फर्जीवाड़ा! गरीबों के 2768 मकानों में 2000 अवैध कब्जेदार
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गरीबों को मकान देने की योजना में जमकर बंदरबांट सामने आई है। आश्रयहीन योजना के 2768 आवासों में 2000 में अवैध कब्जे पाए गए हैं।
इनमें से अकेले देवपुर पारा आश्रयहीन स्कीम के 1768 मकानों में महज 45 वैध कब्जेदार पाए गए।
यानी करीब ढाई फीसदी वैध आवंटी ही इन आवासों में पिछले 12 साल से रह रहे हैं। हरदोई रोड की बसंत कुंज योजना के 1000 आवासों में 350 अवैध कब्जेदार सामने आए हैं।
मजे की बात यह है कि अवैध कब्जेदारों के पास में एलडीए की ओर से दिए गए कागज भी हैं। मगर ये सारे कागज फर्जी बताए जा रहे हैं।
दरअसल प्राधिकरण में सक्रिय दलालों के समूह ही इन अवैध कब्जों की जड़ है। दलालों ने फर्जी कागज थमा लोगों को आवंटी होने का झांसा दिया है। प्राधिकरण अब इन सारे आवंटनों की जांच करा रहा है।
इसके बाद में जानकीपुरम विस्तार, शारदा नगर और चिनहट के सभी आवंटियों की जांच कराने का फैसला किया गया है।
यहां भी 2000 आवास हैं, जिनमें सभी में लोग रह रहे हैं। प्राधिकरण के कई कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच कराने का आदेश सचिव की ओर से दिया गया है।
ये थी आश्रयहीन आवासीय योजना
आश्रयहीन कॉलोनी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इस योजना में 10 और 15 रुपये रोजाना की किस्त पर गरीबी रेखा के नीचे के लोगों को आवास मुहैया कराए गए।
इसके लिए कार्यदायी संस्था लखनऊ विकास प्राधिकरण था। हरदोई रोड की बसंत कुंज कॉलोनी, शारदा नगर, चिनहट, जानकीपुरम विस्तार और देवपुर पारा करीब 300 वर्ग फीट के एक कमरे के मकान दिए गए थे।
इन कॉलोनियों में सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की गई थी।
देवपुर में नए अलॉटमेंट में सामने आया सच
देवपुर पारा के 1768 आवासों को मायावती काल में कंडम घोषित कर दिया गया था। इन मकानों को ढहाने के अलावा इनके जर्जर निर्माण से जुड़े अधिकारियों को दंडित करने का आदेश दिया गया था।
यहां प्राधिकरण अपनी कबीर आवास योजना लाने जा रहा है। ऐसे में पूर्व आवंटियों को नई कॉलोनी में समायोजित करने के लिए कागजों की जांच करवाई तो सामने आया कि 1768 में महज 45 ही वैध आवंटी हैं।
इन आवंटियों के पास पूरे कागज हैं और इन्होंने पूरा पैसा जमा किया है। इनको कबीर नगर योजना में फ्लैट दिए जाएंगे। मगर बचे हुए 1723 कब्जेदारों के पास इक्का-दुक्का कागजात मिले वे भी फर्जी।
इसलिए इनका आवासों पर अवैध कब्जा माना गया है। इसी तरह से बसंत कुंज कॉलोनी में भी ऐसे ही प्रकरण हैं। यहां लगभग 1000 आवास हैं। इनमें से 350 अवैध कब्जेदार हैं। इनके कागज फर्जी हैं। इस बात का खुलासा भी रिपोर्ट में किया गया है।
ऐसे और इसलिए हुआ ये खेल
दरअसल जब ये योजना परवान चढ़ी, उस समय बसंतकुंज और देवपुर पारा योजनाएं शहर से बहुत दूर थीं। इसलिए अलॉटमेंट होने के बाद भी ज्यादातर उनमें रहने ही नहीं गए।
इसका फायदा दलालों ने उठाया। प्राधिकरण के योजनाओं के साइट ऑफिस के कर्मचारियों से मिल कर फर्जी अलॉटमेंट लेटर बना कर 10 से 30 हजार रुपये लेकर खाली पड़े आवासों में बसा दिया गया। अब इन लोगों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। प्राधिकरण इन सारे कब्जेदारों को अवैध मान रहा है।
सभी आश्रयहीन योजनाओं में आवंटनों की जांच की जा रही है। देवपुर पारा और बसंतकुंज में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। इनमें ज्यादातर कब्जेदार अवैध हैं। इनको मिले कागजों की भी जांच होगी। जिन कर्मचारियों की संलिप्तता पाई जाएगी, उन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
- अष्टभुजा प्रसाद तिवारी, सचिव, लविप्रा