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साइबर जांच में सामने आया एलडीए का सबसे बड़ा भूखंड घोटाला, वीसी के निर्देश पर कई पर मुकदमा
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लखनऊ विकास प्राधिकरण में सामने आया सबसे बड़ा भूखंड घोटाला।
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लखनऊ। साइबर जांच में एलडीए का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। एलडीए के कंप्यूटर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर गलत डाटा से भूखंड आवंटन के 498 प्रकरण मिले हैं। इस पर वीसी अभिषेक प्रकाश के आदेश पर एलडीए के तहसीलदार राजेश शुक्ला ने कार्यदायी संस्था डीजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अजीत मित्तल और सर्विस इंजीनियर दीपक मिश्रा व अन्य के खिलाफ एफआईआर करा दी है। एलडीए के कंप्यूटर सेक्शन के प्रभारी एसबी भटनागर को भी आरोप पत्र दिया गया है। वीसी ने प्राधिकरण के कर्मचारियों, अधिकारियों की भूमिका की जांच सचिव पवन गंगवार को दी है।
एलडीए ने पहले 52 भूखंड के कंप्यूटर रिकॉर्ड में हेराफेरी की एफ आईआर कराई थी। इसके बाद एसीपी साइबर क्राइम सेल विवेक रंजन राय और संयुक्त सचिव एलडीए ऋतु सुहास ने खुद जांच कर वीसी को रिपोर्ट सौंपी। इसमें 498 मामले सामने आए हैं। कंपनी के सीईओ व सर्विस इंजीनियर की भूमिका रिकॉर्ड बदलने में सामने आई। एसीपी के मुताबिक कंपनी ने सर्वर डाटा के दुरुपयोग के लिए अवैध तरीके से लोगों से समझौता किया था। वहीं, कंप्यूटर यूनिट भी बराबर दोषी है। बुकिंग, पोटिंग व नेटवर्किंग सभी बराबर भागीदारी हैं, जिनके कारण यह फर्जीवाड़ा हुआ। मामले में कंप्यूटर सेक्शन में तैनात कर्मचारी व अधिकारियों की मिलीभगत के भी प्रमाण मिले।
जानकीपुरम घोटाले को भी पीछे छोड़ा
एलडीए में अब तक का सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला जानकीपुरम योजना में माना जाता है। यहां कई 14 अधिकारी, कर्मचारी दोषी पाए गए। सीबीआई जांच में 413 भूखंड की फाइलें एलडीए से गायब मिलीं। 139 प्रकरण में ही गड़बड़ी पकड़ी जा सकी। गलत आवंटन से हुए नुकसान की भरपाई दोषी कर्मचारी, अधिकारियों से होनी है। हालांकि, सालों बाद भी वसूली पूरी नहीं हो सकी है। पिछले दिनों गोमतीनगर के वास्तुखंड के नौ भवन में भी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर आवंटन का प्रकरण सामने आया। इसकी भी जांच पुलिस कर रही है। एलडीए ने बाबू अजय प्रताप वर्मा के खिलाफ एफआईआर कराई हुई है। नए घोटाले में भूखंड गोमतीनगर से लेकर आशियाना, जानकीपुरम विस्तार, जानकीपुरम, गोमतीनगर विस्तार सभी योजनाओं में हैं।
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कई यूजर आईडी तक थी कंपनी की पहुंच
तहसीलदार राजेश शुक्ला के मुताबिक डीजीटेक प्रा. लि. सर्वर की सर्विस मुहैया कराती है। कंपनी के पास पूरे नेटवर्क का कमांड रहता है। इसके सीईओ अजीत मित्तल और सर्विस इंजीनियर दीपक मिश्रा है। इसके अलावा कई कर्मचारी एलडीए में सहयोग के लिए लगा रखे हैं। इन लोगों ने एलडीए के सर्वर से छेड़छाड़ कर कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। कंपनी की पहुंच कई यूजर आईडी तक थी। इनका गलत उपयोग किया गया।
मूल आवंटियों के नाम में बदलाव
आरोप है कि कंपनी के कर्मचारियों ने सीईओ, सर्विस इंजीनियर की जानकारी में दस्तावेजों में हेराफेरी की थी। सर्वर का दुरुपयोग करते हुए मूल आवंटियों के नाम बदलकर अवैध तरीके से फर्जी नामों से दस्तावेज तैयार किए।
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एलडीए ने पहले 52 भूखंड के कंप्यूटर रिकॉर्ड में हेराफेरी की एफ आईआर कराई थी। इसके बाद एसीपी साइबर क्राइम सेल विवेक रंजन राय और संयुक्त सचिव एलडीए ऋतु सुहास ने खुद जांच कर वीसी को रिपोर्ट सौंपी। इसमें 498 मामले सामने आए हैं। कंपनी के सीईओ व सर्विस इंजीनियर की भूमिका रिकॉर्ड बदलने में सामने आई। एसीपी के मुताबिक कंपनी ने सर्वर डाटा के दुरुपयोग के लिए अवैध तरीके से लोगों से समझौता किया था। वहीं, कंप्यूटर यूनिट भी बराबर दोषी है। बुकिंग, पोटिंग व नेटवर्किंग सभी बराबर भागीदारी हैं, जिनके कारण यह फर्जीवाड़ा हुआ। मामले में कंप्यूटर सेक्शन में तैनात कर्मचारी व अधिकारियों की मिलीभगत के भी प्रमाण मिले।
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जानकीपुरम घोटाले को भी पीछे छोड़ा
एलडीए में अब तक का सबसे बड़ा भूखंड आवंटन घोटाला जानकीपुरम योजना में माना जाता है। यहां कई 14 अधिकारी, कर्मचारी दोषी पाए गए। सीबीआई जांच में 413 भूखंड की फाइलें एलडीए से गायब मिलीं। 139 प्रकरण में ही गड़बड़ी पकड़ी जा सकी। गलत आवंटन से हुए नुकसान की भरपाई दोषी कर्मचारी, अधिकारियों से होनी है। हालांकि, सालों बाद भी वसूली पूरी नहीं हो सकी है। पिछले दिनों गोमतीनगर के वास्तुखंड के नौ भवन में भी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर आवंटन का प्रकरण सामने आया। इसकी भी जांच पुलिस कर रही है। एलडीए ने बाबू अजय प्रताप वर्मा के खिलाफ एफआईआर कराई हुई है। नए घोटाले में भूखंड गोमतीनगर से लेकर आशियाना, जानकीपुरम विस्तार, जानकीपुरम, गोमतीनगर विस्तार सभी योजनाओं में हैं।
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कई यूजर आईडी तक थी कंपनी की पहुंच
तहसीलदार राजेश शुक्ला के मुताबिक डीजीटेक प्रा. लि. सर्वर की सर्विस मुहैया कराती है। कंपनी के पास पूरे नेटवर्क का कमांड रहता है। इसके सीईओ अजीत मित्तल और सर्विस इंजीनियर दीपक मिश्रा है। इसके अलावा कई कर्मचारी एलडीए में सहयोग के लिए लगा रखे हैं। इन लोगों ने एलडीए के सर्वर से छेड़छाड़ कर कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। कंपनी की पहुंच कई यूजर आईडी तक थी। इनका गलत उपयोग किया गया।
मूल आवंटियों के नाम में बदलाव
आरोप है कि कंपनी के कर्मचारियों ने सीईओ, सर्विस इंजीनियर की जानकारी में दस्तावेजों में हेराफेरी की थी। सर्वर का दुरुपयोग करते हुए मूल आवंटियों के नाम बदलकर अवैध तरीके से फर्जी नामों से दस्तावेज तैयार किए।