{"_id":"6156130f8ebc3e046110a22b","slug":"bail-to-doctor-in-case-of-scam-lucknow-news-lko5980441143","type":"story","status":"publish","title_hn":"घोटाले के आरोपी डॉक्टर को मिली अग्रिम जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घोटाले के आरोपी डॉक्टर को मिली अग्रिम जमानत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। चारबाग स्थित उत्तर रेलवे डिविजनल हॉस्पिटल में सीएमएस रहने के दौरान दवाइयों की खरीद-फरोख्त में करोड़ों रुपये का घोटाला करने के आरोपी डॉ. उत्कर्ष बंसल को अग्रिम जमानत मिल गई है। भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश अजय विक्रम सिंह ने आरोपी को एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें दाखिल करने का आदेश दिया है।
अभियोजन की ओर से कहा गया कि नार्दन रेलवे (मकैनिकल) के डिप्टी चीफ विजिलेंस ऑफिसर विनोद कुमार ने एक दिसम्बर 2015 को शिकायत कर उत्तर रेलवे मंडलीय हॉस्पिटल के पूर्व सीएमएस डॉ. उत्कर्ष बंसल, तत्कालीन एसीएमएस डॉ. राकेश गुप्ता, तत्कालीन सीनियर डीएमओ डॉ. सुनीता गुप्ता, फॉर्मासिस्ट एसएस मिश्रा और अस्पताल सहायक ताराचंद पर 2012 से 2014 के बीच रेलवे अस्पताल में लोकल दवाओं और इंजेक्शन की खरीद व कैंसर की दवाओं की खरीद में अनियमितता का आरोप लगाया था।
आरोप था कि डॉ. राकेश गुप्ता जिन फर्मों से दवाइयां खरीदते थे, उसकी स्वीकृति डॉ. उत्कर्ष बंसल देते थे और वो फर्म दिए गए पते पर थी ही नहीं। आरोप है कि डॉ. बंसल अपनी वित्तीय अधिकारिता 20,000 रुपये प्रतिदिन से अधिक की दवाइयां क्रय करने की स्वीकृति देते थे। यह भी आरोप था कि फर्जी परचेज ऑर्डर के आधार पर खरीददारी की जाती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन की ओर से कहा गया कि नार्दन रेलवे (मकैनिकल) के डिप्टी चीफ विजिलेंस ऑफिसर विनोद कुमार ने एक दिसम्बर 2015 को शिकायत कर उत्तर रेलवे मंडलीय हॉस्पिटल के पूर्व सीएमएस डॉ. उत्कर्ष बंसल, तत्कालीन एसीएमएस डॉ. राकेश गुप्ता, तत्कालीन सीनियर डीएमओ डॉ. सुनीता गुप्ता, फॉर्मासिस्ट एसएस मिश्रा और अस्पताल सहायक ताराचंद पर 2012 से 2014 के बीच रेलवे अस्पताल में लोकल दवाओं और इंजेक्शन की खरीद व कैंसर की दवाओं की खरीद में अनियमितता का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
आरोप था कि डॉ. राकेश गुप्ता जिन फर्मों से दवाइयां खरीदते थे, उसकी स्वीकृति डॉ. उत्कर्ष बंसल देते थे और वो फर्म दिए गए पते पर थी ही नहीं। आरोप है कि डॉ. बंसल अपनी वित्तीय अधिकारिता 20,000 रुपये प्रतिदिन से अधिक की दवाइयां क्रय करने की स्वीकृति देते थे। यह भी आरोप था कि फर्जी परचेज ऑर्डर के आधार पर खरीददारी की जाती थी।
विज्ञापन