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Lucknow News: बार-बार नींद टूटे तो हो जाएं सतर्क, लंबे समय तक यह समस्या दे सकती है कई गंभीर बीमारियां

Mon, 27 Jul 2026 02:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 02:27 AM IST
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Be alert if your sleep is frequently interrupted; this problem can lead to several serious illnesses over the long term.
डेंटल शो में सम्मानित हुईं डॉ. नमिता शुक्ला।
लखनऊ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे इंडियन डेंटल एसोसिएशन के 8वें डेंटल शो के दूसरे दिन ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के नए उपचार पर चर्चा हुई। इंडियन डेंटल एसोसिएशन की वरिष्ठ सदस्य डॉ. नमिता शुक्ला ने बताया कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया नींद के दौरान सांस रुकने की गंभीर समस्या है। इसमें सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। इससे सांस मार्ग बंद हो जाता है और सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। इससे बार-बार नींद टूटती रहती है।
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लंबे समय तक यह समस्या रहने पर ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। नमिता शुक्ला ने बताया कि हाइपोग्लॉसल नर्व स्टिमुलेशन इस समस्या से राहत दे रहा है। इसमें मुंह के भीतर एक विशेष इम्प्लांट लगाया जाता है। यह इम्प्लांट नींद के दौरान जीभ की नस को सक्रिय रखता है। इससे सांस नली बंद नहीं होती और मरीज सामान्य रूप से सांस ले पाता है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए प्रभावी है जिन्हें पारंपरिक सीपैप मशीन से लाभ नहीं मिलता।
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इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. टीपी चतुर्वेदी, संरक्षक डॉ. राजीव गुलाटी, सह संरक्षक डॉ. एसके कटारिया, मुख्य समन्वयक डॉ. केके गुप्ता, डॉ. अश्वनी मिश्रा, डॉ. पंकज तनेज आदि डॉक्टर मौजूद रहे।
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ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लक्षण और बचाव
सोते समय तेज खर्राटे आना।
नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना।
अचानक घुटन महसूस होने पर नींद खुल जाना।
सुबह सिरदर्द या मुंह सूखना।
दिनभर नींद आना और थकान महसूस होना।
बचाव के उपाय
वजन नियंत्रित रखना
नियमित व्यायाम करना
धूम्रपान व शराब से परहेज
करवट लेकर सोना
पर्याप्त नींद लेना।
एआई से दांतों का सटीक इलाज
डॉ. नमिता शुक्ला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने दंत चिकित्सा को नई दिशा दी है। अब दांतों का इलाज पहले से अधिक सटीक हो गया है। एआई तकनीक से दांतों के रंग का मिलान विशेष रूप से किया जा रहा है। इससे क्राउन, कैप, ब्रिज, वेनियर और कृत्रिम दांत बिल्कुल प्राकृतिक दिखते हैं। पहले दांत का रंग डॉक्टर और टेक्नीशियन आंखों से मिलाते थे, जिससे कई बार हल्का अंतर रह जाता था। अब एआई आधारित डिजिटल स्कैनर और कैमरे दांतों की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर लेकर उनके रंग, पारदर्शिता और बनावट का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं।
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