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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Basti Mandal's report: 'Tough fight, everyone's test,' the atmosphere is not visible like the last election.

बस्ती मंडल की रिपोर्ट : कड़ा घमासान, सबका इम्तिहान, पिछले चुनाव की तरह एकतरफा नजर नहीं आ रहा माहौल

Wed, 01 Dec 2021 07:56 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 01 Dec 2021 07:56 AM IST
सार

बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु और संत कबीर की महिमास्थली मगहर से आलोकित बस्ती मंडल में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबर्दस्त लहर चली। यहां सपा और बसपा का सूपड़ा साफ  हो गया।

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Basti Mandal's report: 'Tough fight, everyone's test,' the atmosphere is not visible like the last election.
मगहर सद्गुरु कबीर समाधि। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महर्षि वशिष्ठ की तपस्थली मखौड़ा, तथागत बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु और संत कबीर की महिमास्थली मगहर से आलोकित बस्ती मंडल में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबर्दस्त लहर चली। यहां सपा और बसपा का सूपड़ा साफ  हो गया। मंडल की 13 सीटों में से भाजपा ने 12, तो एक सीट उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने जीत ली। उस समय कैसी बयार बह रही थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छह बार विधायक रहे तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को आखिरी चुनाव की दुहाई भी नहीं बचा पाई। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा डुमरियागंज, बस्ती और संत कबीरनगर से अपने प्रत्याशी जिताने में कामयाब रही। पर, अब हालात पिछले विधानसभा चुनाव की तरह एकतरफा नजर नहीं आ रहे हैं। कम अंतर से चुनाव जीते कई विधायकों का पूरा दारोमदार ध्रुवीकरण के समीकरण पर टिका नजर आ रहा है।

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प्रदेश में भाजपा सरकार बनी तो बस्ती मंडल से तीन मंत्री बनाकर इलाके को भरपूर अहमियत दी गई। सिद्धार्थनगर के बांसी से विधायक जयप्रताप सिंह को कैबिनेट, इसी जिले की इटवा से विधायक डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी और धनघटा (संत कबीरनगर) से श्रीराम चौहान को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। बस्ती व सिद्धार्थनगर को मेडिकल कॉलेज व कई लंबी सड़कों के साथ मंडल को कई सौगातें मिलीं। पर, इस सबके बावजूद कई विधायकों व मंत्रियों के खिलाफ  नाराजगी के स्वर सुनाई दे रहे हैं। परदे के पीछे हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के बीच की खींचतान भी लोगों की जुबान पर है। संत कबीरनगर में पूर्व सांसद व विधायक के बीच जूता कांड के तीन वर्ष बीतने के बावजूद ठाकुरवाद-ब्राह्मणवाद की भड़की चिंगारी अभी ठंडी नहीं हुई है।

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मंडल में ब्राह्मण चेहरे के रूप में उभरे संत कबीरनगर के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी की मृत्यु हो चुकी है, तो बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी का कद तेजी से बढ़ा है। वह संगठन में राष्ट्रीय मंत्री के साथ बिहार के प्रभारी बन चुके हैं। डुमरियागंज में सांसद जगदंबिका पाल की चिर-परिचित अंदाज की सियासत जारी है। वहीं, संत कबीरनगर में निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद बेटे प्रवीण निषाद को सांसद बनवाने और खुद एमएलसी बनने के बावजूद सीटों की सौदेबाजी को लेकर हर चौराहे पर चर्चा के केंद्र में हैं। विधानसभा चुनाव से पहले की सियासी तस्वीर ये है कि बिना विपक्ष के प्रत्याशी फाइनल हुए ही कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की चर्चा आम है। एक-एक सीट पर कई-कई लोग टिकट के लिए परेशान हैं। जातिवाद, नाराजगी व भितरघात की बनती पृष्ठभूमि में कई सीटों पर कांटे की टक्कर की जमीन तैयार होती नजर आ रही है। यह बात अलग है कि टिकट की मारामारी विरोधी दलों में भी काफी है।

