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आखिर भट्ठी बना यूपी का बांदा जिला?: घटती हरियाली, सूखती नदियां व खनन ने बढ़ाई तपिश, अभी और खराब होंगे हालात

Fri, 22 May 2026 09:30 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 22 May 2026 09:30 AM IST
सार

बांदा में पहले तालाबों और कुओं के नाम पर मोहल्ले थे अब सूखे का दंश लोगों को तपा रहा है। यहां रोजाना दस हजार ट्रक बालू और इतनी ही गिट्टी का खनन हो रहा है। जिले में अब सिर्फ तीन प्रतिशत ही हरित क्षेत्र बचा है।
 

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Banda district in UP has become a furnace: Decreasing greenery, and mining have increased the heat
बांदा में सिर्फ तीन प्रतिशत ही बचा हरित क्षेत्र। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बुंदेलखंड का बांदा इन दिनों भीषण तपिश से भट्ठी में तब्दील होता जा रहा है। पिछले चार दिनों से बांदा देश के सबसे गर्म शहर के तौर पर चर्चा में है। मंगलवार को यहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी हो जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मौसम का असर नहीं, बल्कि वर्षों से बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन, घटती हरियाली और अनियंत्रित खनन का नतीजा है।

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खनन माफिया की लगी नजर
बुंदेलखंड के पर्यावरण एक्टिविस्ट पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने बताया कि बांदा पर खनन माफिया की नजर लगी है।

  • यहां से रोज दस हजार ट्रक बालू और इतनी ही गिट्टी का अंधाधुंध खनन हो रहा है। बंबेश्वर पहाड़ पर बसा बांदा शापित हो गया है। अब बांदा तो बचा, लेकिन बंबेश्वर पहाड़ गायब हो गया।
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  • उन्होंने बताया कि पिछले 50 वर्षों में ऐसी भीषण गर्मी नहीं देखी गई। कभी बेहतर जलस्तर और कुओं के लिए पहचाने जाने वाले बांदा में तालाबों और कुओं के नाम पर मोहल्ले बसे थे।
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  • शुक्ला कुआं और गोरहा कुआं मोहल्ले और प्रागी तालाब, नवाब साहब तालाब मोहल्ला इसकी बानगी हैं। अब पानी और हरियाली दोनों तेजी से गायब हो रहे हैं।
  • बांदा में जमीन की नमी और हरित क्षेत्र तेजी से घट रहे हैं। बांदा कर्क रेखा के प्रभाव वाले क्षेत्र में आता है, जहां सूर्य की किरणें अधिक तीव्रता से पड़ती हैं। पहले नदियां, तालाब, पेड़ और जलस्रोत इस गर्मी को संतुलित करते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
  • यहां शोध कर चुके पर्यावरण एक्टिविस्ट राम बाबू तिवारी कहते हैं कि गिरते जल स्तर और सुखते जलस्रोतों ने जिले को हीट ट्रैप यानी गर्मी के जाल में धकेल दिया है। बांदा हीट आइलैंड में बदलता जा रहा है।

हीट आइलैंड में क्यों बदल रहा बांदा?





तीन हजार कुएं जलहीन
उमाशंकर पांडेय ने बताया कि कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली बाधैन नदी का जल प्रवाह कम हो गया है, जबकि रंज नदी लगभग सूख चुकी है। बांदा की कम से कम 10 छोटी नदियां लगभग समाप्त हैं। तीन हजार कुएं जलहीन हैं। इनमें नरैनी, गिरवां और छिल्ला क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पड़ोसी महोबा जिले के चुकाबरई क्षेत्र में करीब 300 क्रशर मशीनें लगातार पहाड़ों का सीना चीर रही हैं। इसका असर पूरे बुंदेलखंड के पर्यावरण और जलवायु पर पड़ रहा है।

सही कदम नहीं उठे तो कैसे होंगे हालात?

वन, सिंचाई, बागवानी, लोक निर्माण और केंद्रीय जल आयोग समेत सभी विभागों को मिलकर ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जल संरक्षण, पारंपरिक जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन और अवैध खनन पर सख्ती के बिना बांदा को बढ़ती गर्मी और गहराते जल संकट से बचाना मुश्किल होगा।

देश में सबसे गर्म बांदा
27 अप्रैल 2026 को बांदा में 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जो उस दिन देश में सबसे अधिक था। यह 1951 के बाद अप्रैल महीने का यहां का सर्वाधिक तापमान भी रहा। इससे पहले अप्रैल 2022 और 2026 में 47.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ था। हालांकि बांदा का अब तक का सर्वाधिक तापमान 49.2 डिग्री सेल्सियस है, जो 10 जून 2019 को दर्ज किया गया था।

 

मई 2026 में भी रिकॉर्ड तोड़े
17 मई 46.4 डिग्री सेल्सियस
18 मई 47.6 डिग्री सेल्सियस
19 मई 48.2 डिग्री सेल्सियस
20 मई 48 डिग्री सेल्सियस

फैक्ट फाइल : बांदा के 105 वर्ग किमी क्षेत्र में केवल तीन प्रतिशत हरित क्षेत्र बचा है। बुंदेलखंड के अन्य जिलों की तुलना में यह बेहद कम है। चित्रकूट में करीब 18 प्रतिशत, ललितपुर में 11.5 प्रतिशत और झांसी में लगभग छह प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। हरियाली में आई इस भारी कमी ने बांदा की प्राकृतिक ठंडक खत्म कर दी है।


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