनसे पूछताछ की थी। संबंधित थानों व जिला प्रशासन से दस्तावेज हासिल कर उनका परीक्षण किया और इस आधार पर अफसरों से जवाब भी तलब किए गए।
राज्य सरकार ने बीती 11 जुलाई को अपर मुख्य सचिव संजय भुसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा व पुलिस उप महानिरीक्षक जे रवींद्र गौड़ को सदस्य नामित किया गया था। गठन के समय ही सरकार ने एसआईटी को जांच पूरी कर 31 जुलाई तक आख्या उपलब्ध कराने को कहा था।
लेकिन तय समय तक जांच पूरी नहीं हो सकी थी और एसआईटी के आग्रह पर जांच की अवधि को कई बार बढ़ाया गया। शासन ने एसआईटी से मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे, उसके परिवार, करीबी रिश्तेदारों व गैंग के सदस्यों को मिलाकर कुल 57 लोगों की संपत्तियों और उनके ठेकों और शस्त्र लाससेंस के संबंध में जानकारी मांगी थी।
इन बिदुओं पर हुई जांच
- विकास दुबे के विरूद्ध जितने भी अभियोग प्रचलित हैं उनपर अब तक क्या प्रभावी कार्रवाई की गई? इसके तथा इसके साथियों को सजा दिलाने के लिए कृत कार्रवाई क्या पर्याप्त थी? इतने विस्तृत आपराधिक इतिहास वाले अपराधी की जमानत निरस्तीकरण की दिशा में क्या कार्रवाई की गई?
- विकास दुबे के विरूद्ध कितनी जन-शिकायतें आईं और उनपर थानाध्यक्ष चौबेपुर द्वारा और जनपद के अन्य अधिकारियों द्वारा क्या जांच की गई व पाए गए तथ्यों के आधार पर क्या कार्रवाई की गई, इसका विस्तृत परीक्षण करना।
- विकास दुबे और उसके साथियों के विरूद्ध गैंगेस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, एनएसए आदि अधिनियमों के अंतर्गत क्या कार्रवाई की गई और कार्रवाई किए जाने में लापरवाही रही तो किस स्तर पर रही?
- विकास दुबे और उसके साथियों के पिछले एक वर्ष के सीडीआर का परीक्षण करना एवं उसके संपर्क में आए सभी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध संलिप्तता की साक्ष्य मिलने की दशा में उपयुक्त और कड़ी कार्रवाई करने की अनुशंसा करना।
- घटना के दिन क्या अभियुक्तों के पास उपलब्ध हथियारों और उसके फायर पावर के विषय में सूचना संकलन में लापरवाही की गई। यह किस स्तर पर हुई, क्या थाने में इसकी समुचित जानकारी नहीं थी। इस तथ्य को भी जांच करना व दोषी यदि कोई हो तो चिन्हित करना।
- विकास दुबे व उसके साथियों के पास शस्त्र लाइसेंस और शस्त्र होने की जानकारी आई है। यह देखा जाना होगा कि इतने अधिक अपराधों में संलिप्त रहने के बाद भी इनका हथियार का लाइसेंस किसके द्वारा एवं कैसे दिया गया और लगातार अपराध करने के बाद भी यह लाइसेंस और हथियार उसके पास कैसे बना रहा?
- अभियुक्त विकास दुबे एवं उसके साथियों के द्वारा अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति, व्यापारों एवं आर्थिक गतिविधियों का परीक्षण करते हुए उनके संबंध में युक्तियुक्त अनुशंसा करना तथा यह भी इंगित करना कि स्थानीय पुलिस ने इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई, लापरवाही या संलिप्तता तो प्रदर्शित नहीं की और अगर ऐसा हुआ है, तो किस स्तर के अधिकारी दोषी है?
- अभियुक्त विकास दुबे व उसके साथियों के द्वारा क्या सरकारी तथा गैर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया गया है? यदि हां तो इसमें क्या अधिकारियों की भी भूमिका है और वह अधिकारी कौन-कौन है, उनका उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाय। अवैध कब्जा हटवाना जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी, यदि उनके द्वारा अवैध कब्जा नही हटवाया गया है तो उनका भी उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
- इस प्रकरण के अभियुक्तों व उनके साथियों के साथ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता तथा अभियुक्तों व उनके फाइनैंसर्स की संपत्तियों व आय के स्रोतों की जांच प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग से कराने पर भी एसआईटी द्वारा सुझाव दिया जाए।