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दलबदल रुके तब तो साफ हो सियासी तस्वीर
2017 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही मंडल में दलबदल का दौर जारी है। बस्ती के हर्रैया से पिछला चुनाव सपा से लड़े पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में चले गए थे। अब वह हाथी पर सवार हो चुके हैं। इसी तरह कप्तानगंज से बसपा प्रत्याशी रहे पूर्व विधायक राम प्रसाद चौधरी साइकिल का हैंडल थाम चुके हैं। संत कबीरनगर में भाजपा के एक विधायक का भाई सपा से टिकट मांग रहा है, तो सिद्धार्थनगर के एक पूर्व विधायक का भाई बसपा में लाइन लगाए है। बस्ती मंडल में कुर्मी और निषाद जातियों का कई सीटों पर अच्छा प्रभाव है। सपा और भाजपा दोनों ही इसे साधने के लिए हर कोशिश में लगे हैं। सपा ने राम प्रसाद चौधरी को गले लगा लिया तो भाजपा ने संजय चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष बना दिया है।


बस्ती : बंद पड़ी हैं चीनी मिलें
अयोध्या में राममंदिर निर्माण शुरू हुआ तो पड़ोस के बस्ती का भी रंग-रूप बदलने लगा है। यहां तेजी से बहुमंजिला भवन आकार लेने लगे हैं। जमीन की कीमतें बढ़ गई हैं। वहीं, होटल और उद्योग के लिए जमीन तलाशने वालों की आवाजाही भी बढ़ गई है। यानी तस्वीर बदल रही है। पर, एक स्याह तस्वीर यह भी है कि बस्ती व वाल्टरगंज की चीनी मिलें बंद पड़ी हैं जिससे रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पा रहे हैं। मुंडेरवा के राम अवतार कहते हैं, बेशक बड़ी सड़कों का काम हुआ है। हालात बदले हैं। पर, गांवों को जोड़ने वाली सड़कों का बुरा हाल है। ऊंचगांव जमोहे से लेकर बस्ती-गोरखपुर हाईवे तक की सड़क खराब पड़ी है। वहीं हर्रैया के उमानाथ पांडेय कहते हैं, ईमानदारी से कहें तो पहले के मुकाबले सड़क, स्कूल व बिजली के काफी काम हुए हैं। पर, मुद्दों से ज्यादा चुनाव में प्रत्याशी कौन है, यह मायने रखता है।


संत कबीरनगर : नए उद्योग लगे नहीं, बंद हो रहे पुराने 
खलीलाबाद के हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमरनाथ पांडेय संत कबीरनगर के औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित नहीं हो पाने पर सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, नए उद्योग तो लग नहीं रहे, पुराने भी या तो बंद हो गए या बंदी जैसे हालात में हैं। क्षेत्रीय गांधी आश्रम बंदी की कगार पर है। कभी यह गोरखपुर और बस्ती मंडल का बड़ा केंद्र हुआ करता था। मगहर की सूती मिल बंद पड़ी है। यहां कभी 500 से लेकर 800 तक कर्मचारी काम करते थे। खलीलाबाद की चीनी मिल और डालडा फैक्टरी भी बंद हैं। जिला गठन के ढाई दशक बीत चुके हैं, लेकिन मुख्यालय पर आज तक बस अड्डा नहीं बन पाया। जिला मुख्यालय से मेंहदावल व धनघटा को जोड़ने वाली सड़कें बेहद खराब हालत में हैं। घाघरा और राप्ती की बाढ़ की समस्या से भी निजात नहीं मिल पाई। बहरहाल मगहर में अकादमी का निर्माण हो रहा है, जिससे पर्यटन की दृष्टि से विकास की उम्मीद बढ़ी है। पर, इसे कुशीनगर के गौतमबुद्ध स्थली की तरह विकसित करने की जरूरत है। इसी तरह, 29 वर्ग किलोमीटर में फैली बखिरा झील विकसित की जाए तो बड़ा पर्यटक केंद्र बन सकती है। डॉ. पांडेय कहते हैं, चिंताजनक बात ये है कि जनप्रतिनिधि चुनाव खत्म होते ही इन मुद्दों से मुंह मोड़ लेते हैं।


