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ऋण योजनाओं में नहीं चलेगी बैंकों की मनमानी
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ऋण योजनाओं में नहीं चलेगी बैंकों की मनमानी
जिला उद्योग केंद्र की समीक्षा में बिफरे सीडीओ, डिफ़ॉल्टरों को फटकार
स्वरोजगार के सपने में अड़ंगा लगा रहे बैंकों की मनमानी व शिथिल कार्य प्रणाली पर मुख्य विकास अधिकारी मनीष बंसल ने सख्त नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई है। उन्होंने प्रमुख बैंक के प्रबंधक के माध्यम से सभी डिफ़ॉल्टर बैंक प्रबंधकों को पीएम रोजगार सृजन योजना, सीएम युवा स्वरोजगार योजना तथा एक जनपद एक उत्पाद से जुड़े ऋण प्रोजेक्ट के लंबित मामले एक सप्ताह में निस्तारित करा इसकी अपडेट रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
‘अमर उजाला’ ने रविवार को जिला उद्योग केंद्र से स्वीकृति के बाद भी आवेदकों को बैंक से ऋण न मिलने संबंधी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसे संज्ञान में लेते हुए ही डीएम के निर्देश पर यह बैठक बुलाई गई। सीडीओ ने साफ किया कि जिला उद्योग केंद्र से स्वीकृति लोन प्रोजेक्ट को अगर बैंक स्वीकृत नहीं करते या स्वीकृति बाद भी लोन राशि का भुगतान नहीं करते तो इसका साफ व सटीक कारण भी संबंधित प्रोजेक्ट के साथ अवश्य प्रस्तुत करें। समीक्षा में बैंकों का कार्य संतोषजनक न होने पर सीडीओ ने नाराजगी जताते हुए चेताया कि जनहित के किसी भी कार्य में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। लोन निस्तारण से जुड़े मामलों में लापरवाही को सरकारी योजना में बाधा मानते हुए संबंधित की जिम्मेदारी तय कर सीधे कार्रवाई होगी। रोजगार योजना के तहत किसी भी ब्रान्च में कोई आवेदन पत्र लम्बित न रहें। लीड बैंक के प्रबंधक विनोद मिश्रा को निर्देशित किया कि यदि किसी बैंक की शाखा में ज्यादा आवेदन पत्र लंबित हैं तो उस बैंक का निरीक्षण कर कारण का पता लगाया जाए। कारण से संतुष्ट न होने पर संबंधित शाखा मैनेजर पर कार्रवाई की जाए।
735 प्रोजेक्ट में से सिर्फ 97 को लोन
बैठक में मौजूद जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त मनोज चौरसिया ने बताया कि अप्रैल से अब तक तीनों योजनाओं में 735 आवेदकों के 10825.28 लाख की ऋण राशि से जुड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत कर बैंकों को भेजे। मगर बैकों ने इसमें से सिर्फ 97 मामले ही स्वीकृत कर अब तक सिर्फ 60 आवेदकों को ही 907.49 लाख का ऋण वितरित किया है।
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जिला उद्योग केंद्र की समीक्षा में बिफरे सीडीओ, डिफ़ॉल्टरों को फटकार
स्वरोजगार के सपने में अड़ंगा लगा रहे बैंकों की मनमानी व शिथिल कार्य प्रणाली पर मुख्य विकास अधिकारी मनीष बंसल ने सख्त नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई है। उन्होंने प्रमुख बैंक के प्रबंधक के माध्यम से सभी डिफ़ॉल्टर बैंक प्रबंधकों को पीएम रोजगार सृजन योजना, सीएम युवा स्वरोजगार योजना तथा एक जनपद एक उत्पाद से जुड़े ऋण प्रोजेक्ट के लंबित मामले एक सप्ताह में निस्तारित करा इसकी अपडेट रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
‘अमर उजाला’ ने रविवार को जिला उद्योग केंद्र से स्वीकृति के बाद भी आवेदकों को बैंक से ऋण न मिलने संबंधी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसे संज्ञान में लेते हुए ही डीएम के निर्देश पर यह बैठक बुलाई गई। सीडीओ ने साफ किया कि जिला उद्योग केंद्र से स्वीकृति लोन प्रोजेक्ट को अगर बैंक स्वीकृत नहीं करते या स्वीकृति बाद भी लोन राशि का भुगतान नहीं करते तो इसका साफ व सटीक कारण भी संबंधित प्रोजेक्ट के साथ अवश्य प्रस्तुत करें। समीक्षा में बैंकों का कार्य संतोषजनक न होने पर सीडीओ ने नाराजगी जताते हुए चेताया कि जनहित के किसी भी कार्य में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। लोन निस्तारण से जुड़े मामलों में लापरवाही को सरकारी योजना में बाधा मानते हुए संबंधित की जिम्मेदारी तय कर सीधे कार्रवाई होगी। रोजगार योजना के तहत किसी भी ब्रान्च में कोई आवेदन पत्र लम्बित न रहें। लीड बैंक के प्रबंधक विनोद मिश्रा को निर्देशित किया कि यदि किसी बैंक की शाखा में ज्यादा आवेदन पत्र लंबित हैं तो उस बैंक का निरीक्षण कर कारण का पता लगाया जाए। कारण से संतुष्ट न होने पर संबंधित शाखा मैनेजर पर कार्रवाई की जाए।
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735 प्रोजेक्ट में से सिर्फ 97 को लोन
बैठक में मौजूद जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त मनोज चौरसिया ने बताया कि अप्रैल से अब तक तीनों योजनाओं में 735 आवेदकों के 10825.28 लाख की ऋण राशि से जुड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत कर बैंकों को भेजे। मगर बैकों ने इसमें से सिर्फ 97 मामले ही स्वीकृत कर अब तक सिर्फ 60 आवेदकों को ही 907.49 लाख का ऋण वितरित किया है।
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