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यूपी: लखनऊ और दिल्ली छोड़ दिग्गज नेताओं ने जाटलैंड में डेरा डाला, शाह, नड्डा, योगी समेत भाजपा के बड़े नेताओं ने संभाला मोर्चा

Sun, 30 Jan 2022 01:50 PM IST
ishwar ashish अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 30 Jan 2022 01:50 PM IST
सार

देश के गृहमंत्री अमित शाह सहित भाजपा के सभी शीर्ष नेताओं ने पश्चिमी यूपी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के दिग्गज नेताओं ने लखनऊ और दिल्ली छोड़कर जाटलैंड में डेरा डाल लिया है।

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Big leaders of BJP is campaigning in West Uttar Pradesh.
गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिमी यूपी में पर्चे भी बांटे। - फोटो : amar ujala

विस्तार

जाटलैंड का चुनावी घमासान कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिल्ली व लखनऊ के दिग्गज नेताओं ने इस क्षेत्र में डेरा डाल दिया है। प्रचार के मोर्चे पर भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के मुकाबले बसपा और कांग्रेस पीछे नजर आ रही हैं। पहले चरण में 10 फरवरी को 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।

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किसान आंदोलन की वजह से जाटों में पैदा हुई नाराजगी के मद्देनजर भाजपा नेता अमित शाह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। 31 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्चुअल रैली को संबोधित करने जा रहे हैं।
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दूसरी तरफ अखिलेश यादव व जयंत चौधरी भी गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। इन दोनों बड़े नेताओं के अलावा सपा-रालोद के स्थानीय नेता भी व्यापक जनसंपर्क करके पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश और जयंत चौधरी ने 28 जनवरी को मुजफ्फरनगर में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज किया।
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2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से जाटों की नाराजगी झेल रहे अखिलेश यादव भाईचारे का संदेश देकर पश्चिमी यूपी को साधने की कोशिश कर रहे हैं। जयंत के साथ आ जाने से भी सपा को फायदा हुआ है। दोनों नेता लगातार विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। सपा-रालोद की लगातार कोशिश है कि भाजपा सांप्रदायिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण कराने में कामयाब न हो सके। यही वजह है कि गठबंधन किसानों, रोजगार, महंगाई आदि के मुद्दों पर ज्यादा फोकस कर रहा है।

प्रचार में पीछे दिख रही बसपा व कांग्रेस

बसपा और कांग्रेस जमीनी स्तर पर प्रचार में पीछे दिखाई दे रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती की पहली रैली 2 फरवरी को आगरा में प्रस्तावित है। मायावती के अलावा बसपा का कोई बड़ा नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय नहीं है। पार्टी प्रत्याशी खुद ही प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। कहीं-कहीं मंडल को-ऑर्डिनेटर व जिला अध्यक्ष प्रचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक बसपा से कोई बड़ा चेहरा मैदान में नहीं उतरा है। कमोबेश यही स्थिति कांग्रेस की भी है।

पहले चरण के चुनाव में कांग्रेस का कोई बड़ा नेता फिलहाल प्रचार के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश नहीं पहुंचा। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा युवाओं और महिलाओं के मुद्दे पर फेसबुक लाइव के माध्यम से संवाद कार्यक्रम कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कुछ नेताओं के प्रचार के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाने की चर्चा जरूर है।

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