सिद्धार्थनगर : पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो कपिलवस्तु
भगवान बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया। यहां के जमशेद खान बताते हैं, कपिलवस्तु में अच्छे होटलों की कमी है। हेलीपैड बना है, लेकिन एयर बस सेवा नहीं शुरू हो सकी। शहर से कपिलवस्तु जाने वाली सड़क तो चौड़ी होनी ही चाहिए। बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए तीन दशक पहले जलकुंडी परियोजना बनी थी, पर ठंडे बस्ते में चली गई। बाढ़ के कारण शोहरतगढ़, कपिलवस्तु, डुमरियागंज, बांसी एवं इटवा क्षेत्र के लोग प्रभावित होते हैं। जिले में उद्योग बढ़ें तो रोजगार के अवसर बढ़ें। 
डुमरियागंज, शोहरतगढ़, इटवा गन्ने का क्षेत्र है। चीनी मिल शुरू हो तो किसानों की तरक्की का रास्ता साफ हो सकता है। कपिलवस्तु, शोहरतगढ़ में काला नमक धान की खेती होती है। काला नमक धान या चावल की खुशबू न उड़ जाए, इसलिए इन्हें एयरकंडीशंड हॉल में रखने की जरूरत होती है। बांसी क्षेत्र के खेसरहा में सीएफएससी निर्माणाधीन है, जिसमें एयरकंडीशंड गोदाम और कुटाई की सुविधा होगी। किसान चाहते हैं कि ऐसी कई सीएफसी की और जरूरत है। काला नमक चावल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए। वहीं, नहरों की सफाई हो तो किसानों को महंगा डीजल खरीदकर सिंचाई से मुक्ति मिले।

बस्ती (5 सीटें)

बस्ती सदर : भाजपा के दयाराम चौधरी विधायक हैं। 2012 में बसपा के जीतेंद्र उर्फ नंदू चौधरी ने कांग्रेस से मैदान में उतरे जगदंबिका पाल के बेटे अभिषेक पाल को शिकस्त दी थी। जगदंबिका पाल ने 1993 से 2002 तक लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। 
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 55 हजार, कुर्मी 37 हजार, यादव 28 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, वैश्य 15 हजार, कायस्थ 13 हजार, भूमिहार 7 हजार और मुस्लिम 43 हजार।
हर्रैया : भाजपा के अजय सिंह ने 2017 में सपा के राजकिशोर सिंह को हराकर यहां भगवा परचम लहराया। राजकिशोर इस सीट पर 2002 में बसपा और उसके बाद के दो चुनावों में सपा से जीत चुके थे।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 60 हजार, कुर्मी 45 हजार, क्षत्रिय 40 हजार, यादव 25 हजार, चौहान 16 हजार, अनुसूचित जातियां 70 हजार, कायस्थ 5 हजार और मुस्लिम 27 हजार।
कप्तानगंज : भाजपा के चंद्रप्रकाश शुक्ल ने 2017 में बसपा से उतरे पूर्व विधायक राम प्रसाद चौधरी को शिकस्त दी। रामप्रसाद चौधरी इस सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे। 1993 में वह सपा, 1996 में बसपा, 2002 में भाजपा, 2007 और 2012 में बसपा के टिकट पर जीते थे।
जातिगत समीकरण : कुर्मी करीब 69 हजार, ब्राह्मण 43 हजार, यादव 25 हजार, क्षत्रिय 20 हजार, राजभर 13 हजार, मौर्य 10 हजार, वैश्य 9 हजार, अनुसूचित जातियां 70 हजार और मुस्लिम 40 हजार।
रुधौली : भाजपा के संजय प्रताप जायसवाल विधायक हैं। संजय 2012 में कांग्रेस से जीते थे।
जातिगत समीकरण : कुर्मी करीब 73 हजार, ब्राह्मण 41 हजार, यादव 29 हजार, क्षत्रिय 21 हजार, अनुसूचित जातियां 75 हजार और मुस्लिम 90 हजार।
महादेवा (सु.) : भाजपा के रवि सोनकर यहां से विधायक हैं। 2012 में सपा के रामकरन आर्य जीते थे। 
जातिगत समीकरण : कुर्मी करीब 59 हजार, यादव 28 हजार, ब्राह्मण 20 हजार, क्षत्रिय 18 हजार, निषाद 14 हजार, अनुसूचित जातियां 80 हजार और मुस्लिम 39 हजार।

संत कबीरनगर (तीन सीटें)
खलीलाबाद : भाजपा के दिग्विजय नारायन उर्फ जय चौबे यहां से विधायक हैं। 2012 में यहां से पीस पार्टी के डॉ. अयूब जीते थे।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 50 हजार, कुर्मी 32 हजार, ब्राह्मण 30 हजार, वैश्य 25 हजार, मौर्या 12 हजार, क्षत्रिय 10 हजार, निषाद आठ हजार, अनुसूचित जातियां 83 हजार और मुस्लिम 1.35 लाख।
धनघटा (सु.) : केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे श्रीराम चौहान यहां से विधायक हैं। चौहान प्रदेश सरकार में उद्यान, कृषि विपणन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। 
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 57 हजार, यादव 56 हजार, क्षत्रिय व चौहान 40-40 हजार, कुर्मी 27 हजार, निषाद 15 हजार, मौर्य आठ हजार, अनुसूचित जातियां 54 हजार और मुस्लिम 45 हजार।
मेंहदावल : भाजपा के राकेश सिंह बघेल यहां से विधायक हैं। 2012 के चुनाव में बघेल सपा के लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद से हार गए थे।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब एक लाख, एससी 85 हजार, ब्राह्मण 60 हजार, निषाद 45 हजार, भूमिहार 30 हजार,यादव 27 हजार, क्षत्रिय 20 हजार और राजभर 16 हजार।

सिद्धार्थनगर (पांच सीटें)
कपिलवस्तु (सु.) : भाजपा के श्यामधनी विधायक हैं। श्यामधनी ने 2012   में सपा से जीते विजय कुमार को हराया था। 
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 62 हजार, ब्राह्मण व भूमिहार 73 हजार, यादव 23 हजार, मुस्लिम 41 हजार और अन्य जातियां 1.17 लाख।
बांसी : स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह सातवीं बार विधायक हैं। 1989 और 1991 में वह यहां से निर्दलीय जीते थे। 1993-96 में वह भाजपा से जीते। 2007 में सपा के लालजी यादव से हारे थे। इसके बाद दो चुनाव भाजपा से जीते।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जाति करीब 60 हजार, ब्राह्मण-भूमिहार 50 हजार, वैश्य 25 हजार, लोध 25 हजार, मुस्लिम 45 हजार और अन्य जातियां 68 हजार।
शोहरतगढ़ : अपना दल (एस) के चौधरी अमर सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 65 हजार, ब्राह्मण 60 हजार, अनुसूचित जातियां 55 हजार व अन्य 52 हजार।
इटवा : भाजपा के डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी यहां से विधायक और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.15 लाख, ब्राह्मण 77 हजार, यादव 32 हजार, निषाद 25 हजार और अनुसूचित जाति 35 हजार।
डुमरियागंज : भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 1.25 लाख, ब्राह्मण व भूमिहार 69 हजार, अनुसूचित जातियां 48 हजार।
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